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विकास के पोस्टर किसके, मौत की जिम्मेदारी किसकी? पुलगांव फोरलेन निर्माण में सुरक्षा लापरवाही ने ली एक युवक की जान Featured

  • rounak group

महाराजा चौक से पुलगांव चौक तक निर्माणाधीन सड़क पर सुरक्षा इंतजाम नदारद, ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल; अब शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की जवाबदेही पर भी उठे प्रश्न

दुर्ग।

शहर में विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे, सोशल मीडिया पर निरीक्षण की तस्वीरें और उपलब्धियों के पोस्टर एक तरफ हैं, जबकि दूसरी ओर उन्हीं विकास कार्यों के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। महाराजा चौक से पुलगांव चौक तक बन रही फोरलेन सड़क पर कथित सुरक्षा लापरवाही ने मंगलवार देर शाम एक युवा की जान ले ली।

मनीष ट्रेवल्स में कार्यरत शुभम साहू (25 वर्ष) अपनी मोटरसाइकिल से अपने साथी के साथ ड्यूटी पर जा रहे थे। पुलगांव क्षेत्र में निर्माणाधीन सड़क के पास वाहन फिसलने से वे सड़क पर गिर पड़े और उसी दौरान गुजर रही एक बस की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलगांव पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस सड़क निर्माण कार्य को जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी उपलब्धि बताकर प्रचारित किया जा रहा है, उसकी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर कई जगह गहरे गड्ढे, अधूरी सड़क, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव तथा चेतावनी संकेत और बैरिकेडिंग जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं हैं।

यदि विकास कार्यों का श्रेय जनप्रतिनिधि लेते हैं, तो क्या ऐसी दुर्घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी से भी वे स्वयं को अलग रख सकते हैं? या फिर हर बार की तरह पूरा दोष केवल ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों पर डाल दिया जाएगा?

प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव लगातार सड़क निर्माण कार्यों के निरीक्षण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की बात करते रहे हैं। ऐसे में यह घटना केवल ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

एक वर्ष पहले ही विवाह करने वाले शुभम साहू के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में केवल औपचारिक नोटिस जारी कर कार्रवाई पूरी मान ली जाएगी या फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक और दंडात्मक कार्रवाई होगी।

सिर्फ नोटिस किसी परिवार के उजड़ने की भरपाई नहीं कर सकता। यदि सरकार वास्तव में विकास कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही चाहती है, तो इस घटना को उदाहरण बनाते हुए लापरवाह ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। यही दिवंगत युवक के परिवार के प्रति न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम की दिशा में सबसे प्रभावी संदेश होगा।

(संपादकीय टिप्पणी: किसी दुर्घटना में कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा किया जाता है। उपरोक्त लेख में उठाए गए प्रश्न सार्वजनिक जवाबदेही और सुरक्षा मानकों के पालन से जुड़े हैं।)

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