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बगैर लक्षण वाले मरीजों से निकल सकता है कोरोना के खात्मे का हल,शोध में दावा

  • rounak group

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / एक शोध की मानें तो बगैर लक्षण वाले मरीजों की भूमिका कोरोना पर नियंत्रण पाने में मददगार हो सकती है। ऐसे मरीजों की उच्च दर समाज के लिए अच्छी बात है। दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित ऐसे मरीज बड़ी संख्या में हैं, जिनमें इस बीमारी के कोई भी लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं।

हॉपकिंस विश्वविद्यालय के अनुसार, पिछले सात महीनों में कोविड-19 जैसी महामारी ने विश्व स्तर पर दो करोड़ से अधिक लोगों को संक्रमित किया है, जबकि सात लाख से अधिक लोगों की इस वासरस से मौत हो चुकी है। सैन फ्रांसिस्को में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ मोनिका गांधी द्वारा हाल ही में एक शोध किया गया।

उन्होंने अपने इस अध्ययन में यह खुलासा किया कि एसिम्प्टोमैटिक यानी बगैर लक्षण वाले मरीज कोविड-19 के खात्मे में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के बगैर लक्षण वाले मरीजों की उच्च दर अच्छी बात है। यह निजी तौर पर और समाज के लिए एक अच्छा संकेत है।

जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन में इस महीने प्रकाशित एक लेख में मोनिका गांधी ने बताया कि महामारी की शुरुआत में जब लोगों ने मास्क पहनना शुरू नहीं किया था, तब 15 फीसदी लोग एसिम्प्टोमैटिक(बगैर लक्षण वाले) थे, लेकिन बाद में जब लोगों ने मास्क पहनना शुरू किया तो आंकड़ा बढ़ गया। इसके 40 से 45 फीसदी लोग बगैर लक्षण वाले हो गए।

कोरोना पर जारी रिसर्च के बीच यह भी सामने आया है कि इसका असर बच्चों पर कम है। ज्यादातर मरीजों में या तो कोई लक्षण नहीं है या फिर सामान्य लक्षण हैं। अमेरिका की शोधकर्ता मोनिका के मुताबिक दुनिया में अब 40 फीसदी कोरोना मरीज बगैर लक्षण वाले हैं, जिन्हें उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा सकता है।

फिलहाल यह भी पता लगाया जा रहा है कि उम्र और शरीर के जीन भी क्या यह तय करते हैं कि वायरस कितना हमला करेगा। यह भी देखा जा रहा है कि क्या मास्क लगाने की वजह से ही लोगों में मामूली या बिना लक्षण वाला कोरोना हो रहा है।

 

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