दस्तावेजों और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई धीमी, पूर्व कर्मचारी मुक्तेश की भूमिका को लेकर भी उठ रहे सवाल; निगम प्रशासन की पारदर्शिता पर जनता की नजर
दुर्ग / शौर्यपथ विशेष।
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास के उद्देश्य से किए गए गुमटी आवंटन की योजना अब गंभीर सवालों के घेरे में है। विस्थापन और यातायात व्यवस्था सुधार के नाम पर दी गई गुमटियां आज कथित रूप से किराए और बिक्री के कारोबार का माध्यम बनती नजर आ रही हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इन अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और शिकायतें सामने आने के बाद भी जांच प्रक्रिया बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान जिला अस्पताल परिसर के सामने और चर्चगेट मार्ग पर एनयूएलएम योजना के तहत गुमटियों का आवंटन किया गया था। उद्देश्य था कि सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले जरूरतमंद स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराया जाए, जिससे अतिक्रमण कम हो और शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके।
लेकिन वर्तमान हालात योजना की मूल भावना पर ही प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। कई मामलों में आरोप सामने आए हैं कि जिन लोगों को पुनर्वास के तहत गुमटियां आवंटित की गईं, वे स्वयं वहां व्यवसाय नहीं कर रहे हैं। कुछ गुमटियां किराए पर संचालित होने और कुछ के कथित रूप से हस्तांतरण या बिक्री की शिकायतें सामने आई हैं।
आवंटन से लेकर उपयोग तक, हर चरण में उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गुमटियों के आवंटन में किसी प्रकार की आर्थिक अनियमितता हुई, तो उसका रिकॉर्ड कहां है? आवंटन के समय ली गई राशि किस मद में जमा हुई? क्या निगम के पास सभी लेन-देन का स्पष्ट विवरण उपलब्ध है?
इन सवालों का जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाया है। यही कारण है कि गुमटी आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर संदेह लगातार बढ़ रहा है।
बाजार विभाग को जानकारी, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
इस पूरे मामले में नगर निगम के बाजार विभाग की भूमिका सबसे अधिक चर्चा में है। शिकायतों और दस्तावेजों की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा और बाजार प्रभारी शेखर चंद्राकर की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि गुमटियों के नियम विरुद्ध संचालन, किराए पर दिए जाने और कथित बिक्री जैसे मामलों की जानकारी होने के बाद भी जांच और निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो सकी है।
जांच की धीमी गति से बढ़ रहा संदेह
सूत्रों के अनुसार गुमटी आवंटन से संबंधित मामलों की जांच प्रक्रिया वर्तमान में बेहद धीमी गति से चल रही है। संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच को गति नहीं दिए जाने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
जनता का सवाल है कि यदि दस्तावेज उपलब्ध हैं और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो जांच पूरी करने और दोषियों पर कार्रवाई करने में इतना विलंब क्यों किया जा रहा है?
पूर्व कर्मचारी मुक्तेश की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस मामले में नगर निगम के पूर्व कर्मचारी मुक्तेश की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल से जुड़े कुछ मामलों में अनियमितताओं और कथित घोटाले के तथ्य सामने आ रहे हैं। हालांकि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन सामने आ रहे आरोपों ने निगम प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है।
पुरानी व्यवस्था की गलती या वर्तमान प्रशासन की जिम्मेदारी?
मामले को लेकर यदि जिम्मेदारी पूर्ववर्ती शासनकाल पर डाल दी जाए, तो भी वर्तमान प्रशासन की जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती। नई शहरी सरकार से नागरिकों को उम्मीद है कि पुरानी व्यवस्थाओं में यदि कोई खामी या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
महापौर और निगम प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
नगर निगम दुर्ग की महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन के सामने अब यह बड़ा अवसर है कि वे इस मामले में पारदर्शी जांच कराकर जनता के सामने वास्तविक स्थिति रखें।
क्या अवैध रूप से किराए पर चल रही या नियम विरुद्ध हस्तांतरित गुमटियों का आवंटन निरस्त किया जाएगा?
क्या आवंटन प्रक्रिया में हुए कथित आर्थिक लेन-देन की जांच होगी?
क्या दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी?
इन सवालों के जवाब का इंतजार दुर्ग शहर की जनता कर रही है।
शौर्यपथ का सवाल
गरीब स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास के लिए बनी योजना यदि कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
दस्तावेज सामने हैं, शिकायतें मौजूद हैं, विभाग को जानकारी है, फिर कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है?
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन, महापौर और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि यह मामला भी केवल फाइलों तक सीमित रहेगा या फिर पारदर्शी जांच के साथ दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।