मेलबॉक्स /शौर्यपथ / जहां एक तरफ देश कोरोना जैसे अदृश्य दुश्मन से लड़ रहा है, तो दूसरी तरफ स्त्रियां अपनी आबरू की रक्षा के लिए संघर्षशील हैं। कोरोना-काल में भी महिलाओं को केवल उपभोग की वस्तु समझने वाले लोगों की संख्या न सिर्फ बढ़ रही है, बल्कि उनकी सोच दिनोंदिन और घृणित भी हो रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, भारत में हर 15 मिनट पर किसी महिला से छेड़छाड़ और हर 29 मिनट पर बलात्कार होता है। यह तो वह आंकड़ा है, जो दर्ज हो पाता है, जबकि अधिकांश मामले तो लोक-लाज की वजह से सामने ही नहीं आ पाते। सरकारों ने भले ही इसे रोकने के लिए कठोर कानून बनाए हैं, पर स्थिति यथावत बनी हुई है। अगर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों में महिलाओं के मुद्दों को लेकर जागरूकता व संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाया जाए, तो शायद इन आंकड़ों में कमी देखने को मिले।
आयुष कुमार, दरभंगा, बिहार
खत्म होता खौफ
बाजार निकलने पर पता ही नहीं चलता कि भारत कोरोना जैसी जानलेवा महामारी की जद में है। सड़कों पर भीड़ बनी हुई है और लोग मास्क सिर्फ नाममात्र को पहन रहे हैं। दुकानों में भी पहले की तरह लोग गप्पे लगा रहे हैं। फिजिकल डिस्टेंसिंग नाम की कोई चीज नहीं है। खबर है कि अकेले दिल्ली में जुलाई तक साढ़े पांच लाख कोरोना के मरीज हो जाएंगे, जबकि न्यूजीलैंड ने कोरोना-मुक्त होकर बता दिया है कि सरकार की सख्ती व जनता के सहयोग से बड़ी से बड़ी बीमारी से लड़ा जा सकता है। हमें समझना होगा कि जान है, तभी जहान है। अभी बीमारी ने तो रफ्तार पकड़ी है, खत्म कहां हुई है।
विनय मोहन, सेक्टर 18, जगाधरी
बाल मजदूरी के खिलाफ
कोरोना महामारी के बीच आज विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का महत्व कुछ और बढ़ जाता है। इस साल महामारी की वजह से वैश्विक आजीविका और श्रम बाजार को लगे गहरे झटके से विश्व भर के लाखों बच्चों पर बाल श्रम का खतरा मंडरा रहा है। दुनिया भर में बाल श्रम के आंकड़ों पर एक नजर डालें, तो पांच से 18 साल के 21.8 करोड़ बच्चे रोजगार में हैं, जिनमें से लगभग 7.3 करोड़ बच्चे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से खतरनाक कामों में लगे हैं। महामारी के इस भीषण दौर में वैश्विक गरीबी, श्रम बल की तुलना में काम का अभाव और अभिभावकीय मृत्यु दर में वृद्धि के कारण बच्चों की बड़ी संख्या बाल श्रम की ओर जाएगी। ऐसे में, बाल श्रम को रोकने के लिए सरकारों और समुदायों को मिलकर कड़ी प्रतिबद्धता के साथ आगे आना होगा। हमें स्वहित से निकलकर खुद की मानवीय संवेदना को जगाते हुए बच्चों के कोमल हाथों में काम की बजाय खिलौने और कलम थमाने होंगे। उन्हें खुद के सपने जीते हुए उसे साकार करने की तरफ भी प्रेरित करना होगा, ताकि एक बेहतर कल बन सके।
अंकित कुमार मिश्रा
पटसा, समस्तीपुर
कर्ज की वसूली
भगोड़े व्यवसायी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के 1,350 करोड़ रुपये के गहने जब्त करके हांगकांग से भारत लाए गए हैं। यह ईडी की एक बड़ी कार्रवाई है। अमूमन देखा जाता है कि बैंकों द्वारा छोटे कारोबारियों, किसानों और मजदूरों को दिए गए कर्ज को वापस लेने के लिए कठोर कदम उठाए जाते हैं, मगर बड़े खिलाड़ियों पर हाथ नहीं डाला जाता। ताजा घटनाक्रम से भविष्य में बैंकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी को रोकने में सहायता मिलेगी। इससे जनता में अच्छा संदेश गया है कि अब बड़े लोगों पर भी कुर्की जैसी कार्रवाई की जा सकती है। अब सरकार को विजय माल्या सहित सभी भगोड़े बैंक डिफॉल्टरों का प्रत्यर्पण कराना चाहिए।
विवेक गुप्ता, शादीपुर, बिजनौर