"सच्चाई की ताकत के आगे झूठ का अहंकार नहीं टिक सकता" — दशहरा मंच से उठे सत्य और मर्यादा के संदेश के बीच दुर्ग निगम की व्यवस्था पर सवाल
शौर्यपथ विशेष ।
दुर्ग । जय शीतला यंग क्लब दुर्गोत्सव एवं दशहरा पर्व समिति द्वारा बैगापारा में दशहरा पर्व की 51वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आतिशबाजी और रामलीला का मंचन आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे।
जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री गजेंद्र यादव ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि "सच्चाई की ताकत के आगे झूठ का अहंकार नहीं टिक सकता।" उनका संदेश था कि असत्य कितना भी शक्तिशाली और संपन्न क्यों न हो, अंतत: सत्य की राह पर चलने वालों की जीत होती है। लेकिन सवाल यह है कि सत्य, मर्यादा और जनसेवा का यह संदेश सत्ता और प्रशासन की कार्यप्रणाली में कितना दिखाई देता है?
एक तरफ सत्य का संदेश, दूसरी तरफ निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
दुर्ग नगर निगम में महापौर श्रीमती अलका बाघमार के नेतृत्व वाली शहरी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल इसी कसौटी पर परखे जाने चाहिए। चुनाव के दौरान शहर के विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर किए गए वादों के बीच आज सफाई, बाजार व्यवस्था और कथित अवैध कब्जों जैसे मुद्दों पर जवाबदेही की मांग उठ रही है।
आलोचकों का सवाल है कि यदि जनप्रतिनिधियों के लिए सत्य, सेवा और समान व्यवहार ही आदर्श हैं, तो फिर आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में कथित भेदभाव और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल क्यों बने हुए हैं?
गरीबों पर कार्रवाई, बड़े कब्जों पर चुप्पी के आरोप!
इंदिरा मार्केट में दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर कथित अवैध कब्जों का मुद्दा निगम की बाजार व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि बाजार क्षेत्र में कब्जों की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती, जबकि रोजी-रोटी के लिए छोटे पसरे लगाने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो निगम प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई का आधार क्या है और क्या नियम सभी के लिए समान रूप से लागू हो रहे हैं? महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन से इस विषय पर जवाबदेही की अपेक्षा स्वाभाविक है।
कचरे के ढेर से लेकर बाजार व्यवस्था तक, जवाब कौन देगा?
शहर की सफाई व्यवस्था भी चर्चा के केंद्र में है। धंमधा नाका क्षेत्र और चतुर्भुज राठी के कार्यालय के सामने कचरे के बड़े ढेर होने की शिकायतें निगम की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं। स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी नीलेश अग्रवाल और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि ऐसे स्थानों पर नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।
दुर्ग जैसे शहर में नागरिकों को स्वच्छ वातावरण, व्यवस्थित बाजार और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। केवल आयोजन, औपचारिकताओं और प्रोटोकॉल से शहरी विकास की तस्वीर पूरी नहीं होती।
मंत्री के संदेश की असली कसौटी जमीन पर
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मंत्री गजेंद्र यादव का सत्य और अहंकार पर दिया गया संदेश सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही की याद दिलाता है। इसका अर्थ किसी व्यक्ति पर आरोप तय करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
अब सवाल महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन से है—क्या बाजार व्यवस्था, कथित अवैध कब्जों और सफाई संबंधी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी? क्या छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक नियम समान रूप से लागू होंगे? और क्या शहरवासियों को चुनावी वादों के अनुरूप सुविधाएं मिलेंगी?
सत्य और जनसेवा का संदेश तभी सार्थक होगा, जब उसका असर मंच से उतरकर शहर की सड़कों, बाजारों और आम नागरिकों के जीवन में भी दिखाई देगा।