दुर्ग। शौर्यपथ विशेष
एक ओर दुर्ग नगर पालिक निगम द्वारा अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। शहर की सबसे प्रमुख सड़कों में शामिल शानदार रोड (चर्च मार्ग) पर अवैध बाजार खुलेआम अपने पांव पसार रहा है और निगम प्रशासन चंद ₹50 की गंदगी शुल्क वसूली में संतुष्ट होकर आंखें मूंदे बैठा है।
शहर में बढ़ते अतिक्रमण अब महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल बन चुके हैं। अवैध कब्जे निरंतर बढ़ रहे हैं, ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त हो रही है, आम नागरिक परेशान हैं, लेकिन निगम प्रशासन प्रेस विज्ञप्तियों में अपनी पीठ थपथपाने से आगे कुछ करने को तैयार नहीं।
चर्च मार्ग पर लगने वाला यह अवैध बाजार दिन-ब-दिन फैलता जा रहा है। सड़कें सिमट रही हैं, गंदगी बढ़ रही है, दुर्घटनाओं का खतरा मंडरा रहा है, मगर निगम आयुक्त को मानो सिर्फ ₹50 की रसीद से ही मतलब है। यही छोटी-छोटी ‘वसूली’ आने वाले समय में एक बड़े शहरी विवाद का बीज बो रही है, जिसका खामियाजा सीधे शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा।
दुर्ग जिले में सुपेला संडे मार्केट पहले ही अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण बन चुका है। अब उसी राह पर दुर्ग नगर निगम को भी धकेला जा रहा है। हर चौक-चौराहे पर अवैध कब्जा, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ छोटे कर्मचारियों को नोटिस और बड़े मामलों पर रहस्यमयी चुप्पी—यही है निगम प्रशासन की असली तस्वीर।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस क्षेत्र में
स्कूल शिक्षा मंत्री का निवास,
दर्जा प्राप्त मंत्री ललित चंद्राकर का घर,
भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे का निवास,
और ‘शहरी सरकार’ भारतीय जनता पार्टी का दबदबा है,
अवैध बाजार के खिलाफ कोई पहल नहीं की जा रही। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या चुनाव के समय ‘सुशासन’ के नारे सिर्फ सत्ता हासिल करने का साधन थे? क्या अब दुर्ग में सुशासन की जगह मौन शासन ने ले ली है?
शानदार रोड पर लगने वाला अवैध बाजार आज भाजपा और निगम प्रशासन के खोखले दावों का जीता-जागता प्रमाण बन चुका है। अगर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सड़क नहीं, बल्कि निगम की नाक पर लग चुका अवैध तमाचा कहलाएगा—और उसकी गूंज बहुत दूर तक जाएगी।