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शासन के राजस्व में हेर फेर करने वाले सब इंजिनियर और पूर्व आयुक्त सुनील अग्रहरी पर कब होगी कार्यवाही Featured

  • devendra yadav birth day

     दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम में डेढ़ साल पूर्व नगर पालिक निगम आयुक्त पद पर सुनील अग्रहरी पदस्त थे . जैसा कि दुर्ग निगम आयुक्त को आवास की सुविधा मिलती है उसी तरह तात्कालिक आयुक्त के रूप में सुनील अग्रहरी को भी निगम आयुक्त के पद में आसीन होने के कारण जल परिसर स्थित आयुक्त निवास प्राप्त हुआ . यह निवास और इसकी देख रेख व संधारण की जिम्मेदारी दुर्ग जिला के पीडब्ल्यूडी विभाग की है किन्तु तात्कालिक आयुक्त सुनील अग्रहरी और सब इंजिनियर भीम राव द्वारा निगम में दस्तावेजो में स्थल के नाम में कूट रचना करते हुए लाखो रूपये के कार्य इस निवास में करवाए गए हजारो रूपये के सीसी टीवी कमरे लगवाए गए और कार्य का नाम अन्य स्थानों का दर्शाया गया .
जबकि नियमानुसार किसी भी बड़े संधारण व रख रखाव में खर्च की जिम्मेदारी जिले के पीडब्ल्यूडी विभाग की है किन्तु निगम मद के लाखो रूपये अपनी सुविधाओ में खर्च करने वाले तात्कालिक आयुक्त और जमीनी स्तर पर कार्य की जाँच और निरिक्षण करने वाले दुर्ग निगम के सब इंजिनियर भीम राव की आपसी सहमती से यह कार्य हो गया जो कि शासन के नियम विरुद्ध है .
कभी खालसा स्कूल के पीछे बने उद्यान के शौचालय के संधारण के नाम से तो कभी जल परिसर के नाली निर्माण संधारण के कार्य से तो कभी खेल मैदान के नाम से तो कभी सडक किनारे पवार ब्लाक लगाने के नाम से आदि आदि भिन्न तरह के नामो से लाखो का कार्य करवा लिया गया . कार्य के नाम में ही घोटाला स्पष्ट नजर आ रहा है तो यक़ीनन कार्यो में भी घोटाला संभव है .
शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा यह मामला पूर्व में भी उठाया गया था किन्तु दुर्ग के वर्तमान निगम आयुक्त द्वारा मामले को संज्ञान में ना लेना कई तरह के संदेहों को जन्म देता है क्योकि वर्तमान में निगम के पार्किंग घोटाले जो लगभग ९ लाख का है जिसमे सिर्फ ठेकेदार द्वारा भुगतान नहीं करने का कारण बताया गया पर निगम की परिषद् और आयुक्त कार्यालय आमने सामने आगया और बात यहाँ तक पहुँच गयी कि परिषद् ने तात्कालिक बाज़ार प्रभारी दुर्गेश गुप्ता के ऊपर कार्यवाही करने की अनुशंषा भी की साथ ही उनके वर्तमान के प्रभार लाइसेंस विभाग से हटा दिया गया और उसका प्रभार एक और विवादित ईई गोस्वामी को दे दिया गया . दो पार्किंग में हुए तथाकथित घोटालो पर आयुक्त कार्यालय और निगम परिषद् आमने सामने हो गयी किन्तु यही आयुक्त कार्यालय लाखो के घोटाले पर लिखित शिकायत के बाद भी मौन है ?
    क्या आयुक्त बर्मन शासकीय कर्मचारी सब इंजिनियर भीम राव व तात्कालिक आयुक्त सुनील अग्रहरी के मामले की जाँच कर कोई निर्णायक कार्यवाही करेंगे या फिर शासकीय अधिकारी होने का लाभ सब इंजिनियर भीम राव व तात्कालिक आयुक्त सुनील अग्रहरी जो अभी वर्तमान में भिलाई निगम में जोन आयुक्त है को मिल जायेगा ? क्या सिर्फ आम जनता पर ही कार्यवाही कर निगम के अधिकारी अपनी प्रशासनिक शक्ति को दर्शाएंगे ? जब फ्लेक्स घोटाले में सभी पर कार्यवाही की अनुशंषा आयुक्त बर्मन कर चुके है तो फिर आयुक्त निवास में फर्जी नाम के सहारे लाखो का निर्माण करवाने वाले मामले में कार्यवाही क्यों नहीं हो सकती ?

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शौर्यपथ