दुर्ग।
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में “ट्रिपल इंजन सरकार” के नाम पर जिस तेज़ विकास की उम्मीद आम जनता ने लगाई थी, वह अब राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। एक ओर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं स्थानीय विधायक गजेंद्र यादव बस स्टैंड के विस्तार और शहर के समग्र विकास के लिए सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बस स्टैंड विस्तार बनाम अव्यवस्था
मंत्री गजेंद्र यादव ने हाल ही में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बस स्टैंड का दौरा कर इसके विस्तार की स्पष्ट मंशा जताई थी। यह बस स्टैंड जिले का प्रमुख यातायात केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन होता है। ऐसे में विस्तार की योजना को शहर के विकास के लिए अहम माना जा रहा था।
लेकिन इसके विपरीत, बस स्टैंड क्षेत्र में अवैध कब्जों पर कार्रवाई न होना और “राम रसोई” जैसे मामलों में लगभग 2000 वर्गफुट जमीन पर कब्जा बने रहना शहरी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा कर रहा है।
विस्थापन के नाम पर नया विवाद
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब बस स्टैंड के मोड़ के पास, पार्किंग मार्ग पर दो दुकानों के विस्थापन के नाम पर नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यह स्थान पहले से ही यातायात के लिहाज से संवेदनशील है। जानकारों का मानना है कि इससे भविष्य में जाम और अव्यवस्था बढ़ेगी।
आरोप यह भी हैं कि इस तरह के निर्णय न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को बिगाड़ेंगे, बल्कि अवैध कब्जों को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता देने का काम करेंगे।
अवैध बाजार पर भी नरमी?
सेवा सदन के सामने लग रहे अवैध बाजार को लेकर भी शहरी सरकार की भूमिका सवालों के घेरे में है। अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होना यह संकेत दे रहा है कि अवैध व्यापारियों के प्रति नरमी बरती जा रही है।
राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने
दुर्ग की राजनीति में अब यह चर्चा आम हो चली है कि प्रदेश सरकार के मंत्री गजेंद्र यादव और नगर निगम की महापौर अलका बाघमार के बीच तालमेल की कमी विकास में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। सामान्य सभा में भाजपा पार्षदों द्वारा ही अपनी सरकार को घेरना इस आंतरिक असंतोष का खुला प्रमाण माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि मंत्री के प्रयासों की अनदेखी कर शहरी सरकार अलग दिशा में काम कर रही है, और कई मामलों में “झूठा श्रेय” लेने की होड़ भी देखी जा रही है।
जनता के बीच बढ़ती नाराजगी
इन सब घटनाओं के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित आम जनता हो रही है। बस स्टैंड की बदहाल व्यवस्था, अवैध कब्जे और अव्यवस्थित विस्थापन के कारण लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब केंद्र, राज्य और नगर—तीनों स्तर पर एक ही पार्टी की सरकार है, तो फिर विकास कार्यों में यह टकराव क्यों?
आगे क्या?
नजरें अब प्रदेश नेतृत्व और भाजपा संगठन पर टिकी हैं। क्या वे इस आंतरिक खींचतान को समाप्त कर शहर के विकास को प्राथमिकता देंगे, या फिर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में दुर्ग की जनता यूं ही परेशान होती रहेगी?
फिलहाल, दुर्ग में “ट्रिपल इंजन” की रफ्तार विकास से ज्यादा विवादों में फंसी नजर आ रही है।