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“गुमटी घोटाले की परतें खुलीं: प्रेस क्लब सदस्य पर नियम विरुद्ध आवंटन का आरोप, निगम की भूमिका भी कटघरे में” Featured

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  • hanumaan janmotsav

दुर्ग | शौर्यपथ समाचार

दुर्ग नगर निगम में पूर्व शहरी सरकार के कार्यकाल के दौरान स्ट्रीट वेंडर्स के लिए किए गए गुमटी आवंटन अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। चर्च रोड और जिला अस्पताल परिसर के सामने किए गए इन आवंटनों में भारी अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप सामने आ रहे हैं, जिनमें अब दुर्ग प्रेस क्लब के एक तथाकथित सदस्य का नाम भी चर्चा में है।

जानकारी के अनुसार, स्ट्रीट वेंडर्स के हित में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) के तहत सर्वे कराकर गुमटियों का आवंटन किया गया था। लेकिन प्रारंभ से ही यह प्रक्रिया पारदर्शिता के अभाव और कथित भ्रष्टाचार के कारण विवादों में रही। आरोप है कि सर्वे में ऐसे लोगों को भी शामिल कर लिया गया, जो वास्तविक रूप से स्ट्रीट वेंडर नहीं थे।

सबसे चौंकाने वाला मामला जिला अस्पताल परिसर के सामने की गुमटियों से जुड़ा है, जहां एक प्रेस क्लब सदस्य ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने रिश्तेदार के नाम पर गुमटी आवंटित करवा ली। यही नहीं, नगर निगम के एक कर्मचारी के बेटे के नाम पर भी इसी तरह का आवंटन किए जाने की बात सामने आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही गुमटी का मूल्य कागजों में कम हो, लेकिन शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित इन स्थानों की वास्तविक कीमत लाखों में है। ऐसे में फर्जी सर्वे के आधार पर आवंटन करना और बाद में उन्हें किराए पर देने की कोशिश करना गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है।

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि जब आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई, तो संबंधित विभाग ने किसी भी प्रकार के आवंटन से इनकार कर दिया। इससे यह संदेह और गहरा गया कि कहीं न कहीं फाइलों को दबाने और तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया।

हालांकि, हाल ही में अलका बाघमार के नेतृत्व वाली वर्तमान शहरी सरकार द्वारा चर्च रोड स्थित गुमटियों पर की गई कार्रवाई में संचालकों ने अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आवंटन NULM विभाग द्वारा ही किया गया था। इस खुलासे के बाद अब जिला अस्पताल परिसर की गुमटियों की जांच की मांग तेज हो गई है।

पूर्व में भी हुआ था खुलासा, पर नहीं हुई कार्रवाई

शौर्यपथ समाचार ने पहले ही इस पूरे गुमटी आवंटन घोटाले का खुलासा किया था, लेकिन उस समय की शहरी सरकार पर मामले को दबाने के आरोप लगे थे। अब जब वर्तमान सरकार ने जांच की प्रक्रिया शुरू की है, तो उम्मीद की जा रही है कि सभी संदिग्ध आवंटनों की निष्पक्ष जांच होगी।

प्रेस क्लब की साख पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने दुर्ग प्रेस क्लब की साख पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर कई वरिष्ठ और प्रतिष्ठित पत्रकार अपनी निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं, वहीं कुछ लोगों के कृत्य पूरे संगठन की छवि को धूमिल कर रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि नगर निगम का बाजार विभाग जिला अस्पताल परिसर के सामने स्थित गुमटियों का निरीक्षण कब करता है और क्या इस कथित गुमटी घोटाले में शामिल लोगों पर ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल, यह मामला शहर में चर्चा और जनचिंता का बड़ा विषय बना हुआ है।

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शौर्यपथ