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300-400 पत्रकारों को त्योहारों पर लाखों का ‘सहयोग’! एनके ईंट भट्ठे की डायरी में दर्ज है पूरा हिसाब, आखिर किसे खुश करने की कवायद? Featured

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दीपावली और होली पर पत्रकारों की फौज को बुलाकर बांटी जाती है राशि, आसपास के ग्रामीणों को भी साधने की कोशिश? मिट्टी-मुरुम के कथित अवैध उत्खनन से लेकर खनिज विभाग की भूमिका तक उठे गंभीर सवाल

 

दुर्ग/पीसेगांव। दुर्ग जिले के पीसेगांव स्थित एनके ईंट भट्ठे में दीपावली और होली के अवसर पर होने वाला कथित लाखों रुपये का राशि वितरण अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारी के अनुसार, ईंट भट्ठा संचालक हरिशंकर पांडे एवं गोपाल पांडे द्वारा प्रत्येक वर्ष लगभग 300 से 400 पत्रकारों को एक हजार, दो हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की राशि सहयोग के नाम पर वितरित की जाती है। इतना ही नहीं, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी सहयोग देकर अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश किए जाने की चर्चा है।

हमारी टीम ने जब पीसेगांव स्थित कार्यालय का जायजा लिया तो वहां राशि वितरण की बाकायदा व्यवस्था दिखाई दी। पत्रकारों को बुलाकर राशि देने, कार्यालय में कर्मचारियों की टीम द्वारा लेन-देन संभालने और एक डायरी में नामवार हिसाब दर्ज करने की पूरी व्यवस्था हमारी टीम के रिकॉर्ड में है। सवाल यह है कि आखिर एक ईंट भट्ठा संचालक हर साल लाखों रुपये इस तरह क्यों बांटता है? क्या यह महज त्योहारिक सहयोग है या इसके पीछे कोई व्यावसायिक हित भी जुड़े हैं?

जिले में सैकड़ों ईंट भट्ठे संचालित होने के बावजूद किसी एक प्रतिष्ठान द्वारा इस तरह सैकड़ों पत्रकारों और आसपास के लोगों को नियमित रूप से आर्थिक सहयोग देना अपने आप में चर्चा और जांच का विषय है। आखिर इतनी बड़ी राशि का स्रोत क्या है और इसका लेखा-जोखा किस तरह रखा जाता है? क्या आयकर विभाग इसकी वित्तीय पारदर्शिता की जांच करेगा?

दूसरी ओर, स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ईंट भट्ठे में उपयोग के लिए आवश्यक मिट्टी, मुरुम और रेत का उत्खनन निर्धारित आवश्यकता एवं अनुमति से अधिक किया जाता है। पूर्व में भी मिट्टी की खुदाई और परिवहन को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में खनिज विभाग यह स्पष्ट करे कि संबंधित भट्ठे को कितनी अनुमति मिली है और वास्तविक उत्खनन कितना हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सैकड़ों पत्रकारों और आसपास के लोगों को त्योहारों पर आर्थिक सहयोग देने के पीछे कोई विशेष उद्देश्य है? क्या इस व्यवस्था से संबंधित प्रतिष्ठान को अपने व्यावसायिक हितों के संरक्षण की उम्मीद रहती है? क्या खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इस पूरी व्यवस्था और उत्खनन संबंधी शिकायतों की जानकारी है?

संचालकों हरिशंकर पांडे एवं गोपाल पांडे से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन चर्चा नहीं हो सकी। खनिज अधिकारी से भी संपर्क स्थापित नहीं हो पाया।

जिला प्रशासन और खनिज विभाग को चाहिए कि वे एनके ईंट भट्ठे के उत्खनन, परिवहन, रॉयल्टी, अनुमति और वित्तीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि पत्रकारों एवं अन्य लोगों को दी जाने वाली राशि में किसी प्रकार की अनियमितता या अनुचित व्यावसायिक उद्देश्य सामने आता है, तो उसकी भी वैधानिक जांच होनी चाहिए।

आखिर सवाल सिर्फ लाखों रुपये बांटने का नहीं, बल्कि यह है कि एक ईंट भट्ठा संचालक को हर साल इतनी बड़ी संख्या में लोगों को खुश रखने की आवश्यकता क्यों पड़ती है? कहीं इस आर्थिक उदारता के पीछे खनिज संसाधनों के दोहन और विभागीय जवाबदेही से बचने का कोई खेल तो नहीं? इसका जवाब अब जिला प्रशासन की निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा।

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