दुर्ग/शौर्यपथ।
दुर्ग जिले में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म के चर्चित मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल भीम नारायण (बी.एन.) पांडेय तथा PWD ठेकेदार संजय पंडित ने दुर्ग की फास्ट ट्रैक कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है।
दोनों आरोपी 30 जनवरी 2026 को भिलाई महिला थाने में अपराध पंजीबद्ध होने के बाद से फरार बताए जा रहे थे। पुलिस द्वारा पूर्व में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरेंडर के बाद अब इस मामले में सभी छह नामजद आरोपी कानून की प्रक्रिया के दायरे में आ गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता की शिकायत के अनुसार, उसे कथित रूप से नौकरी दिलाने के नाम पर प्रलोभन दिया गया और बाद में ब्लैकमेल कर लंबे समय तक शोषण किया गया। पुलिस ने मामले में गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। प्रकरण की विवेचना जारी है तथा आगे की न्यायिक प्रक्रिया फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगी।
अब तक सामने आए आरोपी (फोटो के आधार पर विवरण)
जांच में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं (आरोपों की पुष्टि न्यायालय में विचाराधीन है):
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गोविंद सिंह ठाकुर (62 वर्ष) – पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त कर्मचारी।
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राजू कश्यप – पीडब्ल्यूडी में टाइमकीपर।
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बी.एन. पांडेय – पूर्व में मत्स्य विभाग से जुड़े रहे, प्रभाव का उपयोग करने के आरोप।
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संजय पंडित – पीडब्ल्यूडी ठेकेदार।
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अनिल चौधरी (60 वर्ष) – कारोबारी।
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विजय अग्रवाल (37 वर्ष) – होटल में बुलाकर कथित दुष्कर्म का आरोप।
(उपरोक्त सभी पर लगाए गए आरोप न्यायालय में परीक्षणाधीन हैं।)
NSUI ने सौंपा ज्ञापन, SIT गठन की मांग
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) छत्तीसगढ़ के जिला अध्यक्ष गुरलीन सिंह के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक, दुर्ग को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि घटना 30 जनवरी को दर्ज होने के बावजूद दो आरोपियों की गिरफ्तारी में विलंब हुआ। संगठन ने आशंका व्यक्त की कि जांच प्रक्रिया में देरी कहीं किसी प्रकार के दबाव का परिणाम तो नहीं है।
जिला अध्यक्ष गुरलीन सिंह ने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव जांच को प्रभावित कर रहा है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच की मांग की।
NSUI ने पांच दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी भी दी है। ज्ञापन सौंपने के दौरान आदिल खान, मिशंक मिश्रा, संगम यादव, राहुल सिंह, पीयूष सिंह, वैभव गिरी, दिव्यांशु मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
दो आरोपियों के सरेंडर के बाद अब पुलिस रिमांड, पूछताछ और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यह मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण न्यायालय में विशेष संवेदनशीलता के साथ विचाराधीन रहेगा।
जिले में इस प्रकरण को लेकर सामाजिक एवं राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
⚖️ महत्वपूर्ण: प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक निर्णय के पश्चात ही होगी।