सम्पादकीय लेख /शौर्यपथ /भारत में कोरोना संक्रमण जिस गति से बढ़ रहा है, उसी गति से उसके खिलाफ लड़ाई भी बढ़ती जा रही है। सेहत सुरक्षा के इंतजाम बढ़ते जा रहे हैं, नीतियों और रणनीतियों को भी स्वाभाविक ही कसा जा रहा है। इस बीच यह एक सकारात्मक पहल है कि केंद्र सरकार ने 15 राज्यों के 50 जिलों में तीन-तीन सदस्यीय टीमों को रवाना किया है। विशेषज्ञों के ये दल इन जिलों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय प्रशासन की मदद करेंगे। अनुशासन और निगरानी को चाक-चौबंद बनाने में अपनी भूमिका निभाएंगे। भले कुछ देर से यह कदम उठाया गया हो, लेकिन यह स्वागत योग्य है। कुछ राज्यों की ओर से यह शिकायत आ भी रही थी कि केंद्र सरकार कोरोना संक्रमण के पूरे मामले को राज्यों पर डालकर बच नहीं सकती। ऐसे में, केंद्र के लिए यह पहल इसलिए भी जरूरी थी कि राज्य पहले से ज्यादा सजग होकर काम करें।
केंद्र सरकार की इस पहल से यह तो पता चल ही गया है कि देश के 15 राज्यों के 50 जिले कोरोना से ज्यादा पीड़ित हैं। यह सूचना अपने आप में राज्यों पर जरूरी दबाव बनाने के लिए कारगर सिद्ध हो सकती है। जिन 15 राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, उनमें महाराष्ट्र सबसे आगे हैं, जहां सर्वाधिक सात जिलों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई बेहतर प्रबंधन, अनुशासन की मांग कर रही है। तमिलनाडु में भी सात जिले चुनौती पेश कर रहे हैं। इसके अलावा तेलंगाना, राजस्थान, असम, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली में भी ज्यादा प्रयासों की जरूरत है। प्रवासियों के लौटने से डगमगाए बिहार और उत्तर प्रदेश के चार-चार जिलों और ओडिशा के पांच जिलों को भी केंद्र सरकार ने सहायता के योग्य माना है। बेशक, इन जिलों में रोकथाम की रणनीति को सावधानीपूर्वक लागू करना होगा, ताकि कोरोना इन जिलों में भी काबू में आए और बाहर भी न फैले। राज्यों में गई केंद्र की टीमों को अपनी उपयोगिता सही रूप में साबित करनी चाहिए, ताकि आगे भी ऐसे प्रयासों को बल मिल सके। इन टीमों में उचित ही एक डॉक्टर, एक सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और एक महामारी विशेषज्ञ को शामिल किया गया है।
ध्यान रहे, यह समय केंद्र व राज्यों में बेहतर समन्वय का है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी मिलकर चलने और राजनीति से बचने की वकालत की है, तो कोई आश्चर्य नहीं। उन्होंने चेताया भी है कि दिल्ली में कोरोना तेजी से फैलेगा। यह चिंता का समय केवल दिल्ली के लिए नहीं है। राजस्थान अपनी सीमाओं को फिर सील करने के लिए मजबूर हो रहा है, तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने मुंबई में लोगों को दोटूक चेताया है कि वे भीड़ न लगाएं, वरना फिर लॉकडाउन लगाना पडे़गा। जिस तरह की तैयारियां चल रही हैं, जिस तरह से शहर-गांव अनलॉक हो रहे हैं, उससे लगता है, सरकारें मानकर चल रही हैं कि संक्रमण बढे़गा। अत: यह केंद्र और राज्यों ही नहीं, बल्कि राज्यों के स्थानीय प्रशासन और आम लोगों के बीच भी बेहतर समन्वय व सतर्कता का वक्त है। काश! लोग सावधानी बरतते, भीड़ न लगाते। जो देश सुधार की राह पर हैं, उनसे सीखते, तो भारत के बारे में डब्ल्यूएचओ या किसी मुख्यमंत्री को यह न कहना पड़ता कि संक्रमण तेजी से फैलेगा। हमारे पास अभी भी वक्त है, हम हर स्तर पर सजग रहते हुए कोरोना पर काबू कर सकते हैं।