दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग की जनता का दुर्भाग्य कहे या निति का फेर जिस दुर्ग जिले के भिलाई का नाम पुए देश ही नहीं विश्व में अपनी एक अलग पहचान बना चूका है उसी दुर्ग जिले के जिला मुख्यालय का निगम क्षेत्र आज भी विकास की बाँट देख रहा है . दुर्ग निगम से लगे भिलाई निगम क्षेत्र में एक तरफ विकास की नदिया बह रही है नए नए प्रोजेक्ट आ रहे है , खेल के मैदान बन रहे है , उद्यान बन रहे है ,सड़के चौडीकरण की दिशा में अग्रसर है , चौक चौराहों का सौन्दर्य हो रहा है उसकी अपेक्षा अगर दुर्ग की बात करे तो दुर्ग निगम आज भी अपनी पहचान के लिए तरस रहा है . दुर्ग निगम क्षेत्र में ऐसा कोई निर्माण नहीं हुआ जिसे किसी व्यक्ति विशेष की उपलब्धि कहा जाए . कहने को तो दुर्ग निगम क्षेत्र में आये दिन दुर्ग विधान सभा के विधायक नए नए कार्यो का उद्घाटन कर ये जता रहे है कि कि फला कार्य उनकी उपलब्धि है किन्तु अगर इसकी जमीनी हकीकत देखि जाए तो वर्तमान में दुर्ग निगम में ठगडा बाँध और बटालियन से अंजोरा चौडीकरण के अलावा दुर्ग में ऐसा कोई बड़ा कार्य नहीं हो रहा जिसे विकास की नजर से देखा जाए ये दोनों प्रोजेक्ट के बारे में दुर्ग निगम के पूर्व सभापति दिनेश देवांगन ने चर्चा के दौरान कहा कि ये दोनों प्रोजेक्ट भी भाजपा सरकार की देन है वही दुर्ग में तकरीबन २५ करोड़ के कार्य जो अमृत मिशन के कारण प्रारंभ नहीं हो पाए थे उसमे से भी सिर्फ ११ करोड़ के कार्य पुनः शुरू हुए है .
वैसे देखा जाये तो दुर्ग निगम में कार्यो की असली रूप रेखा पूर्व महापौर डॉ. सरोज पाण्डेय के समय देखने को मिली थी एक नई सोंच एक नयी झलक वो उसके बाद देखने को नहीं मिली . प्रदेश में किसी की भी सरकार हो अगर स्थानीय सरकार का मुखिया शहर के विकास के लिए संकल्पित हो तो प्रदेश की सरकार हो या देश की सरकार शासकीय योजना को अपने क्षेत्र में ला सकता है इसका जीता जागता प्रमाण दुर्ग से सटे हुए भिलाई निगम इसका जीता जागता उदहारण है जहा तात्कालिक महापौर देवेन्द्र यादव ने लगातार भिलाई निगम के लिए योजनाये शासन से अपने क्षेत्र के लिए लाया . किन्तु दुर्ग निगम क्षेत्र में सदा से इसका अभाव रहा .
२० वर्षो तक दुर्ग निगम में भाजपा का शासन रहा जिसमे से १० वर्षो के कार्यकाल डॉ. तमेर व श्रीमती चन्द्रिका चंद्राकर के कार्यकाल को तब विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस ने एक रबर स्टाम्प की सरकार कहकर इसे दुर्ग का दुर्भाग्य भी कई बार बता दिया किन्तु कहते है ना कि अगर रात होती है तो सुबह भी होगी ही कुछ ऐसा ही अब कांग्रेस की वर्तमान निगम सरकार के साथ हो रहा है अब कहने की बारी विपक्षी की है अब विपक्षी कह रहे है कि वर्तमान की सरकार भी रबर स्टाम्प की सरकार है . एक नेता ने तो यहाँ तक कहा कि माना कि भाजपा की निगम की सरकार का मुखिया डॉ. सरोज पाण्डेय के समर्थन से बना किन्तु बीते १० सालो में निगम की राजनीती या निगम कार्यालय का चक्कर कभी डॉ. सरोज पाण्डेय ने नहीं लगाया जिस प्रकार वर्तमान में विधायक द्वारा लगाया जाता है .
देखा जाए तो ये सत्य भी है दुर्ग की राजनीती में ज़रा सी भी रूचि रखने वाले सभी जानते है कि डॉ. सरोज पाण्डेय कुछ अति विशेष मौको पर ही निगम में आती रही . खैर ये राजनीती है सबका अपना अपना तरीका होता है राजनीती करने का किन्तु इस राजनीती के चक्कर में शहर की जनता कहा है शहर की वो जनता जो नित नए सपने देखते हुए हर चुनाव में अपना मनपसंद प्रत्याशी चुनकर शहर के विकास के सपने देखती है किन्तु हर बार शहर की जनता का सपना टूटते हुए नजर आता है . इस बार की सरकार का भी कुछ ऐसा ही हाल नजर आ रहा है . साल भर हो गए ना तो शहर से अवैध अतिक्रमण हटा , ना ही सडको की हालत सुधरी , ना ही उद्यानों का कायाकल्प हुआ , ना ही बाज़ार सुव्यवस्थित हुआ , ना ही निगम के सफाई कर्मियों के लिए कोई सार्थक पहल हुई , ना ही शहर की आय बढे ऐसा कोई मार्ग प्रशस्त हुआ . बस हुआ तो ये कि प्रतिदिन निगम से प्रेस विज्ञप्ति ज़ारी होती रही कि विधायक की अनुशंषा से ये कार्य का उद्घाटन हुआ , महापौर के निर्देश पर व्यवस्था में सुधार हुआ ना जाने ऐसे कितने विज्ञप्ति ज़ारी हुए किन्तु अगर मोटे टूर पर देखा जाये तो साल भर पहले इंदिरा मार्केट ( सब्जी दुकाब ) पर शेड लगाने का कार्य की निविदा ज़ारी हुई किन्तु कार्य अभी तक प्रारंभ नहीं हुआ , गौरव पथ जो अतिक्रमण मुक्त था आज सबसे ज्यादा अतिक्रमण गौरव पथ पर हुआ हालाँकि गौरव पथ के मुख्य द्वारा की साज सज्जा हो गयी और वर्तमान जनप्रतिनिधियों के नाम लिख दिए गए किन्तु पुरे मार्ग पर अतिक्रमण का रेला है , इंदिरा मार्केट मुख्य बाज़ार की हालत पहले से ज्यादा बद्दतर है . अभी तीन दिन पहले ही शहर के महापौर धीरज बाकलीवाल द्वारा गौरव पथ का भ्रमण कर अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश देते हुए फोटो और प्रेस विज्ञप्ति ज़ारी हुई थी किन्तु ये आश्चर्य की बात है कि इस कार्य को करने वाले बाज़ार अधिकारी नारायण यादव से शौर्यपथ ने आज जब चर्चा की तो उन्हें इस तरह के किसी आदेश की जानकारी नहीं होने की बात कही . तो क्या महापौर सिर्फ विज्ञप्ति ही जारी करने के लिए बने है क्या उनका आदेश / निर्देश कभी जमीनी स्तर पर भी सक्रीय होगा . ऐसा ही हाल शहर के प्रसिद्द दादा दादी पार्क का है जहां शौचालय की कमी को देखते हुए पिछले साल जनवरी फरवरी में जल्द शौचालय निर्माण की बात कही गयी थी किन्तु आज साल भर बीत जाने के बाद भी दादा दादी पार्क में शौचालय का निर्माण अधूरा है ऐसा नहीं है कि ये शौचालय कोई भाव्व्य बन रहा हो जिसमे करोडो की लगत हो कुछ लाख की लगत से बनने वाला शौचालय आज भी अधूरे निर्माण के साथ खडा है वही महापौर के वार्ड में सर्व सुविधायुक्त वेस्टर्न शौचालय चाँद महीनो में बन कर आज उपयोग में भी आ रहा है .
क्या असली मायने में कोई ऐसा जनप्रतिनिधि शहर को मिलेगा जो शहर के विकास की सोंचेगा क्या दुर्ग निगम के विकास की बात सिर्फ कागजो में सिमट कर रह जाएगी आज मेरा दुर्ग अपनी पहचान के लिए राह देख रहा है क्या दुर्ग निगम के जिम्मेदार अधिकारी जनप्रतिनिधि दुर्ग निगम क्षेत्र के विकास की असली गाथा लिखेंगे ....