– शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट
दुर्ग। प्रदेश सरकार भले ही सुशासन और पारदर्शिता के दावे करती हो, लेकिन दुर्ग जिला खाद्य विभाग की कार्यशैली इन दावों को दिन-दहाड़े ठेंगा दिखा रही है। गरीबों को उनका हक दिलाने के लिए संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाला हजारों क्विंटल चावल रहस्यमयी तरीके से "रातों-रात" गायब हो जाता है और जिम्मेदार अधिकारी "सवालों के सामने मौन" ओढ़ लेते हैं।
शौर्यपथ समाचार द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के अनुसार, एक ही रात में 10,000 क्विंटल चावल का गायब हो जाना किसी सामान्य लापरवाही का नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध और संगठित भ्रष्टाचार का संकेत है। जिला खाद्य अधिकारी श्री अतरी ने देर से ही सही, स्वीकार किया कि अप्रैल माह में हुए भौतिक सत्यापन के बाद 40 से अधिक राशन दुकानों पर कार्रवाई की गई थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह कार्रवाई पर्याप्त थी?
भंडारण दिखाया गया, राशन नदारद!
नगरीय निकाय क्षेत्र में संचालित दुकान क्रमांक 1055 की स्थिति और भी शर्मनाक है। विभागीय दस्तावेजों में जहां दुकान में लगभग 80 क्विंटल चावल का स्टॉक दर्ज है, वहीं दुकान के बाहर "राशन उपलब्ध नहीं" का बोर्ड लटका हुआ है। इससे बड़ा धोखा उन गरीबों के साथ क्या हो सकता है जो महीनेभर इसी राशन पर निर्भर रहते हैं?
ग्रामीण क्षेत्र भी अछूता नहीं
ग्रामीण दुकान नंबर 1040 में अप्रैल में ही 17,000 किलो चावल की कमी पाई गई थी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्या विभाग के भीतर कोई अदृश्य हाथ इन दुकानों को बचा रहा है?
राजनीतिक संरक्षण और विभागीय चुप्पी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई राशन दुकान संचालकों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने से हिचक रहे हैं। यह न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता है बल्कि सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को प्रश्रय देना भी है।
सेवानिवृत्ति की तैयारी में लापरवाह अधिकारी?
जिला खाद्य अधिकारी श्री अतरी की सेवानिवृत्ति निकट है, ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं वे रिटायरमेंट के पहले "विवादों से बचने" के लिए इन अनियमितताओं पर जानबूझकर आंखें तो नहीं मूंदे हुए हैं?
मुख्यमंत्री के सुशासन की खुली धज्जियां
प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा सुशासन को प्राथमिकता देने की बात तो की जाती है, परंतु ज़मीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। जिस जिले में एक ही रात में 10,000 क्विंटल चावल गायब हो जाता है और अधिकारियों को इसका कोई "ठोस जवाब" नहीं होता, वहां सुशासन की बात करना बेमानी नहीं तो और क्या है?
अब वक्त है सवाल पूछने का:
1. क्या जिलाधिकारी अभिजीत सिंह इस गंभीर मामले में संज्ञान लेंगे?
2. क्या 40 दुकानों पर की गई कार्रवाई के बाद अब बाकी दोषियों की बारी आएगी?
3. क्या इस हेराफेरी के पीछे छिपे राजनीतिक संरक्षण का पर्दाफाश होगा?