बालोद / शौर्यपथ / शासन की योजना का लाभ लेकर गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम परसतराई का कृषक चंद्रहास देवांगन अच्छी आमदनी अर्जित कर रहा है। कृषक ने अपनी आमदनी का जरिया मत्स्य पालन को बनाया। जिससे वह लगभग आठ लाख रुपए वार्षिक आमदनी प्राप्त कर रहा है। मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषक द्वारा वर्ष 2018-19 में 03.18 हेक्टरयर भूमि 10 वर्ष हेतु लीज पर लेकर मत्स्य विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 02 हेक्टेयर में तालाब निर्माण करवाया गया। जिसके लिए उन्हें मत्स्य पालन विभाग द्वारा 04 लाख 80 हजार रूपए अनुदान प्रदाय किया गया। तत्पश्चात् कृषक ने उक्त तालाब में मत्स्य पालन शुरू किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कृषक द्वारा तालाब में मत्स्य पालन एवं बीज उत्पादन किया जा रहा है। इससे वह लगभग आठ लाख रूपए वार्षिक आमदनी अर्जित कर रहा है। मत्स्य पालन से होने वाली आमदनी से कृषक और उसका परिवार काफी खुश है।
क्रमांक/596
समाचार
नरवा विकास कार्य से ग्रामीणों को मिल रही सिंचाई की सुविधा, परसवानी नाला से 436 हेक्टेयर खेतों में हो रही सिचांई
बालोद, 21 सितम्बर 2021
राज्य शासन की महत्वाकांक्षी नरवा, गरवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना के अन्तर्गत जिले में नरवा विकास के कार्य से ग्रामीणों को सिंचाई की सुविधा मिल रही है। नरवा विकास के कार्य के अंतर्गत गुण्डरदेही विकासखण्ड के परसवानी नाला का चयन किया गया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि परसवानी नाला डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम घीना से प्रारंभ होकर गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम परसवानी में प्रवेश करते हुए ग्राम सिकोला में तान्दुला नदी में समाहित होता हैं। परसवानी नाले की कुल लम्बाई 25.80 किलोमीटर है, जिसमें 21.80 किलोमीटर गुण्डरदेही विकासखण्ड में आता हैं। परसवानी नाला क्षेत्र में ग्राम परसवानी, परसतराई, बोरगहन, अर्जुनी टिकरी, झींका, खपरी, कान्दूल, रौना, देवगहन एवं सिकोला शामिल हैं।
परसवानी नाला में उपचार हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मद से स्वीकृत राशि से 107 संरचनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है, जिसमें मिट्टी का कटाव रोकने, जल स्तर में वृद्धि तथा ग्रामीणों के आजीविका हेतु ब्रशवुड, वृक्षारोपण कार्य, रिजार्च पिट निर्माण, फार्म बंडिग कार्य, नाला गहरीकरण, कच्ची नाली निर्माण आदि कार्य कराया गया है। परसवानी नाला के निकट लगभग 436 किसानों का जमीन है, जिसमें खेती एवं अन्य कार्य करते है। इस नाला में विभिन्न संरचना बनने से हुए जलभराव का उपयोग लगभग 436 हेक्टेयर खेतों में पम्पिंग के माध्यम से सिंचाई किया जा रहा है।