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चतुर्भुज राठी द्वारा किये अवैध निर्माण पर महापौर अलका बाघमार मौन? दुर्ग निगम की सामान्य सभा में 'अपनोंÓ ने ही घेरा शहरी सरकार Featured

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दुर्ग / शौर्यपथ विशेष /

दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में 17 मार्च को जो घटनाक्रम सामने आया, उसने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है। आमतौर पर विपक्ष द्वारा सत्ता पक्ष को घेरने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी के ही पार्षद अपनी ही शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आए। खासकर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मामलों में दोहरी नीति के आरोपों ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया।
सभा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि शहर में छोटे दुकानदारों, ठेला-गुमटी वालों पर कार्रवाई की बात तो जोर-शोर से की जाती है, लेकिन कथित रूप से चतुर्भुज राठी के संरक्षण में संचालित "राम रसोई" पर निगम प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

// बस स्टैंड की बेशकीमती जमीन पर 'राम रसोईÓ का संचालन, अनुबंध खत्म फिर भी जारी//
जानकारी के अनुसार, बस स्टैंड स्थित कीमती निगम भूमि पर संचालित राम रसोई का अनुबंध समाप्त हो चुका है। आरोप है कि अनुबंध अवधि के दौरान भी शर्तों का पालन नहीं किया गया, इसके बावजूद न तो जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि अनुबंध समाप्त होने के बाद भी निर्माण और संचालन जारी है, जो सीधे-सीधे नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।

अवैध निर्माण पर विभागों की 'पासिंग द बकÓ
// इस मामले में निगम के अलग-अलग विभागों का रवैया भी सवालों के घेरे में है।
//अतिक्रमण शाखा का कहना है कि उन्हें बाजार विभाग से आदेश नहीं मिला
//बाजार विभाग भवन शाखा पर जिम्मेदारी डाल रहा है
//भवन शाखा का तर्क है कि आवंटन के समय उनसे राय ही नहीं ली गई
इस तरह जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर कार्रवाई से बचने की कोशिश साफ नजर आती है।

शहरभर में अतिक्रमण, कार्रवाई सिर्फ 'कमजोरोंÓ पर?
चर्च रोड, समृद्धि बाजार, जेल चौक, मालवीय नगर, पटेल चौक और कुआं चौक जैसे प्रमुख इलाकों में तेजी से बढ़ते अतिक्रमण पर भी निगम की निष्क्रियता उजागर हुई।
आरोप है कि जहां छोटे व्यापारियों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं प्रभावशाली लोगों के मामलों में प्रशासन मौन साध लेता है।

// सामान्य सभा में भाजपा पार्षदों का विरोध, सभापति ने दिए संकेत//
सामान्य सभा के दौरान भाजपा पार्षदों ने खुलकर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सभापति श्याम शर्मा को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा।उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि अवैध कार्यों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि सरकार और पार्टी की छवि पर आंच न आए।

ट्रिपल इंजन सरकार पर उठे सवाल
सभा में यह भी चर्चा रही कि "ट्रिपल इंजन सरकार" का दावा जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ता दिख रहा है। जहां एक ओर राज्य और केंद्र की योजनाओं को गति मिल रही है, वहीं नगर निगम की कार्यप्रणाली विकास में बाधा बनती नजर आ रही है।

// महापौर की चुप्पी पर बढ़ते सवाल //
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल महापौर अलका बाघमार की भूमिका को लेकर उठ रहा है।
अतिक्रमण हटाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली महापौर पर आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में वे मौन हैं।
विशेष रूप से चतुर्भुज राठी से जुड़े मामले में कार्रवाई का अभाव भेदभाव की नीति और मिलीभगत जैसे गंभीर आरोपों को जन्म दे रहा है।

शहर की जनता और राजनीतिक गलियारों में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निगम प्रशासन राम रसोई और अन्य अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करेगा?
क्या नियमों का पालन सभी पर समान रूप से लागू होगा?
या फिर यह मामला भी राजनीतिक संरक्षण की भेंट चढ़ जाएगा?
फिलहाल, 17 मार्च की सामान्य सभा ने यह साफ कर दिया है कि दुर्ग की "शहरी सरकार" अब विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही घर के सवालों से घिरी हुई है।

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शौर्यपथ