दुर्ग / शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट।
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (क्कष्ठस्) में एक बार फिर खुली लूट का मामला सामने आया है। दुकान क्रमांक 1051, कसारीडीह में 25 जून को रिकॉर्ड में जहां 28,000 किलो चावल दर्ज था, वहीं मौके पर एक किलो भी चावल उपलब्ध नहीं पाया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि इसके बावजूद राशनकार्ड में वितरण की एंट्री जारी रही।
26 जून की सुबह भी स्थिति जस की तस रही — दुकान खाली, लेकिन कागजों में चावल उपलब्ध। इससे साफ जाहिर होता है कि दुकान संचालक द्वारा लाभार्थियों से राशन की अवैध खरीद-बिक्री कर खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है।
गौरतलब है कि इस दुकान को लेकर पूर्व में भी गड़बडिय़ों की शिकायतें मिल चुकी हैं। जून माह के प्रथम सप्ताह में भी जिला खाद्य विभाग ने स्टॉक में कम चावल मिलने पर नोटिस जारी किया था। इसके अलावा मार्च-अप्रैल में विभागीय जांच में 10,000 क्विंटल से अधिक पीडीएस चावल की अनियमितता उजागर हुई थी। कई दुकानों को नोटिस मिला, लेकिन कई मामलों में महज औपचारिकता निभाकर मामले को दबा दिया गया।
अब सवाल उठता है कि बार-बार शिकायतों और नोटिस के बावजूद, एक ही दुकान पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या खाद्य निरीक्षक टिकेश्वर साहू द्वारा मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है या फिर यह मिलीभगत का मामला है? संपर्क करने की कोशिश पर अधिकारी उपलब्ध नहीं हो पाए।
क्षेत्रीय पार्षद प्रतिनिधि हामिद खोखर ने भी दुकान को लेकर पुरानी शिकायतों की पुष्टि की है और कहा है कि विभाग की निष्क्रियता ही कालाबाजारी को बढ़ावा दे रही है।
अब निगाहें सहायक खाद्य अधिकारी श्रीमती नेहा तिवारी पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वह इस गंभीर मामले में ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई करेंगी, या फिर विभागीय चुप्पी की परंपरा को ही आगे बढ़ाया जाएगा।
ऐसे में बड़ा सवाल यही उठता है – जब एक ही दुकान पर बार-बार गड़बड़ी सामने आ रही है, नोटिस भी दिए जा चुके हैं, फिर क्या जिला खाद्य विभाग को ऐसे संचालक का लाइसेंस निरस्त कर किसी अन्य जिम्मेदार समूह को दुकान संचालन नहीं सौंपना चाहिए?
यदि अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो पीडीएस व्यवस्था पर जनता का भरोसा पूरी तरह डगमगा जाएगा।