दीपक वैष्णव क़ी खास रिपोर्ट
सुकमा. नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है, बल्कि महिला सुरक्षा और आदिवासी कर्मचारियों के सम्मान पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। कोंटा ब्लॉक में पदस्थ एक आदिवासी महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है।
पीड़िता के अनुसार, 21 अगस्त 2025 को उसे कोंटा ब्लॉक से अचानक सीएमएचओ कार्यालय सुकमा में कार्य हेतु अटैच करने का आदेश जारी किया गया। आरोप है कि इसके बाद न तो उससे कोई नियमित कार्यालयीन कार्य कराया गया और न ही उसे स्पष्ट जिम्मेदारी दी गई। महिला कर्मचारी का कहना है कि इस दौरान उसे मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार और अनावश्यक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। एक आदिवासी महिला के लिए यह स्थिति न केवल मानसिक रूप से पीड़ादायक रही, बल्कि उसके आत्मसम्मान को भी गहरी ठेस पहुंचाने वाली बताई जा रही है।
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने इसे गंभीर बताते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पूर्व विधायक ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल एक महिला कर्मचारी के साथ अन्याय है, बल्कि सरकारी पद की गरिमा का भी दुरुपयोग है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी महिला कर्मचारी भय या दबाव में काम करने को मजबूर न हो। वहीं इस मामले में जब पीड़िता से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।