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शिकायत दर्ज होते ही सक्रिय हुआ प्रशासन, समयबद्ध कार्रवाई से परिवार को मिला योजनाओं का लाभ
दुर्ग/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रदेश के नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान का भरोसेमंद माध्यम बनकर सामने आ रही है। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम ओरी निवासी अभिषेक चतुर्वेदी और उनके परिवार की कहानी इस व्यवस्था की प्रभावशीलता का प्रेरक उदाहरण है।
अभिषेक चतुर्वेदी अपनी पत्नी श्रीमती शीतल चतुर्वेदी के नाम से राशन कार्ड बनवाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। संबंधित विभाग में आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद विभिन्न कारणों से राशन कार्ड जारी नहीं हो पा रहा था। इसके कारण परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले खाद्यान्न सहित अन्य शासकीय योजनाओं और सुविधाओं से वंचित था।
जब लगातार प्रयासों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तब अभिषेक चतुर्वेदी ने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले को प्राथमिकता से लेते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और कुछ ही दिनों में आवेदन स्वीकृत कर श्रीमती शीतल चतुर्वेदी के नाम से राशन कार्ड जारी कर दिया।
राशन कार्ड मिलने के बाद चतुर्वेदी परिवार ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतनी शीघ्र समाधान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हुई और बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हो गया।
अभिषेक चतुर्वेदी और उनकी पत्नी शीतल चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा दुर्ग जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों के लिए वास्तव में उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जो लोगों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित कर रही है।
यह उदाहरण दर्शाता है कि शासन की शिकायत निवारण प्रणाली यदि संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ कार्य करे, तो आम नागरिकों को न केवल राहत मिलती है बल्कि शासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत होता है।
*बिहान की दीदी के परिवार को समय पर मिली सहायता, मुश्किल दौर में बनी सरकार की जनकल्याणकारी योजना का सहारा*
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुदूर वनांचल तक पहुंच रहा है। सुकमा जिले में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने एक जरूरतमंद परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा देकर संवेदनशील शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
*दुख की घड़ी में मिला आर्थिक संबल*
सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के ग्राम आरलमपल्ली की दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़ी बिहान की दीदी दुधी सन्नी का 8 अप्रैल 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल गई।
*दो महीने में मिला दो लाख रुपये का बीमा दावा*
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में बिहान योजना की टीम ने तुरंत बीमा दावा तैयार कर भारतीय स्टेट बैंक की दोरनापाल शाखा को भेजा। बैंक ने भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं प्राथमिकता से पूरी कीं।
संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मृतिका के पति एवं नामिनी दुधी सोमा के बैंक खाते में 27 मई 2026 को मात्र दो महीने के भीतर 2 लाख रुपये की बीमा दावा राशि जमा हो गई। यह सहायता राशि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा नायक द्वारा हितग्राही को प्रदान की गई।
*टीमवर्क से मिली समय पर राहत*
इस कार्य में भारतीय स्टेट बैंक दोरनापाल के शाखा प्रबंधक श्री आनंद सिंह, बिहान की पीआरपी श्रीमती रूकमणी कर्मा तथा एफएलसीआरपी कुमारी शालिनी ओडला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार को बिना अनावश्यक विलंब के आर्थिक सहायता मिल सकी।
*गरीब परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बन रही योजना*
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन रही है। परिवार के कमाने वाले सदस्य के असामयिक निधन की स्थिति में मिलने वाली बीमा राशि संकट की घड़ी में बड़ा सहारा साबित होती है।
दुधी सन्नी के परिवार की यह कहानी बताती है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचता है, तो वह न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में परिवार को नया संबल और विश्वास भी प्रदान करता है।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है।
*प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत*
पीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया।
बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
*11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई*
माओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।
*इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालन*
जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
*हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्य*
कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
*बदलते बस्तर की नई पहचान*
पीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सार्थक स्कूल के छात्र सत्यांशु स्पेशल ओलंपिक्स गोथिया ट्रॉफी 2026 में बिखेरेंगे जलवा
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा और समाज कल्याण विभाग ने दी बधाई, कहा- प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं
रायपुर, / धमतरी जिले के लिए यह अत्यंत गौरव और हर्ष का क्षण है। समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित विशेष विद्यालय ‘सार्थक स्कूल’ के विशेष छात्र सत्यांशु दीप का चयन स्पेशल ओलंपिक्स भारत (Special Olympics Bharat) की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में हो गया है। सत्यांशु आगामी 12 से 16 जुलाई 2026 तक स्वीडन में आयोजित होने वाली स्पेशल ओलंपिक्स गोथिया ट्रॉफी 2026 (Special Olympics Gothia Trophy 2026) अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
सत्यांशु दीप की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल धमतरी जिले, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव का विषय है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और खेल कौशल का यह उत्कृष्ट उदाहरण यह साबित करता है कि यदि उचित प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और अवसर मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का परचम लहरा सकते हैं।
उचित मार्गदर्शन और लगन से मिला मुकाम
विद्यालय परिवार के अनुसार, सत्यांशु ने यह मुकाम अपने कड़े व नियमित अभ्यास, अनुशासन, समर्पण और मैदान पर बेहतरीन खेल प्रदर्शन के दम पर हासिल किया है। उनकी यह शानदार सफलता अन्य विशेष बच्चों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए उत्साहित करेगी।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित और अनुदानित इन विशेष विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल, जीवनोपयोगी कौशल और व्यक्तित्व विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना है। सत्यांशु का यह चयन विभाग की इन कोशिशों की सार्थकता को प्रमाणित करता है।
कलेक्टर ने दीं शुभकामनाएँ- विश्व मंच पर चमकेगा धमतरी का नाम
इस बड़ी उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए धमतरी कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि यह सफलता सत्यांशु की कड़ी मेहनत, लगन और खेल के प्रति उनके अटूट समर्पण का परिणाम है। मैं सत्यांशु दीप, उनके माता-पिता, प्रशिक्षकों, विद्यालय परिवार और समाज कल्याण विभाग को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि वे स्वीडन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारत, छत्तीसगढ़ और धमतरी जिले का नाम विश्व स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।
कलेक्टर ने आगे कहा कि सत्यांशु की सफलता यह गहरा संदेश देती है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि धमतरी जिले में समावेशी शिक्षा, खेल संस्कृति और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है।
अभिभावकों और गुरुओं का मिला सतत सहयोग
इस ऐतिहासिक अवसर पर समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों एवं प्रशिक्षकों ने सत्यांशु के उज्ज्वल भविष्य और आगामी मैचों में शानदार प्रदर्शन की कामना की है। इसके साथ ही उन्होंने सत्यांशु के माता-पिता को भी विशेष रूप से बधाई दी है, जिनके निरंतर सहयोग, अटूट विश्वास और संबल ने सत्यांशु को इस अंतर्राष्ट्रीय मुकाम तक पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पूरे धमतरी जिले को विश्वास है कि स्वीडन की धरती पर सत्यांशु दीप अपने खेल कौशल से विश्व मंच पर भारत का मान और बढ़ाएंगे।
आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल बना गायत्री महिला स्व-सहायता समूह
रायपुर, /आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से जुड़कर अपने भाग्य को बदलने वाली ग्रामीण महिलाएं हैं। महिलाओं की संघर्ष यह दर्शाती है कि आत्मनिर्भरता से न केवल आर्थिक स्थिति सुधरती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और निर्णय लेने का अधिकार भी मिलता है। जहाँ महिलाएं घर से निकलकर उद्यमी बन रही हैं, आत्मनिर्भर भारत का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र स्थित ग्राम कर्रा (हि.) की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर न केवल आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त किया है, बल्कि समाज के सामने सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण भी पेश किया है। ये मिसालें साबित करती हैं कि कौशल विकास, आत्मविश्वास, और वित्तीय स्वतंत्रता जैसे मुद्रा ऋण से महिलाएं न केवल अपने परिवार को बल्कि समाज को भी मजबूत कर रही हैं।
कुशल नेतृत्व और सरकारी योजनाओं का संगम
श्रीमती गौरी यादव (अध्यक्ष) और श्रीमती पांचो श्रीवास (सचिव) के कुशल नेतृत्व में संचालित इस 12 सदस्यीय समूह को शासन की योजनाओं से संबल मिला । बिहान योजना से 6 लाख रुपये का ऋण और एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग से 4 लाख रुपये का ऋण। कुल निवेश 10 लाख रुपये की राशि से महिलाओं ने “श्री राम टेंट हाउस” के नाम से अपने उद्यम की शुरुआत की।
विस्तार और सेवाएँ- एक सफल बिजनेस मॉडल
वर्ष 2025 में रामनवमी के अवसर पर शुरू हुआ यह व्यवसाय आज एक विशाल रूप ले चुका है। वर्तमान में समूह के पास निम्नलिखित संसाधन उपलब्ध हैं। 30×30 फीट का मंच, 60×120 फीट का विशाल पंडाल, 60 टेबल, 500 कुर्सियां और 10 जम्बो कूलर है। वैवाहिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन, शोक सभा और शासकीय शिविरों (जैसे- श्सुशासन तिहारश् और जनसमस्या निवारण शिविर) में टेंट व बर्तन आपूर्ति।
लाभ के साथ सेवा भी और बर्तन बैंक का संचालन
समूह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहा है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक कार्यों हेतु बर्तन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। ग्रामीणों के लिए बर्तन बैंक का संचालन किया जा रहा है, जहाँ बेहद कम दरों पर सामग्री उपलब्ध है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के माध्यम से टेंट हाउस की सेवा गाँव.गाँव पहुँचाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा है।
10 लाख रुपये तक पहुंची वार्षिक आय
बेहतर प्रबंधन और कड़ी मेहनत का परिणाम यह है कि समूह की वार्षिक आय अब 10 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है। स्थानीय प्रशासन के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी ने इनकी आय और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि की है। समूह की महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण की इस राह को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि जिले में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक बाधाएं केवल एक पड़ाव मात्र रह जाती हैं, मंजिल नहीं। राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम 'हरदी' के रहने वाले भीमा मारकंडे की कहानी आज संघर्ष कर रहे हजारों युवाओं के लिए एक मिशाल बन गई है।
जब वक्त ने ली कठिन परीक्षा
भीमा की जिंदगी तब बदल गई जब हैदराबाद में निर्माण कार्य (मजदूरी) के दौरान वे ऊंचाई से गिर गए। कमर में आई गंभीर चोट ने उनके चलने-फिरने की शक्ति छीन ली। 80 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ 9 वर्ष और 4 वर्ष दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी उठाना पहाड़ तोड़ने जैसा था। बैसाखी ही उनका एकमात्र सहारा थी, लेकिन मंजिल अभी दूर थी।
उम्मीद की नई किरण:समाज कल्याण विभाग की पहल
भीमा ने हार मानने के बजाय स्वावलंबन का रास्ता चुना। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से 'बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल' के लिए आवेदन किया। राजनांदगांव के मोतीपुर में 4 मई 2026 को आयोजित सुशासन तिहार मे मिला यह आधुनिक उपकरण उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उनकी आजादी साबित हुआ।
मजबूरी बनी मजबूती: भीमा की कहानी, आत्मनिर्भरता की जुबानी
अब बाधाएं नहीं रोकेंगी रास्ता
विभाग द्वारा प्रदान की गई बैटरी चलित ट्राइसाइकिल और बैसाखी से भीमा के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव का रास्ता मजबूत होगा। भीमा अब रोजगार की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों तक बिना किसी मदद के जा सकेंगे। दूसरों पर निर्भरता खत्म होने से भीमा अब समाज की मुख्यधारा में एक सक्रिय नागरिक की भूमिका निभा सकेगा। अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने के लिए अब वे शारीरिक बाधाओं को पीछे छोड़ चुके हैं। भीमा शासन द्वारा दिए गए मदद की प्रशंसा करते हुए कहते है कि राज्य के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय अपने आमजनों की समस्याओं का निराकरण सुशासन तिहार के माध्यम से कर रहे है। मैं मुख्यमंत्री का दिल से धन्यवाद करता हूँ।
भीमा की कहानी के साथ-साथ जिले के अन्य दिव्यांगों के लिए भी अच्छी खबर है
समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक सुश्री वैशाली मरड़वार ने बताया कि जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग की विशेष योजना के तहत नवाचार करते हुए 40 से 79% तक के दिव्यांगता वाले व्यक्ति भी मोटराइज्ड साइकिल के पात्र होंगे। इसके लिए ऑलिम्को (ALIMCO) CSR मद से जिले के 109 पात्र दिव्यांगों को यह सुविधा प्रदान की जाएगी।
भीमा मारकंडे के हस्ताक्षर आज उनके अटूट संकल्प की गवाही देते हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और मन का दृढ़ निश्चय मिलकर किसी भी अंधेरी राह को रोशन कर सकता है। भीमा अब रुकने वाले नहीं हैं, वे उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।
10वीं सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में हासिल की प्रथम स्थान
राज्य में संचालित 11 एकलव्य विद्यालयों में परीक्षा परिणाम शत्-प्रतिशत
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और मंत्री श्री नेताम ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं
रायपुर, / छत्तीसगढ़ के कांकेर निवासी कृतिका टेकाम ने सीबीएसई 10 वीं बोर्ड की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। होनहार छात्रा कृतिका ने संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। इस बड़ी उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कृतिका को उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कांकेर की होनहार छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल कृतिका के परिश्रम और प्रतिभा का परिणाम है, बल्कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनजातीय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी।
आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कांकेर की छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के जनजातीय विद्यार्थियों की प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और अनुकूल वातावरण मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप वे राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। मंत्री श्री नेताम ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि सीबीएसई द्वारा हाल ही में शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ की छात्रा कु. कृतिका टेकाम देशभर के एकलव्य विज्ञालयों में प्रथम स्थान हासिल की है।
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि कृतिका टेकाम कांकेर जिले में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही थी। संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश के साथ-साथ आदिम जाति विभाग को भी गौरवान्वित किया है। इसके साथ ही अन्य विद्यार्थियों द्वारा भी अच्छा परीक्षा परिणाम प्राप्त किया गया है। प्रदेश में संचालित 75 एकलव्य विद्यालयों में से हाई स्कूल स्तर पर 71 एकलव्य विद्यालय संचालित हैं। इनमें 11 एकलव्य विद्यालयों द्वारा शत्-प्रतिशत परीक्षा परिणाम अर्जित किया गया।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में संचालित कुल 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी का परिणाम है कि शिक्षण सत्र 2025-26 में चौथी एकलव्य विद्यालयों की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के दल द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया गया।
आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर ने बताया कि इसी प्रकार भारत सरकार, पंचायती राज, मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित मॉडल यूथ ग्राम सभा प्रतियोगिता में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, कोसमबुड़ा जिला-गरियाबंद को देश में संचालित 800 विद्यालयों में से राष्ट्रीय विजेता चुना गया। गरियाबंद के चयनित इन विद्यार्थियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया, साथ ही इस विद्यालय को एक करोड़ रूपए की उपहार राशि प्रदान की गई है।
रायपुर, /नक्सलमुक्त आबूझमाड़ क्षेत्र में अब बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कार्य तेजी से किये जा रहे हैं । अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, ओवरहेड टैंक, लघु सिंचाई योजना सहित अन्य कार्यो ने जोर पकड़ लिया है । पिछले दिनों नक्सलमुक्त आबूझमाड़ में सीटीई की टीम ने विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया ।
टीम ने नारायणपुर के हरिमार्कटोला, सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने देखा कि निर्मित सड़कों मोटाई और चौड़ाई को सही मानक स्तर की है, इसी तरह ग्राम दूरस्थ ओरछा ब्लाक में निर्मित शेड की निरीक्षण किया गया । जिले के ग्राम पालकी में निर्मित ओवरहेड टैंक की टीम ने निरीक्षण किया। इसी तरह से जल संसाधन विभाग के अंतर्गत बैनूर रिजर्वायर के नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया गया। टीम ने निर्माण कार्यों में लगे अधिकारियों से निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी ली एवं अधिकारियों को जरूरी मार्गदर्शन भी दिया।
नक्सलमुक्त बस्तर में अब विभिन्न निर्माण कार्यों के निरीक्षण करने जांच एजेन्सीयों के दल आसानी से पहुंच रहे हैं। तकनीकी टीमों द्वारा निर्माण कार्यों को कराने स्थानीय अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे अब सुदूर अबूझमाड़ में निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण तेजी से किए जाने लगे हैं।
संवेदनशील नेतृत्व का प्रभाव: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर वृद्ध हितग्राही को मिली तत्काल राहत
मीडिया में खबर आते ही मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, प्रशासन हरकत में आया
तीन माह की लंबित पेंशन, राशन और योजनाओं का लाभ तत्काल सुनिश्चित
पेंशन और राशन मिल गया, अब मिली राहत… मुख्यमंत्री जी का आभारी हूँ – भीखलु राम ध्रुव
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील, सजग और जनकेंद्रित नेतृत्व का एक और सशक्त उदाहरण सामने आया है, जहाँ एक वृद्ध हितग्राही की समस्या पर त्वरित संज्ञान लेते हुए शासन ने तुरंत राहत सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश पर गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड के ग्राम पथर्री निवासी श्री भीखलु राम ध्रुव को जिला प्रशासन की सक्रियता से बड़ी राहत मिली है।
मीडिया के माध्यम से प्रसारित एक खबर में यह जानकारी सामने आई थी कि श्री भीखलु राम ध्रुव लंबे समय से पेंशन और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बिना विलंब किए तत्काल संज्ञान लिया और जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि संबंधित हितग्राही को शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर श्री बीएस उइके ने स्वयं मामले की जानकारी ली और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि श्री भीखलु राम ध्रुव का ई-केवाईसी किसी कारणवश लंबित था, जिसके कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। प्रशासन द्वारा तत्काल ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई, जिससे उन्हें पुनः शासकीय योजनाओं का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है। प्रशासन की तत्परता का परिणाम यह रहा कि श्री भीखलु राम ध्रुव को तीन माह की लंबित वृद्धावस्था पेंशन एकमुश्त प्रदान की गई।
वहीं खाद्य विभाग द्वारा भी संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके घर पहुंचकर 01 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया गया है। अब उन्हें नियमित रूप से उचित मूल्य की दुकान से राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के इस मानवीय और तत्पर हस्तक्षेप से राहत प्राप्त करने पर श्री भीखलु राम ध्रुव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पेंशन और राशन मिल जाने से मेरे जीवन में बड़ी राहत आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह संवेदनशीलता मेरे लिए बहुत मायने रखती है। अब मुझे भरोसा है कि सरकार हमारी चिंता करती है।
उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रत्येक जरूरतमंद तक उनका लाभ समय पर पहुंचे, इसके लिए निरंतर सजग और प्रतिबद्ध है।
रायपुर / प्रदेश के किसान शासन की योजनाओं का लाभ लेकर और आधुनिक खेती किसानी की तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदानी में इजाफा कर रहे हैं। ऐसे ही महासमुन्द जिले के अंतर्गत ग्राम बम्बुरडीह के किसान श्री दुबेलाल कोसरे ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। श्री कोसरे, बताते हैं कि पूर्व में वे पारंपरिक रूप से धान एवं अन्य फसलों की खेती करते थे। इस पारंपरिक खेती में लागत अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद उन्हें सीमित लाभ ही प्राप्त हो पाता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था।
वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्हें यह जानकारी प्राप्त हुई कि उद्यानिकी फसलों के माध्यम से कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन एवं अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। इस जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन घटक का लाभ लिया। श्री कोसरे बताते है कि योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपए का अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने अपने 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्राफ्टेड टमाटर की खेती प्रारंभ की।
कृषक श्री दुबेलाल कोसरे द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली ग्राफ्टेड पौध, सिंचाई हेतु ड्रिप प्रणाली तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया गया। वे बताते हैं कि उन्नत तकनीकों के समुचित उपयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 16 से 18 टन तक उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में टमाटर का औसत विक्रय मूल्य लगभग 20 रुपए प्रति किलोग्राम मिलने से उन्हें कुल लगभग 3 लाख 9 हजार रुपए का लाभ प्राप्त हुआ। यह लाभ धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। श्री कोसरे द्वारा अन्य किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने तथा बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। उनके मार्गदर्शन से ग्राम बम्बुरडीह के अन्य कृषक भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और आधुनिक खेती को अपनाने लगे हैं।
रायपुर // नारायणपुर जिले के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा अब फिर से मुस्कुरा रही है। कुछ समय पहले तक यह नन्हीं बच्ची जल्दी थक जाती थी, सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी और परिवार उसकी सेहत को लेकर लगातार चिंतित रहता था। गांव के सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को यह भी पता नहीं था कि उनकी बच्ची के हृदय में गंभीर समस्या है। लेकिन जिले में शुरू किए गए “प्रोजेक्ट धड़कन” ने न केवल बीमारी की समय पर पहचान की, बल्कि पारूल को नया जीवन भी दे दिया।
नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से फरवरी 2026 में “प्रोजेक्ट धड़कन” की शुरुआत की गई थी। इस विशेष अभियान का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती अवस्था में पहचान करना है, ताकि समय रहते उनका उपचार कराया जा सके। खास बात यह है कि यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची, जहां पहले विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद सीमित थी।
अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग की। प्रथम चरण में 3000 से अधिक बच्चों की जांच की गई। इस दौरान तीन बच्चों में हृदय रोग के संभावित लक्षण पाए गए। इनमें ब्रेहबेड़ा की पारूल दुग्गा भी शामिल थी।
जब पारूल के परिवार को बच्ची की बीमारी की जानकारी मिली तो चिंता बढ़ गई, लेकिन पहली बार उम्मीद भी जगी। प्रशासन ने तुरंत बेहतर इलाज की व्यवस्था की। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
रायपुर पहुंचने पर श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पारूल की विस्तृत जांच की। जांच में उसके हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि हुई, जिसके लिए ऑपरेशन आवश्यक बताया गया। परिवार के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय था, लेकिन जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों के समन्वय से उपचार की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित की गई।
10 अप्रैल 2026 को श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, रायपुर में पारूल की सफल हृदय सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उसकी लगातार देखभाल की गई।
आज पारूल अपने घर लौट चुकी है। वह खेल रही है, मुस्कुरा रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है। वही अब परिवार के चेहरे पर सबसे बड़ी मुस्कान बन गई है।
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि “प्रोजेक्ट धड़कन” का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न झेलनी पड़े, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम, चिकित्सकों, मैदानी कर्मचारियों और अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जिले में बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर संभावित मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जहां जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है, जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
“प्रोजेक्ट धड़कन” अब नारायणपुर में एक योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है, जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है।
इसी योजना से सूरजपुर जिला के प्रतापपुर जनपद पंचायत अंतर्गत जजावल ग्राम पंचायत निवासी अकालू पिता भुवाली के जीवन में नई सुबह आई है। कभी भटके रास्ते पर चल पड़े और बाद में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे अकालू को शासन की विशेष परियोजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से पक्का मकान मिला है।
पहले अकालू और उनका परिवार जर्जर एवं असुरक्षित कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। हर मौसम में डर और असुरक्षा का वातावरण बना रहता था। योजना के अंतर्गत मिली आर्थिक सहायता से अब उनका पक्का घर बन चुका है, जिससे उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है।
अकालू का कहना है कि शासन की इस पहल ने उन्हें समाज में नई पहचान और आत्मविश्वास दिया है। आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की दिशा में मिला यह सहयोग उनके लिए किसी नई शुरुआत से कम नहीं है।
यह कहानी केवल एक व्यक्ति के जीवन परिवर्तन की मिसाल नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सही मार्ग चुनने वालों के साथ शासन हर कदम पर खड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जरूरतमंद परिवारों को केवल मकान ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की नई उम्मीद भी प्रदान कर रही है।
अकालू का पक्का घर आज इस बात का प्रतीक है कि विकास और पुनर्वास की योजनाएँ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं।
गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की ग्रामीण ने पहल
रायपुर, 18 फरवरी 2026/ ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अनिवार्य हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण, और जल शक्ति अभियान जैसी पहल भू-जल स्तर में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं। शक्तिगत कूप के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।
ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक सशक्त और प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है। यहां शक्तिगत कूप निर्माण कार्य जयबहादुर सिंह के लिए स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को सुदृढ़ बनाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।
कूप निर्माण से पूर्व संबंधित हितग्राही सहित आसपास के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे खेती करना अनिश्चित बना रहता था और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन शक्तिगत कूप के निर्माण के बाद खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हुई। इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है, वहीं किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और खेती अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित बन गई है। यह कूप केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। साथ ही भूजल स्तर के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिला है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं। 1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। यह शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ग्राम पंचायत चिड़ौला में जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम होने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सफल, प्रेरक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है
घर में आया जल-जीवन, चौघड़ा गांव में जल क्रांति की कहानी
रायपुर / जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करना है, ताकि सभी घरों, स्कूलों और आंगनवाडी केन्द्रों तक नल से पानी पहुंच सके।इसी परिप्रक्ष्य में ग्रामीण जीवन में बदलाव की एक प्रेरक और सशक्त कहानी ग्राम पंचायत चौघड़ा के लोहारपारा से सामने आई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ की निवासी दीपा के लिए स्वच्छ पेयजल कभी एक सपना हुआ करता था, जिसे पूरा करने के लिए रोज़ाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। घर से दूर स्थित कुएँ से पानी लाने में उनका काफी समय और मेहनत खर्च हो जाता था, जिससे दैनिक जीवन के अन्य कार्य प्रभावित होते थे।
हर घर नल से जल योजना के लागू होने के बाद दीपा और उनके परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है। अब उनके घर पर ही शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध है। पानी के लिए भटकने की मजबूरी खत्म हो गई है और समय की बचत होने से दीपा अब परिवार, बच्चों और अन्य घरेलू कार्यों पर बेहतर ध्यान दे पा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव स्वास्थ्य के क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां स्वच्छ पानी के कारण परिवार की सेहत में स्पष्ट सुधार हुआ है। दीपा बताती हैं कि नल से जल मिलने के बाद जीवन में सुविधा, सम्मान और सुरक्षा का एहसास बढ़ा है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना केवल पानी नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की गारंटी लेकर आई है। उनके शब्दों में यह पहल हमारे जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के भविष्य को बदल रही है।
जल जीवन मिशन की यह पहल आज ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुधार का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। चौघड़ा गांव की दीपा की कहानी यह साबित करती है कि जब योजनाएं ज़मीन पर उतरती हैं, तो वे सिर्फ नल से पानी नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में खुशहाली और आत्मसम्मान भी पहुंचाती हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
