शौर्यपथ विशेष
दुर्ग। नगर निगम क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाना निश्चित रूप से जनहित से जुड़ा कदम है। पेवर ब्लॉक से लेकर नाली निर्माण तक मौके पर पहुंचकर बेस और निर्माण गुणवत्ता की जांच करना स्वागत योग्य पहल है। लेकिन इसी के साथ अब शहर में एक दूसरा सवाल भी उठने लगा है—क्या औचक निरीक्षण की कसौटी सभी ठेकेदारों के लिए समान है?
हाल के दिनों में महापौर द्वारा कुछ निर्माण कार्यों का मौके पर निरीक्षण किए जाने के बीच आरबीएस कंस्ट्रक्शन के कार्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निगम में आरबीएस कंस्ट्रक्शन को वर्तमान समय के प्रमुख ठेकेदारों में गिना जाने लगा है और शहर के अलग-अलग हिस्सों में उसके निर्माण कार्य बताए जा रहे हैं। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि जब गुणवत्ता की जांच को लेकर महापौर स्वयं सक्रिय हैं, तो आरबीएस कंस्ट्रक्शन के निर्माण कार्य भी उसी पैमाने पर औचक निरीक्षण के दायरे में क्यों नहीं दिखाई दे रहे?
जन्मदिन के बधाई पोस्ट से लेकर निर्माण कार्यों तक उठे सवाल
महापौर श्रीमती अलका बाघमार के जन्मदिन के अवसर पर शहर में लगाए गए बधाई संदेशों और पोस्टरों में आरबीएस कंस्ट्रक्शन से जुड़े ठेकेदार की भूमिका की चर्चा भी सामने आई थी। यह अपने आप में कोई अनियमितता साबित नहीं करता, लेकिन इसी सार्वजनिक संदर्भ के कारण अब निगम के निर्माण कार्यों को लेकर पारदर्शिता और समान जांच का सवाल उठाया जा रहा है।
सवाल यह है कि यदि किसी ठेकेदार के कार्यों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है तो क्या उसी तरह अन्य बड़े ठेकेदारों के कार्यों की भी नियमित और औचक जांच की जा रही है? यदि हां, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं होती?
खंडेलवाल कॉलोनी में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
दो दिन पहले खंडेलवाल कॉलोनी में निर्माणाधीन नाले में सुरक्षा संसाधनों की कमी के बीच एक युवक के गिरने और गंभीर रूप से घायल होने की घटना सामने आई। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग, सुरक्षा संकेतक और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी और ठेकेदार की होती है।
ऐसी घटना के बाद यह भी जरूरी हो जाता है कि निगम केवल निर्माण की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच करे।
वार्ड 17-18 की नाली और पेवर ब्लॉक जांच के बाद बढ़ा सवाल
वार्ड क्रमांक 17-18 में नाली निर्माण में लगे सरियों की गुणवत्ता और निर्माण मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं। वहीं हाल में वार्ड क्रमांक 17 में लगाए जा रहे पेवर ब्लॉक को महापौर द्वारा तुड़वाकर बेस की जांच किए जाने की बात सामने आई।
यह कार्रवाई बताती है कि निगम निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीरता दिखा सकता है। लेकिन इसी दौरान समीपस्थ वार्ड क्रमांक 21 में चल रहे सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जब दोनों क्षेत्र बहुत अधिक दूरी पर नहीं हैं, तो जनता का सवाल स्वाभाविक है कि औचक निरीक्षण की सीमा तय कैसे होती है?
ठेकेदारों में चर्चा—बधाई पोस्ट लगाओ, जांच से बच जाओ?
शहर में अब एक तरह की चर्चा और हंसी-मजाक का विषय भी बनने लगा है कि यदि अगले साल महापौर के जन्मदिन पर किसी ठेकेदार के समर्थन में बधाई संदेशों की भरमार कर दी जाए तो शायद उसके निर्माण कार्य जांच के दायरे से बाहर रहेंगे।
बेशक यह केवल चर्चा और व्यंग्य हो सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी चर्चाओं का जन्म लेना भी निगम प्रशासन के लिए पारदर्शिता की कसौटी पर स्वयं को साबित करने का अवसर है।
जनता का सीधा सवाल
महापौर अलका बाघमार द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच का अभियान यदि वास्तव में शहरहित में है, तो फिर सवाल किसी एक ठेकेदार तक सीमित नहीं होना चाहिए। हर निर्माण कार्य, हर ठेकेदार और हर वार्ड के लिए एक समान जांच व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती?
जनता यह जानना चाहती है—
क्या औचक निरीक्षण केवल चिन्हित ठेकेदारों के कार्यों तक सीमित रहेगा, या आरबीएस कंस्ट्रक्शन सहित निगम के सभी बड़े और छोटे ठेकेदारों के निर्माण कार्यों की भी समान रूप से जांच होगी?
अब निगाह इस बात पर है कि निगम की यह जांच व्यवस्था चयनात्मक दिखाई देती है या वास्तव में निष्पक्षता के समान पैमाने पर आगे बढ़ती है।