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हमर चिरई-हमर चिन्हारी पक्षी महोत्सव शुरू

  • devendra yadav birth day

रायपुर / शौर्यपथ / देश-विदेश से आने वाले पक्षियों के लिए गिधवा-परसदा जलाशय एक बेहतरीन आश्रय स्थल के रूप में उभर रहा है। शीत ऋतु में यहां आने वाले इन प्रवासी पक्षियों के मदद्देनजर बेमेतरा जिले के इस जलाशय में पक्षी महोत्सव की शुरूआत की गई है। प्रकृति से और नजदीक जुडऩे का प्रयास है। महोत्सव में चित्रकला, फोटो प्रदर्शनी, रंगोली, पिनटैन, मैराथन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
पक्षी महोत्सव प्रदेश में अपनी तरह का पहला आयोजन है। गिधवा-परसदा के दो बड़े जलाशयों में पिछले ं25 साल से विदेशी पक्षी आ रहे हैं। यूरोप-आफ्रिका महाद्वीप से भी हजारो मील समुद्र पार कर पक्षी आते हैं। यहां देशी एवं विदेशी 150 प्रजाति के पक्षियों का प्रवास होता है। सामान्य रूप से अक्टूबर से फरवरी तक उनका इस जलाशय के पास निवास रहता है। पक्षी महोत्सव के आयोजन से छत्तीसगढ़ एवं बाहर के सैलानी इसका लाभ उठा सकेंगे। वही पक्षी प्रेमियों और पक्षी विज्ञानियों के लिए भी अध्ययन और शोध का अवसर मिलेगा।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी ने पक्षी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर कहा कि पक्षी महोत्सव के आयोजन से गिधवा-परसदा जलाशय की पहचान आने वाले समय में अन्तराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा हमर चिरई-हमर चिन्हारी के अन्तर्गत आने वाले समय मे दिसम्बर माह में प्रदेश के 07 स्थानों में पक्षी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, इसके लिए सलीम अली इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों से चर्चा कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जायेगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री चतुर्वेदी ने कहा कि आदिकाल से मनुष्य एवं पक्षियों का सामंजस्य रहा है। वेदों मे भी पक्षियों का चित्रण किया गया है। मनुष्य प्राचीन समय से पेड़ एवं पशु पक्षियों की पूजा करते आ रहा है। उन्होंने कहा कि गिधवा-परसदा जलाशय का परिवेश और आबोहवा देशी एवं विदेशी पक्षियों के अनुकूल है, जिसके चलते यहां अक्टूबर एवं फरवरी के बीच मे पक्षी अपना डेरा डालते हैं। इन जलाशयों के आस-पास पक्षियों के लिए अच्छा भोजन मिलता है। आने वाले समय मे कोशिश होगी की हर वर्ष दिसम्बर माह के अन्त में पक्षी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

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शौर्यपथ