दुर्ग,।
दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में मंगलवार को जो दृश्य सामने आया, उसने नगर निगम की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया। आमतौर पर जहां विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरता है, वहीं इस बार सत्ता पक्ष के पार्षद ही अपनी ही “शहरी सरकार” पर हमलावर नजर आए।
सामान्य सभा में विपक्ष के पार्षद संख्या में भले ही कम रहे और अपेक्षाकृत शांत दिखे, लेकिन सत्ता पक्ष के पार्षदों की एक लंबी कतार ने मोर्चा संभालते हुए महापौर और एमआईसी (MIC) पर सीधा हमला बोला। आरोप साफ था—विकास कार्यों में खुला भेदभाव।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई वार्डों को विकास कार्यों से पूरी तरह वंचित रखा गया है, जबकि कुछ वार्डों में लाखों रुपए के कार्य स्वीकृत कर दिए गए। इस असमानता से नाराज पार्षदों ने सभा के भीतर ही अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
स्थिति इतनी असहज हो गई कि महापौर और एमआईसी सदस्य, पार्षदों के सवालों का संतोषजनक जवाब देने में असफल नजर आए। नगर निगम के इतिहास में यह शायद पहला मौका माना जा रहा है जब सत्ता पक्ष के भीतर ही इस स्तर की खुली नाराजगी और टकराव सामने आया हो।
“ट्रिपल इंजन सरकार” पर भी सवाल
सभा में उठे इस बवाल ने उन दावों पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया, जिनमें “ट्रिपल इंजन सरकार” के जरिए शहर में विकास और सुशासन का वादा किया गया था। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, सांसद विजय बघेल और गृह मंत्री विजय शर्मा के वादों के उलट, अब उसी पार्टी के पार्षद व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष खामोश, सत्ता पक्ष आक्रामक
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जहां विपक्ष अपेक्षाकृत मौन रहा, वहीं सत्ता पक्ष के पार्षद ही सबसे ज्यादा आक्रामक दिखाई दिए। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में शहरी सरकार अपने ही घर में घिरी नजर आई।
“विकास की वीरांगना” पर कटाक्ष
शहर में विकास के दावों और प्रचार के बीच, पार्षदों ने महापौर की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। “विकास की वीरांगना” जैसे विशेषणों पर कटाक्ष करते हुए पार्षदों ने कहा कि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
अब नजरें सामान्य सभा के दूसरे चरण (भोजन अवकाश के बाद) पर टिकी हैं, जहां यह देखना अहम होगा कि सत्ता पक्ष के पार्षद अपनी ही सरकार से किस तरह जवाब मांगते हैं और क्या शहरी सरकार इस आंतरिक बगावत को संभाल पाएगी या नहीं।