सार्थक महिला समूह को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया पर उठे सवाल, निगम कर्मचारी से रिश्तेदारी की भी चर्चा
दुर्ग / शौर्यपथ / शहर के गरीबों और जरूरतमंदों के लिए बनाए गए नगर निगम के रैन बसेरों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। कभी शहर में दो रैन बसेरे संचालित होते थे, लेकिन वर्तमान में केवल बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा ही संचालित हो रहा है, जबकि तहसील कार्यालय के सामने पुराने प्रशासनिक भवन का रैन बसेरा वर्षों से बंद पड़ा है।
जानकारों के अनुसार, बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा एक समय पूरी तरह जर्जर हो चुका था। भवन में टूट-फूट, गायब सामान और खराब सुविधाओं के कारण यह उपयोग लायक नहीं बचा था। तत्कालीन आयुक्त इंद्रजीत बर्मन ने लाखों रुपये खर्च कर इसका जीर्णोद्धार कराया, जिसके बाद यह दोबारा शुरू हो सका।
दोनों रैन बसेरों का संचालन एक समय सार्थक महिला समूह या अन्य समूह ( सदस्यों के पारिवारिक रिश्तेदारी ) के पास था। आरोप हैं कि संचालन अवधि के दौरान भवनों और निगम की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा तथा रैन बसेरों का मूल उद्देश्य भी प्रभावित हुआ। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि समूह के संचालकों का संबंध निगम कर्मचारी सुरेश भारती के रिश्तेदारी पक्ष से है, जिसके चलते समूह को जिम्मेदारियां दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
सार्थक महिला समूह को पुलगांव क्षेत्र में बकरी पालन परियोजना के लिए भूमि आवंटित किए जाने को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हमारे समाचार पात्र के द्वारा भी इस मामले को पूर्व में उठाया गया था .
अब शहरवासियों की नजरें वर्तमान आयुक्त सुमित अग्रवाल पर हैं। मांग की जा रही है कि रैन बसेरों के संचालन, सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान और जिम्मेदारियों के आवंटन की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा बंद पड़े दूसरे रैन बसेरे को भी पुनः शुरू किया जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दुर्ग जैसे बड़े शहर को कब तक सिर्फ एक रैन बसेरे के भरोसे रखा जाएगा?