आईटी पार्क से खेल सुविधाओं तक मंत्री का विजऩ, निगम में गंदगी और कब्ज़ों का राज
विकास बनाम बदहाली की दो तस्वीरें, दुर्ग की जनता के सामने
दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में अगर बीते एक वर्ष के विकास कार्यों का निष्पक्ष आकलन किया जाए, तो एक कड़वा सच सामने आता है—शहर में विकास यदि कहीं दिखाई देता है, तो वह सिफऱ् पोस्टरों और दावों तक सीमित है। ज़मीनी स्तर पर आम नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं और सुव्यवस्थित शहर की तलाश में भटक रहा है।
हालांकि, इस बदहाल परिदृश्य के बीच कुछ सकारात्मक प्रयास भी नजऱ आते हैं। शहर की प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था मेघ गंगा ग्रुप ने जनसहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए ग्रीन चौक, राजेंद्र प्रसाद चौक, कपड़ा लाइन स्थित वाई-शेप ब्रिज जैसे क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है। इन स्थानों की साज-सज्जा और हरियाली ने यह साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो शहर की खूबसूरती संवारी जा सकती है।
लेकिन दुर्भाग्यवश, यह पहल शहरी सरकार की नहीं, बल्कि समाजसेवियों की देन है।
शहरी सरकार के कार्यकाल में बढ़ती अव्यवस्था
महापौर श्रीमती अलका बाघमार के एक वर्ष के कार्यकाल में दुर्ग शहर कई गंभीर समस्याओं से जूझता दिखाई दे रहा है।
कुआं चौक, महाराजा चौक, धमधा नाका स्थित शासकीय अस्पताल के सामने, सुराना कॉलेज के आसपास बदबूदार वातावरण आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन पर अनुबंध की शर्तें समाप्त होने के बावजूद कब्जा, गणेश मंदिर के सामने अवैध निर्माण, विश्वदीप स्कूल के पास नाली पर स्लैब डालकर संचालित अवैध बाजार—ये सभी उदाहरण प्रशासनिक लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करते हैं।
इतना ही नहीं, दुर्ग नगर निगम के लगभग 20–30 वर्षों के इतिहास में पहली बार भेदभावपूर्ण कार्रवाई के इतने मामले सामने आ रहे हैं। आम नागरिकों पर सख्ती और प्रभावशाली लोगों पर मेहरबानी—यह दोहरा मापदंड आज शहर में खुलकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
आवारा पशुओं की सड़कों पर भरमार, कई वार्डों में जल संकट और गंदगी के ढेर ने जनता के धैर्य की परीक्षा ले ली है।
विधायक से मंत्री तक, गजेंद्र यादव की विकास यात्रा
दूसरी ओर, यदि दुर्ग के विकास की बात की जाए तो वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद शहर को विधायक के रूप में गजेंद्र यादव का नेतृत्व मिला। अल्प समय में विधायक से मंत्री पद तक पहुंचे स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शहर को कई ठोस सौगातें दीं, जो अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बन चुकी हैं।
आईटी पार्क दुर्ग की शुरुआत, जिसका एमओयू प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में संपन्न हुआ, आने वाले समय में दुर्ग को आईटी और रोजगार के नक्शे पर नई पहचान देगा।
इसके अलावा स्विमिंग पूल, बैडमिंटन ग्राउंड, समृद्धि बाजार के सामने फुटकर सब्जी व्यापारियों के लिए व्यवस्थित शेड, गया नगर में सामाजिक भवन जैसी योजनाएं आज धरातल पर दिखाई दे रही हैं।
कभी अतिशयोक्ति मानी जाने वाली ये घोषणाएं अब साकार रूप ले चुकी हैं। कई और वादे हैं, जो भविष्य में पूरे होंगे या नहीं—यह समय तय करेगा, लेकिन वर्तमान में दो वर्षों के कार्यकाल में मंत्री गजेंद्र यादव ने दुर्ग की जनता को ठोस विकास का अहसास जरूर कराया है।
जनता के सामने दो मॉडल
आज दुर्ग शहर के सामने विकास के दो मॉडल स्पष्ट हैं—
एक ओर राज्य सरकार और मंत्री गजेंद्र यादव की योजनाएं, जो रोजगार, खेल, सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
दूसरी ओर, नगर निगम की शहरी सरकार, जहां अव्यवस्था, गंदगी, अवैध कब्जे और भेदभावपूर्ण कार्रवाई आम नागरिकों के लिए रोज़मर्रा की परेशानी बन चुकी है।
दुर्ग की जनता अब पोस्टरों में नहीं, ज़मीनी हकीकत में विकास देखना चाहती है। सवाल यह है कि क्या शहरी सरकार जनता की इस अपेक्षा पर खरी उतरेगी, या फिर विकास की असली कहानी सिफऱ् मंत्री स्तर तक ही सीमित रह जाएगी?