नजरिया /शौर्यपथ / कई मौके आते हैं, जब देश हमें प्रेरित करता है। वर्ष 1992 के ओलंपिक के समय मैं छोटा था, वहां भारतीय खिलाड़ियों की टीम को देश का प्रतिनिधित्व करते हुए देखना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायी था। तब लिंबा राम ने कैसे निशाना साधा था, उत्सव-तमाशे का कैसा माहौल था! खिलाड़ी कैसे अपने बेहतरीन प्रदर्शन के अभियान में लगे थे। तब मुझे ओलंपिक में हॉकी महाशक्ति के रूप में हमारी विरासत के बारे में भी पता था, और यह कुछ ऐसा था, जिसने मुझे अपनी खेल यात्रा और भारत को गौरव दिलाने के लिए प्रेरित किया।
मुझे याद है, जब 11 अगस्त, 2008 को बीजिंग ओलंपिक में मैंने स्वर्ण पदक जीता, तब मुझे नहीं लगा था कि मैंने जीत लिया है। जीतने के बाद भी मेरा ध्यान जीत की प्रक्रिया पर लगा था। कैसे सर्वश्रेष्ठ करना है, यही बात मेरे दिमाग में चल रही थी। हालांकि जैसे-जैसे चीझें साफ हुईं, मुझे स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ। जीवन के एक लक्ष्य तक पहुंचने की खुशी महसूस हुई। इस बात ने मेरे मन को छू लिया कि मेरे एक काम ने पूरे देश को कैसे प्रभावित किया है।
पिछले वर्षों में खेलों में बढ़ती भागीदारी बहुत प्रोत्साहित करती है। एथलीटों का समर्थन करने के लिए आगे आने वाले अधिक से अधिक लोगों को देखना बहुत अच्छा लगता है। उदाहरण के लिए, एक औसत जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी भागीदारी बढ़ गई है, जब मैं इस स्तर पर प्रतिस्पद्र्धा करता था, तब इतने लोग नहीं आते थे। आज हर खेल में किसी न किसी रोल मॉडल का उदय खिलाड़ियों को पेशेवर खेल की राह दिखाता है, इसे पोषित-प्रोत्साहित करने की जरूरत है। अगले दशक में मैं निश्चित ही अधिक एथलीटों को विश्व विजेता बनते देख सकता हूं, और उम्मीद है, मैं लंबे समय तक भारत का एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता नहीं रहूंगा।
आज खेलों में निवेश की जरूरत है। देश में प्रचुर प्रतिभा है। सही खेल ढांचा हो और खिलाड़ी विकास में दूरदर्शिता हो, तो प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। कई मायने में यह हो भी रहा है। मैंने सरकार में खेलों के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता देखी है। यही वजह है, मैं इस देश में खेलों के विकास को बहुत आशावादी रूप से देखता हूं। खेल विकास के लिए सरकार भी करे और कॉरपोरेट सेक्टर जितना ज्यादा शामिल हो, उतना बेहतर होगा।
कोरोना न होता, तो इस समय ओलंपिक का माहौल होता। यह उन खिलाड़ियों के लिए निराशा की बात है, जिन्होंने टोक्यो खेलों को ध्यान में रखते हुए वर्षों से तैयारी की है। हालांकि, इससे कई युवा एथलीटों को तैयार होने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। कोरोना ने हमें एक कदम पीछे लेने और आगे के कदमों की योजना बनाने का समय दिया है। यह अंतत: इस पर निर्भर करता है कि आप स्थिति को कैसे देखते हैं और इससे भी महत्वपूर्ण कि आप इसका अधिकतम उपयोग कैसे करते हैं। बेशक, जो अवसर का लाभ उठाएगा, वह जरूर जीतेगा।
आज जो दौर है, उसका हममें से कई लोगों पर प्रभाव पड़ा है और इस पर काबू पाने के लिए सेहतमंद और सुरक्षित रहना हमारे लिए अहम है। जितना संभव हो, घर पर रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने, जैसे मास्क पहनने और हाथ धोने से भी एक बड़ा फर्क आएगा। आप एक दिनचर्या रखें और बिना अपवाद पालन करें। जो छोटे व्यायाम घर पर किए जा सकते हैं, जितना संभव हो, करें। साथ ही, अच्छे भोजन से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक सेहत में भी मदद मिलेगी।
हमें अपनी मजबूती के साथ देश की मजबूती के बारे में भी जरूर सोचना है। इस देश को कैसे आकार दिया जाएगा, यह बात भारत के युवाओं के परस्पर सामंजस्य और सामूहिक विकास में योगदान के लिए सक्षम होने पर निर्भर है। हमें अपने देश के युवाओं का साथ देना होगा। युवा जो कुछ कर सकते हैं, उन्हें उसी दिशा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना होगा। ऐसा करते हुए हम भारतीयों की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं, जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
एक उद्यमी, खिलाड़ी या किसी अन्य पेशे में सफलता के लिए आप जिस भी क्षेत्र को चुनें, अपने इरादे को बुलंद रखें। सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें। दुनिया का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, आपका भी बदलेगा, अगर आप पूरी लगन से अपनी मंजिल पर पूरा ध्यान लगाएंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) अभिनव बिंद्रा, ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता