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“सफाई पर सियासी ‘गंदगी’! एक हफ्ते की चुप्पी ने खोले राज—गुप्ता पर गिरेगी गाज या उजागर होगा असली ‘आदेश’?” Featured

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दुर्ग।

दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा इस बार सिर्फ औपचारिक चर्चा का मंच नहीं रही, बल्कि सफाई व्यवस्था के नाम पर सियासी टकराव और प्रशासनिक सवालों का विस्फोट बन गई। मामला वार्ड नंबर 57 में जनवरी महीने के दौरान पूरे एक हफ्ते तक सफाई कार्य बंद रहने का है, जिसने अब शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

भोजन अवकाश के बाद जब सभा दोबारा शुरू हुई, तो वार्ड के सुपरवाइजर ने खुले मंच पर यह स्वीकार किया कि वार्ड 57 में एक हफ्ते तक काम नहीं हुआ और उसी दौरान वार्ड 58 में कार्य किया गया। यह बयान जैसे ही सामने आया, वार्ड 58 की पार्षद ने तुरंत पलटवार करते हुए पूछा—“आखिर हमारे वार्ड में कहां काम हुआ?”

इस सीधे सवाल के सामने सुपरवाइजर का जवाब न तो स्पष्ट था और न ही संतोषजनक, जिससे यह संदेह और गहरा गया कि कहीं न कहीं दबाव में बयान दिया जा रहा है। अब यह दबाव प्रशासनिक था या राजनीतिक—यह जांच का विषय बन चुका है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभापति श्याम शर्मा ने पार्षदों की सहमति से निगम आयुक्त को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। वहीं, सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के पार्षदों ने तत्काल कार्रवाई की मांग कर दी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने दुर्ग की स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लंबे समय से पार्षद इस मुद्दे पर नाराजगी जता रहे थे, लेकिन अब यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है।

खास बात यह है कि आरोप सिर्फ विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि मामला केवल राजनीति नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर खामी का है।

गुप्ता पर कार्रवाई या ‘आदेश’ का खुलासा?

अब पूरा मामला स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है। सवाल यह है कि—

क्या बिना किसी आदेश के एक हफ्ते तक सफाई कार्य रोका जा सकता है?

अगर आदेश था, तो वह किसका था?

और अगर गलती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

नगर निगम के गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या गुप्ता पर निलंबन की गाज गिरेगी, या फिर वे उस नाम का खुलासा करेंगे जिनके निर्देश पर यह पूरा खेल हुआ?

सत्ता पक्ष ही बना ‘सबसे बड़ा विपक्ष’

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि दुर्ग नगर निगम में इस समय सत्ता पक्ष ही अपनी सरकार के खिलाफ सबसे मुखर विपक्ष बन गया है।

अब नजरें निगम आयुक्त की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित रहेगा, या फिर इसके पीछे छिपे “असली आदेश” और जिम्मेदार चेहरे भी सामने आएंगे?

फिलहाल, शहर इंतजार कर रहा है—

“न्याय होगा या सिर्फ कार्रवाई का दिखावा?”

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