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“पोस्टरों का शहर, सवालों की सरकार” : जन्मदिन के जश्न में डूबा दुर्ग, बुलडोजर सरकार के दावों के बीच ज़मीन पर बिखरी अव्यवस्था Featured

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**ठेकेदार यूनियन की बधाई से लेकर ‘बुलडोजर सरकार’ के प्रचार तक

जन्मदिन के पोस्टरों में विकास, ज़मीन पर सवालों का अंबार**

दुर्ग | विशेष रिपोर्ट

दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार का 31 जनवरी को जन्मदिन इस बार केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आयोजन शहर भर में चर्चा, सवाल और बहस का विषय बन गया है। शहर में बड़े पैमाने पर लगाए गए बधाई पोस्टर—विशेषकर ठेकेदार यूनियन के नाम से—नगर निगम के इतिहास में पहली बार देखने को मिले हैं।

बताया जा रहा है कि जन्मदिन के आयोजन और प्रचार-प्रसार में लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन चर्चा का असली कारण यह है कि ठेकेदारों द्वारा लगाए गए कई पोस्टरों में ऐसे लोगों के चेहरे भी शामिल हैं, जिन्हें स्वयं यह जानकारी नहीं थी कि उनकी तस्वीरें बधाई संदेश में उपयोग की जा चुकी हैं। सोशल मीडिया के दौर में तस्वीरें जुटाना भले आसान हो, लेकिन बिना सहमति तस्वीरों का सार्वजनिक उपयोग कई सवाल खड़े करता है—कि यह प्रचार आखिर किसके इशारे पर और किस उद्देश्य से हो रहा है?

‘बुलडोजर सरकार’ का प्रचार, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग

महापौर अलका बाघमार को विज्ञापनों में “बुलडोजर सरकार” और “विकास की वीरांगना” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई हो रही है, लेकिन शहर के कई प्रमुख इलाके इन दावों की पोल खोलते नज़र आते हैं।

समृद्धि बाजार के सामने, हॉकी ग्राउंड से सटे क्षेत्र में अवैध बाजार निर्माण पर निगम की चुप्पी।

इंदिरा मार्केट में ओम ज्वेलर्स द्वारा बरामदे और सड़क तक किए गए कब्जे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं।

कुआं चौक में गुमटियों की भरमार, जिससे यातायात व्यवस्था लगातार बाधित।

प्राचीन गणेश मंदिर के सामने सड़क पर खुलेआम अवैध कब्जा—और हैरानी की बात यह कि कब्जाधारी ही महापौर के बधाई पोस्टरों में मंच साझा करते दिख रहे हैं।

चर्च गेट मार्ग पर हर शनिवार लगने वाला अवैध बाजार आज भी संचालित।

इसके विपरीत, कपड़ा लाइन जैसे क्षेत्रों में सीमित कार्रवाई को बड़े पैमाने पर प्रचारित कर “अतिक्रमण पर करारा प्रहार” बताया जा रहा है।

गंदगी, अधूरा निर्माण और बुनियादी समस्याएं जस की तस

शहर के कई हिस्सों में समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं—

धमधा नाका में कचरे के ढेर

सुराना कॉलेज के सामने बदबूदार वातावरण

दादा-दादी पार्क के सामने उद्यान का अधूरा निर्माण

मंत्री बंगला–सेवा सदन मार्ग पर अवैध गुमठियों की फौज

सड़कों पर बढ़ती यातायात अव्यवस्था

इतना ही नहीं, पेयजल व्यवस्था भी कई वार्डों में विवाद का कारण बनी हुई है। कहीं गंदे पानी की आपूर्ति तो कहीं अनियमित सप्लाई से नागरिक परेशान हैं।

कागजों में विकास, ज़मीन पर सवाल

नगर निगम के दस्तावेजों में लाखों–करोड़ों रुपये के विकास कार्य दर्ज हैं, लेकिन लोककला मार्ग में लगी लाखों की मूर्तियां आज गंदगी में घिरी हैं, चौपाटी की व्यवस्था बदहाल है और शहर की बुनियादी तस्वीर आम नागरिक खुद देख रहा है।

विज्ञापनों और बधाई संदेशों में प्रयुक्त अतिशयोक्तिपूर्ण शब्दों के बीच शहर की जनता मौन है—लेकिन समझदार भी। यह मौन असहमति का है, जो अपने समय का इंतजार कर रही है।

उम्मीद के साथ बधाई

इन तमाम सवालों और विरोधाभासों के बीच शहर की जनता यही उम्मीद करती है कि जिस तरह जन्मदिन के प्रचार और आयोजन में ऊर्जा व संसाधन लगाए गए हैं, उसी गंभीरता से आने वाले समय में विकास ज़मीन पर भी दिखाई देगा।

इन्हीं उम्मीदों के साथ

महापौर श्रीमती अलका बाघमार को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

शहर चाहता है कि उत्सव के बाद विकास केवल पोस्टरों में नहीं, बल्कि सड़कों, पानी, स्वच्छता और व्यवस्था में भी नज़र आए।

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