सम्पादकीय / शौर्यपथ / कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकारों द्वारा सख्ती में बढ़ोतरी न केवल जरूरी, बल्कि स्वागतयोग्य भी है। झारखंड में कोरोना नियमों की अनदेखी करने वालों और मास्क न पहनने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है और दो साल की जेल हो सकती है। झारखंड की कैबिनेट ने बुधवार को संक्रामक रोग अध्यादेश 2020 पारित किया है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ऐसी कड़ाई करने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है। कागज पर ही सही, यह नियम प्रथम दृष्टया काफी कड़ा दिखता है, लेकिन जिस तरह से झारखंड में संक्रमण बढ़ रहा है, उसे रोकने के लिए ऐसे कदमों का व्यापक सांकेतिक महत्व है। अलबत्ता, इसे लागू करना सहज नहीं होगा। इसकी सही अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले सरकारी महकमे और पुलिस-प्रशासन के तमाम लोगों को समाज के सामने आदर्श पेश करना होगा। उससे भी ज्यादा जरूरी है कि हमारे नेता स्वयं बचाव और मास्क पहनने की दिशा में आदर्श बनकर उभरें। लोगों को लगे कि उनके सभी बडे़ नेता और बडे़ अधिकारी स्वयं मास्क पहनने लगे हैं, तो लोग भी प्रेरित होंगे। अभी आए दिन हम देखते हैं कि किस तरह से मास्क पहनने की अनिवार्यता का मखौल बनाया जाता है। कोई दिखावे के लिए टांग लेता है, तो कोई अपनी नाक नहीं ढकता, तो कोई मास्क अपने गले में लटका लेता है। मास्क से जिस तरह खिलवाड़ हो रहा है, उसमें सरकारें अगर कड़ाई के लिए मजबूर होती जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं। गरीबों की दृष्टि से देखें, तो जुर्माना राशि जरूर ज्यादा है और यह भी संभव है कि इस अध्यादेश या कानून का दुरुपयोग भी होगा। अत: ऐसे कानून बनाते हुए हमारी सरकारों को पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। केवल काननू बना देना पर्याप्त नहीं है, उसकी पालना ही सब कुछ है।
झारखंड में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खबरें आ रही हैं कि सरकारी अस्पतालों में जगह कम पड़ने लगी है। ऐसे में, सरकार लोगों पर ही नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों व बैंक्वेट हॉल आदि पर भी दबाव बनाए हुए है। इन्हें आइसोलेशन वार्ड के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। आने वाले दिनों में झारखंड और संक्रमण बहुल अन्य राज्यों में ऐसे कडे़ कदम सामान्य बात हो जाएंगे। लॉकडाउन खुलने के बाद ज्यादातर राज्यों में संक्रमण बढ़ा है, विशेष रूप से गरीब या अभावग्रस्त राज्यों में स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
आम दिनों में ही जो चिकित्सा सेवा दबाव महसूस करती है, कोरोना के समय में उसका क्या हाल होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कड़ाई केवल आम लोगों पर न हो, जो सेवा में लगा हुआ तंत्र है, उसे भी पूरी मुस्तैदी से काम करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना होगा कि आम लोगों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। सुशासन की कड़ाई के साथ ही स्वशासन की भी जरूरत बढ़ गई है। लोग यदि अनुशासित हो जाएं, तो फिर कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई आसान हो जाएगी। विश्वास बनाए रखना होगा। कोरोना से जंग हम जरूर जीतेंगे। ध्यान रहे, लगभग आठ लाख लोग ठीक हो चुके हैं और अभी देश में सक्रिय मरीजों की संख्या चार लाख भी नहीं है। एक दिन आएगा, जब चंद मरीज रह जाएंगे, लेकिन तब तक हमें सावधानी बरतनी पड़ेगी और सुरक्षित रहना होगा।