दुर्ग / शौर्यपथ /
भ्रष्टाचार को पनाह तभी मिलती है जब कार्यवाही करने वाला जिम्मेदार विभाग अपनी आँखों में पट्टी बांध कर कार्य करे या फिर मिलीभगत से ये कार्य हो बिना शासकीय विभाग के परोक्ष या अपरोक्ष संरक्षण के कोई भी संस्था अवैधानिक कार्य नहीं कर सकती . ऐसी संस्था को किसी की भी परवाह नहीं होती . शायद इसीलिए बड़े बुजुर्ग एक कहावत कह गए है सैंया भय कोतवाल तो डर काहे का शायद ये कहावत दुर्ग के मोहन नगर थाना के सामने संचालित दुपहिया वाहन विक्रेता श्री साईं राम होंडा पर सटीक बैठती हो .
शौर्यपथ समाचार पत्र ने पिछले हफ्ते श्री साईं राम होंडा संसथान द्वारा आरटीओ के नाम से वाहन क्रेताओ से तय कीमत से ज्यादा पैसे लेने की बात उठाई थी और मामले से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय दुर्ग को भी समाचार के माध्यम से अवगत कराया था किन्तु बावजूद इसके संचालको को कोई फर्क नहीं पडा जिसका अर्थ यह भी निकल सकता है कि संचालको को आरटीओ कार्यालय दुर्ग की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा हो कि कार्यवाही में किस प्रकार की गति रहती है कार्यालय की . कार्यवाही में देरी या त्वरित इसका अधिकार कार्यालय मुखिया के पास होता है . पूर्व में शौर्यपथ समाचार पत्र ने अनधिकृत निजी वाहन विक्रेताओ के बारे में कार्यालय को अवगत कराया किन्तु जिस संस्था की प्रभारी मंत्री के सामने चर्चा हुई उस संस्था पर कार्यवाही हो गयी अन्य अवैधानिक रूप से संचालित संस्था पर विभाग कार्यवाही में अभी तक मौन धारण किये है .
समाचार पत्र का कार्य शिकायत करना नहीं अपितु ऐसे भ्रष्टाचार को उजागर करना है जिससे आम आदमी को हानि और रसूखदार अवैधानिक कार्य करने वालो को फायदा हो रहा हो . कार्यवाही करने का अधिकार सम्बंधित विभाग को है .जिस तरह श्री साईं राम होंडा के संचालको द्वारा अभी तक आरटीओ शुल्क के नाम से आम जनता से प्रति वाहन एक अनुपात के अनुसार हजार रूपये ज्यादा ले लिए गए है तो अंदाज़ा लगाईये कि अभी तक जिसने भी श्री साईं राम होंडा से वहां खरीदे हो उनके द्वारा आरटीओ के नाम से कितने लाखो का झोल किया गया होगा . ये अलग बात है कि जिन भी उपभोक्ताओ ने दी रकम की रसीद ( आरटीओ) के नाम से ली हो वह आरटीओ कार्यालय में जाकर इसकी जाँच कर सकता है कि नए वाहन का आरटीओ शुल्क कितना है और मय दस्तावेज के उपभोक्ता फोरम के पास भी न्याय मांग सकता है किन्तु आम इंसान हजार रूपये के वापसी के लिए परेशां न होने की सोंचकर एक प्रकार से भ्रष्टाचार को बढ़ावा ही देता है .
आज शौर्यपथ समाचार पत्र आपको श्री साईं राम होंडा से प्राप्त दो नए वाहन के कोटेशन बिल में एक बड़ा अंतर और भ्रष्टाचार का खुलासा करता है जिसमे एक वाहन होंडा एक्टिवा है जिसका मूल्य 67241 है और इसका आरटीओ शुल्क 6437 लिया जा रहा है वही शाइन मोटर साइकिल जिसकी कीमत 75194 रूपये है का आरटीओ शुल्क 6294 लिया जा रहा है दोनों ही राशि में अंतर आपको साफ़ दिखाई दे रहा होगा . जिस वाहन की कीमत ज्यादा उसका आरटीओ शुल्क कम और जिस वाहन की कीमत कम उसका आरटीओ शुल्क ज्यादा जबकि आरटीओ शुल्क शासन के नियमानुसार एक निश्चित प्रतिशत पर तय है तो आखिर ऐसे अनियमितता पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय कब कार्यवाही करेगा ..?