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"बाप बीमार, बेटा भृत्य – प्रिंसिपल की शह पर सरकारी वेतन में सेंध! दीपक वैष्णव की रिपोर्ट" Featured

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  रिपोर्ट: दीपक वैष्णव / शौर्यपथ

कोंडागांव।
सरकारी तंत्र में व्याप्त लापरवाही और मिलीभगत का एक शर्मनाक मामला कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत चिलपुटी से सामने आया है, जहां शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ भृत्य श्यामलाल यादव के स्थान पर उसका बेटा पिछले एक वर्ष से स्कूल में सेवा दे रहा था – और यह सब हुआ विद्यालय के प्रभारी प्रधान पाठक की शह पर।

श्यामलाल यादव लकवा जैसी बीमारी से ग्रस्त है, चलने-फिरने और बोलने में असमर्थ है, फिर भी स्कूल से उसका वेतन निरंतर जारी होता रहा। जब इसकी पड़ताल की गई तो पाया गया कि उसकी जगह उसका बेटा देवी धन यादव स्कूल में नियमित रूप से कार्य कर रहा है।

प्रिंसिपल की मिलीभगत से खेला गया "बाप-बेटा वेतन खेल"

पड़ताल में सामने आया कि विद्यालय के प्रभारी शिक्षक कृष्णा सिंह ने इस पूरे प्रकरण में आंखें मूंदे रखीं नहीं, बल्कि उसकी मौन सहमति और संभावित लाभ के चलते यह फर्जीवाड़ा बेरोकटोक चलता रहा।

जब शिक्षक कृष्णा सिंह से संपर्क कर जानकारी चाही गई, तो उन्होंने इस व्यवस्था की अप्रत्यक्ष रूप से पुष्टि की। लेकिन जैसे ही भृत्य से बात करने का प्रयास किया गया, उसे ताबड़तोड़ मेडिकल में भर्ती करा दिया गया – जिससे पूरा मामला और संदेहास्पद बन गया।

फर्जी मेडिकल की भी आशंका

सूत्रों की मानें तो यह भी संभव है कि भृत्य को मेडिकल में भर्ती दिखाकर फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र तैयार कराया गया हो। यदि इस दिशा में निष्पक्ष जांच की जाए, तो एक और परत उजागर हो सकती है।

प्रशासन ने ली जानकारी, जांच का भरोसा

प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने शौर्यपथ संवाददाता से बातचीत में कहा –
"आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। इस पर नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"

ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

ग्रामवासियों और शिक्षकों के बीच इस फर्जीवाड़े को लेकर तीव्र नाराज़गी है। उनकी मांग है कि शिक्षक और भृत्य दोनों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा धारा 420, 409, 120B के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया जाए।


? विशेष टिप्पणी:

यह समाचार शौर्यपथ के खोजी पत्रकार दीपक वैष्णव द्वारा तैयार की गई एक विशेष रिपोर्ट है, जो विद्यालयों और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गड़बड़ियों को बेनकाब करती है।

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शौर्यपथ