/शौर्यपथ /
हम सब प्रकृति की देन हैं। जरूरी है कि हमारा कनेक्शन उससे बना रहे। अगर आप प्रकृति से जुड़े रहेंगे तो आपके अंदर का बच्चा निखर कर बाहर आएगा। कोशिश करें कि आपके बच्चे शुरू से नेचर से जुड़े रहें। जब तक आपके बच्चे नेचर से नहीं जुड़ेंगे, उनके दिमाग के दरवाजे खुल ही नहीं सकते। हर पैरेंट्स को मैं यह कहना चाहूंगा कि वो बच्चों के साथ मैदान में, घर के आंगन में कोई खेल जरूर खेलें। खेल नहीं सकते तो कम से कम बच्चों को वॉक पर ले जाएं। इससे बेहतरीन तोहफा किसी बच्चे के लिए हो ही नहीं सकता।
मेरे पिताजी जब चेन्नई से हैदराबाद आए तो यह जगह एक बड़ा गांव थी। 1963 में यह कस्बा भी नहीं था। टैंगबंद तालाब के पास उन्होंने करीब आठ एकड़ जंगल नुमा जमीन खरीदी। प्रकृति से इतनी नजदीकी थी कि मुझे इससे प्यार हो गया, जो अभी भी मैं बढ़ता महसूस करता हूं। उस जमीन पर हमारे पास गायों का बाड़ा था, हम अपने चावल, सब्जियां खुद उगाते थे, हमारा पोल्ट्री फार्म था। हम जो भी खा रहे थे वो सब हमारा पैदा किया हुआ था। यहां मुझे पेड़ों से प्यार हुआ। मैं छुट्टियां मनाने वहीं जाता हूं जहां मुझे पेड़ खूब दिखते हैं। मेरी मां से भी मुझे यही सीखने को मिला। उनका रोज गार्डन देखने लायक है। जब भी कोई रोज कॉम्पिटिशन होती है तो उनकी तरफ से भी एंट्रीज वहां होती हैं।
मैं चाहता हूं कि आज हर घर में तीन बातों का बेहद ख्याल रखा जाना चाहिए। पहली बात... घर में प्लास्टिक का उपयोग कम से कम हो। जब भी बाजार जाएं, कपड़े की थैली लेकर जाएं। दूसरी जरूरी बात... पानी। पानी जरा जाया नहीं होना चाहिए। वॉटर वॉर्स आने वाले वक्त की सच्चाई है क्योंकि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं। पैसे वाले पानी खरीद लेंगे, गरीब कहां से लाएंगे इसलिए पानी बचाइए। तीसरी बात... पौधे लगाइए, उन्हें पेड़ बनाइए। जहां जगह मिले, पौधा रोप दीजिए।
बातें बहुत होती हैं, यह कुछ करने का वक्त है। छोटी-छोटी कोशिश से असर होता है। आप किस कपड़े से बनी ड्रेस पहनते हैं, क्या खाते हैं, नेचर को कैसे सहेजते हैं, हर छोटी बात का अर्थ है। कोरोना के बाद तो हर कोई सस्टेनेबल लिविंग पर जोर दे रहा है। पर्यावरण हमें ही बचाना है। यह एक भव्य प्रक्रिया है। बटरफ्लाय इफेक्ट को याद रखिए। हम कुछ भी करते हैं तो उसका असर भव्य होता है.. दूर तलक होता है। तो कभी भी कोई कोशिश करें उसे छोटा या जाया ना समझें। छोटी-छोटी कोशिशें ही रंग लाती हैं, यह अहसास आपको जरूर होगा.. आज नहीं तो कुछ साल बाद होगा। पर होगा जरूर।
(2020 में शिल्पा रेड्डी से बातचीत में नागार्जुन अक्किनेनी)
मायने रखता है नागार्जुन का जंगल अपनाना
- क्योंकि जब वे अपना घर बनवा रहे थे तो पीछे खाली पड़ी बंजर जमीन पर 2500 पौधे लगवाए। आज वहां 10000 पेड़ों का जंगल है।अप्रवासी पक्षी भी वहां आते हैं।
- क्योंकि गलत तरीके से 25 फीट के पाम ट्री को निकालते देख उन्होंने काम रुकवाया। एक्सपर्ट भेजकर हटवाया। आज वह 65 फीट का है और उनके बंगले में है।