दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम के कार्यो में अगर कोई कार्य सौन्दर्यीकरण का होता हो , नव निर्माण का होता हो तो निगम प्रशासन की ज़ारी विज्ञप्ति में वर्णित कार्य का शश्रेय विधायक अरुण वोरा को दिया जाता है कि उक्त कार्य की रूप रेखा और मंशा शहर के विधायक अरुण वोरा की है साथ ही शहर के अधिकतर कार्य या उपलब्धि जो पिछले भाजपा कार्यकाल में किये हो जिनका संधारण भी किया गया हो उस पर भी दुर्ग के विधायक अरुण वोरा की मंशा बताई जाती है .
यह सही भी है दुर्ग निगम का क्षेत्र और शहर के विधायक का क्षेत्र दोनों ही लगभग एक ही सीमा में है अत: शहर के विकास की जिम्मेदारी भी विधायक के उपर निर्भर है किन्तु वही दूसरी तरफ एक सत्य यह भी है कि लगातार नव निर्माण की बात करने वाले शहर के विधायक गौरव पथ की खस्ता हाल पर मौन है , शहर में लगातार हो रहे अतिक्रमण पर मौन है , अवैध कब्जों पर मौन है . किसी भी शहर की सुन्दरता नव निर्माण से नहीं हो सकती जब तक पुराने निर्माण को सहेजे ना जा सके .वर्तमान में भारत में ओक्तंत्र है और लोकतंत्र में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जनता के दिए हुए करो से शहर व देश का निर्माण करते है साथ ही निर्माणाधीन संरचनाओं को सहेजने का दायित्व भी ऐसे ही जनप्रतिनिधियों को भी है .
किन्तु अगर दुर्ग शहर की बात करे तो दुर्ग शहर में नव निर्माण की नयी नयी योजनायें तो आ रही है साथ ही पुराणी संरचनाओ को भी भुला जा रहा है जबकि इन संरचनाओं पर आम जनता के दिए हुए टेक्स के करोडो रूपये पहले ही लग चुके है . दुर्ग शहर में पिछली भाजपा सरकार के समय करोडो में बनी नल घर काम्प्लेक्स आज भी वीरान है , गंजपारा की निगम काम्प्लेक्स आज भी वीरान है , बोरसी में भी निगम की काम्प्लेक्स जो करोडो के लागत से लगी वीरान है , पुष्प वाटिका में करोडो खर्च हुए किन्तु बदहाल स्थिति किसी से छुपी नहीं है , चौपाटी का हाल आम जनता के साथ साथ निगम महापौर और शहर के विधायक अरुण वोरा भी देख ही चुके है , शहर के दादा दादी पार्क की बदहाल स्थिति अपनी कहानी खुद कह रही है , शहर के गौरवपथ पर अतिक्रमण का रेला है जिसके कारण यातायात बाधित होती है और दुर्घटना का कारण बनती है किन्तु इसकी बदहाल स्थिति पर विधायक मौन है , समृद्धि बाज़ार जिस रास्ते में वहा से शहर के विधायक का आना जाना लगा रहता है जहां अक्सर जाम की स्थिति होती है सडको तक अतिक्रमण है किन्तु इस विषय पर कोई सार्थक पहल आखिर विधायक वोरा द्वारा क्यों नहीं उठाई जा रही है .
शहर के इसी गौरव पथ के प्रवेश द्वारा पर गौरव पथ की सोंच को साकार करने वाली पूर्व महापौर डॉ. सरोज पाण्डेय के स्थान पर नयी साज सज्जा कर दी गयी और विधायक का नाम , महापौर का नाम के साथ वार्ड पार्षद का नाम भी अंकित कर दिया गया . शासन है सत्ता की ताकत है तो नाम परिवर्तन एक आम प्रथा है किन्तु आज आम जनता को गौरव पथ में हो रहे लगातार अतिक्रमण दिख रहे है किन्तु यह अतिक्रमण दुर्ग विधायक को क्यों नहीं दिख रहे है , महापौर बाकलीवाल को क्यों नहीं दिख रहा है आयुक्त बर्मन को क्यों नहीं दिख रहा है .
सिर्फ गौरव पथ पर नाम लिखवाने के लिए ही क्या जनप्रतिनिधियों ने जनता के पैसे पोताई में खर्च किये क्या आम जनता के पैसे से हो रहे विकास कार्य पर नाम अंकित करना ही जनप्रतिनिधि का कार्य है . क्या आम जनता को कभी गौरवपथ की गरिमा , अतिक्रमंमुक्त गौरवपथ नजर आएगी या फिर एक नए निर्माण पर विधायक , महापौर , सभापति का नाम अंकित हुआ शिलालेख नजर आएगा . क्या ऐसे ही सुन्दर दुर्ग के निर्माण के लिए 20 साल बाद जनता ने कांग्रेस पर भरोसा किया ..