धर्म संसार /शौर्यपर्थ / आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के दिन माता पार्वती को समर्पित जया-पार्वती व्रत किया जाता है। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किए जाने वाले इस व्रत के प्रभाव से अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है। अविवाहित लड़कियों द्वारा इस व्रत के रहने से शीघ्र ही विवाह होता है और भरा पूरा परिवार मिलता है। सुखमय जीवन के लिए विवाहित स्त्रियों को यह व्रत अवश्य रखना चाहिए। इस पावन व्रत का पुण्य वट सावित्री व्रत के समान माना जाता है। इस व्रत को विजया पार्वती व्रत भी कहा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का रहस्य भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को बताया था। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना करें। मां पार्वती का ध्यान कर सुख-सौभाग्य और गृह शांति के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें। घर के मंदिर में भगवान शिव-माता पार्वती की मूर्ति स्थापित करें। इस व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना जाता है। व्रत में गेहूं का आटा, सब्जियां भी नहीं खानी चाहिए। व्रत के दौरान फलाहार कर सकते हैं। इस व्रत के प्रभाव से संतान की प्राप्ति होती है। श्रद्धापूर्वक जया पार्वती व्रत का विधि-विधान से पालन करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। व्रत समाप्ति के एक रात पहले रात्रि जागरण करना चाहिए। इसे जयापार्वती जागरण कहते हैं।