अन्य खबर /शौर्यपथ/
जब कुछ चीज़ें हमारे मन या सहूलियत के मुताबिक़ नहीं चलती हैं, तो उन्हें अपनाना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है। उन्हें अनदेखा करने के लिए कई बार बहानों का सहारा लेते हैं। इन बहानों से थोड़े समय के लिए राहत ज़रूर मिलती है, लेकिन ये आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं। इसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय पूरा करना सीखें।
पर बहाने बनाते क्यों हैं?
सहूलियत से ही सारे कारण जुड़े हुए हैं, जैसे कि वो काम जो कभी किया नहीं उसे पूरा करने का डर। मन की शंका कि अगर काम पूरा नहीं कर सके, तो छवि प्रभावित होगी। जीवन में अगर कोई उद्देश्य ना हो, दूसरों के काम से ख़ुद की तुलना करने की आदत के चलते हीनता का भाव और आत्मविश्वास की कमी तथा सीखने और आगे बढ़ने की लगन का अभाव भी कारण हो सकते हैं।
ऐसे दूर कर सकते हैं बहाने...
दूसरों से तुलना ना करें
दूसरों से अपनी तुलना ना करें। इससे आपका ध्यान अपनी ताक़त नहीं कमज़ोरियों पर केंद्रित होगा। जिनसे तुलना कर रहे हैं, वे भी कभी उस पड़ाव पर थे, जहां इस वक़्त आप हैं। उनकी ताक़त से तुलना करने के बजाय उनकी मेहनत पर ध्यान केंद्रित करें और सीखें।
ग़लतियों से सीखें
अगर ग़लती करने से डरते हैं तो यह भी जान लें कि जिस तरह सफलता-असफलता महज़ नतीजों का नाम है, वैसे ही काम करने की प्रक्रिया में ग़लती प्रयास करने का ही दूसरा रूप है। अगर आपने कोई ग़लती की है, तो उस काम को छोड़ने के बजाय उससे सीखें।
प्लान ‘बी’ भी रखें
हमेशा दो विकल्प साथ लेकर चलें। मान लीजिए कि आपको किसी विषय पर योजना बनाने की ज़िम्मेदारी दी गई है। ऐसे में एक योजना बनाने के बजाय हमेशा दो-तीन योजनाएं तैयार रखें। अगर एक योजना रद्द होती है, तो आपके पास अतिरिक्त योजनाएं हैं। अगर पहले से तैयारी रहेगी, तो आत्मविश्वास बना रहेगा।
काम से मुंह ना मोड़ें
‘ये मुझ से नहीं होगा या मुझ से होता ही नहीं’, ये बहाने यथास्थिति बनाए रखेंगे, जो आपको कुछ नया पाने से रोकेंगे। अगर कोई ज़िम्मेदारी मिलती है, तो उसे आज़माए बिना इंकार ना करें। अपने ज्ञान और क्षमता अनुसार काम पूरा करने की कोशिश करें।