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इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ पर लोहा चोरी के आरोपों पर लल्लू सिंह मौन क्यों? पांडे कबाड़ी मामले में सफाई, पुराने सवाल फिर चर्चा में Featured

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बीएसपी में चोरी असंभव बताने वाले ट्रक-ट्रेलर एसोसिएशन के महासचिव के बयान से उठे नए सवाल • विधायक रिकेश सेन का दावा—पांडे कबाड़ी के गोदाम में माल ठिकाने लगाने की कोशिश, पुलिस को दी सूचना • हजारों करोड़ की कथित चोरी की जांच सीबीआई के हवाले

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से लोहा चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। एक ओर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन इस कथित चोरी के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भिलाई ट्रक-ट्रेलर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव मलकीत सिंह उर्फ लल्लू सिंह ने बयान जारी कर संयंत्र से लोहा चोरी की खबरों को भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि सीआईएसएफ की कड़ी सुरक्षा के बीच प्लांट से चोरी संभव नहीं है और एसोसिएशन की किसी गाड़ी को चोरी करते या सेल का लोहा बेचते नहीं पकड़ा गया है।

लेकिन इस सफाई के बीच एक दूसरा सवाल भी चर्चा में है—जब इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू पर सार्वजनिक रूप से लोहा चोरी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जाते रहे, तब लल्लू सिंह ने इसी तरह खुलकर अपना पक्ष क्यों नहीं रखा? क्या उनकी चुप्पी का कोई विशेष कारण है, या वे इस मामले में भी अपना पक्ष रखना चाहेंगे? इन सवालों का जवाब संबंधित पक्षों और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पांडे कबाड़ी के गोदाम पर विधायक रिकेश सेन का दावा

विधायक रिकेश सेन के बयान के अनुसार, सोमवार सुबह पांडे कबाड़ी के गोदाम में कथित रूप से बीएसपी से चोरी किए गए लोहे को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि उनकी टीम के पहुंचने पर माल हटाने का प्रयास हुआ और उन्होंने दुर्ग पुलिस अधीक्षक को इसकी सूचना दी। उनके मुताबिक, पुलिस की टीम छावनी क्षेत्र स्थित गोदाम की ओर रवाना हुई।

रिकेश सेन ने औद्योगिक क्षेत्र के व्यापारियों के हवाले से यह आरोप भी लगाया कि पांडे कबाड़ी के यहां प्रतिदिन बोरिया गेट से लाखों रुपये का लोहा पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, गोदाम में मिले माल का वास्तविक स्रोत, उसकी वैधता और कथित चोरी में किसी की भूमिका जांच के निष्कर्षों से ही स्थापित होगी।

लल्लू सिंह की सफाई और जांच के बीच का सवाल

लल्लू सिंह ने अपने बयान में कहा कि बीएसपी में सीआईएसएफ की निगरानी और जांच की व्यवस्था के कारण चोरी की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पांडे कबाड़ी के गोदाम में मिला लोहा अधिकृत सेल ट्रेडर्स के गोदाम से दूसरे राज्यों में माल ले जाने वाली गाड़ियों से चोरी होने की आशंका की जांच होनी चाहिए। एसोसिएशन ने इस तरह की चोरी का विरोध करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

एसोसिएशन का अपना पक्ष रखना उसका अधिकार है। यदि उसकी किसी गाड़ी की संलिप्तता का प्रमाण नहीं मिला है, तो बिना साक्ष्य पूरे संगठन को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा। लेकिन सीआईएसएफ की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कथित चोरी का मामला सामने आना अपने आप में जांच का विषय है। सुरक्षा व्यवस्था मौजूद होना और चोरी होना असंभव होना—दो अलग-अलग बातें हैं।

इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ को लेकर पुराने आरोप फिर चर्चा में

बीएसपी में कथित लोहा चोरी के मामले के बीच ट्रांसपोर्ट कारोबारी इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू का नाम भी कुछ सार्वजनिक समाचारों और सोशल मीडिया पोस्ट में सामने आता रहा है। एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा प्रकाशित सामग्री में उनके विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कानूनी स्थिति को स्पष्ट करना आवश्यक है।

इसी तरह, अगस्त 2026 में उनके कारोबारी प्रतिष्ठानों पर राज्य जीएसटी विभाग की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल की खबरें भी प्रकाशित हुई थीं। हालांकि, जीएसटी की कार्रवाई अपने आप में बीएसपी से लोहा चोरी में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। दोनों मामलों को जोड़ने के लिए अलग-अलग साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष जरूरी हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि पांडे कबाड़ी प्रकरण में सामने आकर सफाई देने वाले लल्लू सिंह, इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू पर लगाए गए सार्वजनिक आरोपों के संबंध में भी अपना पक्ष रखेंगे या नहीं? क्या वे उन आरोपों को निराधार मानते हैं, या उनके पास कोई ऐसी जानकारी है जिसे सार्वजनिक करना उचित समझते हैं? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संबंधित कारोबारी और ट्रांसपोर्ट जगत के लोगों के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, किसी की चुप्पी को अपराध की स्वीकारोक्ति मानना उचित नहीं होगा।

सीबीआई जांच से बढ़ी जवाबदेही की अपेक्षा

बीएसपी से कथित लोहा और स्क्रैप चोरी का मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तक पहुंच चुका है। 25 सितंबर 2026 की अधिसूचना के माध्यम से राज्य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच के लिए सहमति दी। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रकरण में पुलिस ने अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया है और लगभग 250 टन संदिग्ध लौह स्क्रैप की बरामदगी की गई थी। विधायक रिकेश सेन ने कथित चोरी का आंकड़ा करीब 10,000 करोड़ रुपये बताया है, लेकिन इस राशि और चोरी की वास्तविक अवधि की पुष्टि जांच से होना बाकी है।

अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि संयंत्र से सामग्री बाहर निकलने की प्रक्रिया में किसकी भूमिका थी, परिवहन और खरीद-बिक्री की कड़ियां कहां जुड़ती हैं, तथा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में कहीं चूक या मिलीभगत तो नहीं हुई। सीबीआई जांच की मंजूरी मामले की गंभीरता और व्यापक जांच की आवश्यकता को दर्शाती है; यह किसी खास व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को स्वतः प्रमाणित नहीं करती।

अब जवाब तथ्यों से मिलने चाहिए

बीएसपी देश की सार्वजनिक संपत्ति है। इससे कथित तौर पर लोहा चोरी होने का मामला किसी एक कबाड़ी, ट्रांसपोर्टर या संगठन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पुलिस और सीबीआई को हर संदिग्ध कड़ी की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। वहीं, जिन लोगों के नाम सार्वजनिक आरोपों में सामने आए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

लल्लू सिंह की पांडे कबाड़ी प्रकरण पर सफाई के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या वे इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू को लेकर लगाए गए पुराने आरोपों पर भी कोई स्पष्टीकरण देंगे। साथ ही, विधायक रिकेश सेन के दावों और पांडे कबाड़ी के गोदाम में कथित रूप से मिले माल की वास्तविक स्थिति पर पुलिस की जांच क्या निष्कर्ष निकालती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

क्योंकि बीएसपी से लोहा चोरी के इस बड़े प्रकरण में न केवल चोरी करने वालों, बल्कि चोरी का माल खरीदने वालों, उसे परिवहन करने वालों और किसी भी स्तर पर संरक्षण देने वालों की भूमिका भी साक्ष्यों के आधार पर सामने आनी चाहिए। आरोप चाहे किसी पर भी हों—अंतिम फैसला बयानबाजी नहीं, जांच और प्रमाण करेंगे।

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