दुर्ग | शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट
दुर्ग जिले में खाद्य विभाग द्वारा हाल ही में किए गए भौतिक सत्यापन में लगभग 9000 क्विंटल पीडीएस चावल की स्टॉक कमी सामने आई है, जिसने जिले में संचालित राशन दुकानों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार की पुष्टि कर दी है।
इसी बीच दुकान क्रमांक 1051, केलाबाड़ी (दुर्ग) लगातार चर्चा में बनी हुई है। इस दुकान के विरुद्ध पूर्व में भी नियम विरुद्ध चावल की खुलेआम बिक्री, स्टॉक में अंतर, नियमों की अनदेखी, और पार्षद सहित नागरिकों की लिखित शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
खाद्य विभाग द्वारा उक्त दुकान को नोटिस जारी किया गया था, फिर भी अनियमितता जारी रहना यह दर्शाता है कि विभागीय कार्रवाई या तो कमजोर रही या केवल दिखावटी। इससे न सिर्फ दोषियों को खुला संरक्षण मिला, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
अब उम्मीदें नए कंट्रोलर पर टिकी
30 जून को पूर्व खाद्य नियंत्रक अतरी जी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, अब विभाग में श्री भदौरिया ने नए जिला खाद्य नियंत्रक के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे । विभागीय सूत्रों के अनुसार, भदौरिया जी एक युवा और निष्पक्ष अफसर के रूप में जाने जाते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे दुकान क्रमांक 1051 जैसे बार-बार विवादों में रहने वाले केंद्रों पर कठोर कार्रवाई करेंगे या फिर वर्षों से जमे अधिकारी उन्हें भी अधूरी और भ्रामक जानकारी देकर भ्रमित करेंगे?
जनता की मांग – एक्शन हो, लीपापोती नहीं
स्थानीय नागरिकों और पार्षदों की मांग है कि अब और कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष कार्रवाई की जाए। पीडीएस जैसी गरीबों के हक की योजना में घोटाले पर जीरो टॉलरेंस होना चाहिए, तभी विभाग की साख और शासन की योजनाओं की गरिमा बनी रह सकती है।
सम्पादकीय टिप्पणी
"यदि गरीबों का राशन सुरक्षित नहीं, तो योजनाएं सिर्फ कागजों की शोभा हैं। अब वक्त है कि जवाबदेही तय की जाए, कार्रवाई हो – दिखावा नहीं।"