मेलबॉक्स / शौर्यपथ / दुनिया भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। पूरी प्रबलता के साथ इससे बचने के उपाय भी ढूंढ़े जा रहे हैं, मगर अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने भी ठोस कदम उठाए हैं। यहां लॉकडाउन का विकल्प भी अपनाया गया। इस दौरान बेशक कई परेशानियां आईं, जैसे- विकास दर का गिरना, शैक्षणिक कार्यों में स्थिरता, मजदूरों और गरीब वर्गों पर भुखमरी की मार, मगर हम सब कहीं न कहीं सुरक्षित जरूर थे। हालांकि, जैसे-जैसे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई, लोगों ने समझा कि शायद वे अब कोरोना से बच गए हैं। जिस वक्त हमें सर्वाधिक सचेत रहने की जरूरत है, हम उसी समय लापरवाही कर रहे हैं। इस कारण से हमारे देश में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हमें यह समझना होगा कि सरकार तभी तक सहायक है, जब हम खुद सावधान हैं। चूंकि यह जंग लंबी चलेगी, इसलिए सबको मिलकर सावधानी से धैर्यपूर्वक इसका सामना करना होगा।
निशा कश्यप, औरंगाबाद, बिहार
यादों में नागार्जुन
पिछले दिनों ज्येष्ठ पूर्णिमा को हमने बाबा नागार्जुन का जन्मदिन मनाया। बाबा का जन्म दरभंगा के तरौनी गांव में हुआ था और अपनी अनोखी लेखनी से उन्होंने देश-दुनिया में नाम कमाया। वह घुमक्कड़ी के शौकीन और फक्कड़ स्वभाव के थे। देखा जाए, तो मनुष्य अनुभवों से ही सीखता है और सीखने की इस प्रक्रिया में यात्राएं अलग मुकाम रखती हैं। यही वजह है कि नागार्जुन की लेखनी में आम लोग थे, उनका दर्द था और उनकी उम्मीदें थीं। उन्होंने खुद एक बार कहा था कि जिसने जनजीवन को नजदीक से नहीं देखा, वह भला अच्छी रचनाएं कैसे कर सकता है? बहरहाल, जिस तरह की उनकी लेखनी सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के खिलाफ रही, उसकी आज भी हमें जरूरत है। ऐसे कवि कभी नहीं मरते।
गौरव सक्सेना, करमगंज, इटावा
अच्छा फैसला
भारत सरकार ने चीन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके 59 एप प्रतिबंधित कर दिए। भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए यह एक सराहनीय कदम है। करोड़ों भारतीय इन एप से जुड़े थे, और उनके डाटा के गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ रही थी। टिक टॉक पर तो बच्चे और युवा वीडियो बनाने के इतने आदी हो गए थे कि ज्यादातर किशोरों का वक्त हमेशा मोबाइल पर ही बीतने लगा था। अब चूंकि चीन के प्रति लोगों की भावनाएं बदली हैं, इसलिए सरकार ने भी सुखद फैसला लिया है। ऐसा करके सरकार ने देश की जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत किया है। स्वदेश प्रेम की भावना को दृढ़ करके हमें पूरी सकारात्मकता के साथ अपनी सरकार का साथ देना चाहिए।
हरीश कुमार शर्मा, दिल्ली
विकल्प तलाशना जरूरी
हमारी सरकार द्वारा चीनी एप को प्रतिबंधित किए जाने से कुछ तो प्रभाव पडे़गा ही। आखिर हमारे बाजार का उपयोग करके चीन हमारे विरुद्ध ही अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा था। कम कीमत और अधिक उत्पादन के कारण चीन की कंपनियां पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाती जा रही हैं। यह एक ऐसी आर्थिक शक्ति है, जिसका हाथ दूसरे देश भी नहीं छोड़ना चाहते। यही कारण है कि भारत के पड़ोसी देश भी चीन के पाले में जाते हुए दिख रहे हैं। पाकिस्तान के बाद अब नेपाल भी कहीं न कहीं भारत के खिलाफ जाने की सोचने लगा है। साफ है, हमें अब हर सीमा पर सावधान रहना होगा। ऐसे में, किसी भी वस्तु का बहिष्कार करने से पहले हमें उसका विकल्प तलाशना होगा। उसके अपने देश में उत्पादन पर ध्यान देना होगा। ऐसा करने पर ही बहिष्कार प्रभावी हो सकेगा। अन्यथा एक बहिष्कार से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मोहम्मद आसिफ
जामिया नगर, दिल्ली