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कमला हैरिस से अभी बहुत उम्मीद मत बांधिए

  • rounak group

नजरिया / शौर्यपथ / डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस आंशिक तौर पर भारतीय मूल की हैं, पूरी तरह से नहीं। फिर भारतीयों को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि वह अमेरिका में चुनाव लड़ रही हैं, भारत में नहीं। यह एक बड़ा अंतर है, और यह बात हमें अपने मन में बैठा लेनी चाहिए कि जब चुनावी आरोपों-प्रत्यारोपों के दौर शुरू होंगे, तब यही कहा जाएगा कि वह अपनी भारतीयता को बहुत ज्यादा स्वीकार नहीं करती हैं। यह बात मैं बखूबी जानता हूं, क्योंकि मैंने एक बार लिखा भी था कि हैरिस को अपनी भारतीय विरासत को कहीं ज्यादा अपनाने की जरूरत है। मैं तो अब भी अपनी विरासत जी रहा हूं। पर मैं वह उम्मीदवार नहीं, जो अब उप-राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी मैदान में है।
हैरिस एक अश्वेत महिला के तौर पर चुनाव लड़ेंगी। यही वह मूल वजह है, जिसके लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बिडेन ने उनका चयन किया है। अमेरिकी सीनेटर, अमेरिका के सबसे बडे़ राज्य की पूर्व अटॉर्नी-जनरल, अपेक्षाकृत अधिक नौजवान उम्मीदवार (जो बिडेन की उम्र 77 वर्ष है, जबकि कमला हैरिस 55 वर्ष की हैं) और उप-राष्ट्रपति पद की दावेदारी के लिए आक्रामक व्यवहार का प्रदर्शन जैसी उनकी अन्य तमाम मौलिक योग्यताओं को इसके बाद तरजीह दी गई है। अमेरिका के एक पूर्व वरिष्ठ डेमोक्रेट सीनेटर हैरी रीड ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा भी है, ‘मैं समझता हूं, वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि उन्हें इस पद के लिए एक अश्वेत महिला को चुनना चाहिए। अश्वेत हमारे सबसे वफादार मतदाता हैं और मुझे लगता है, अमेरिका की अश्वेत महिलाएं इसकी हकदार हैं कि उप-राष्ट्रपति पद के लिए उनमें से उम्मीदवार चुना जाए’। साफ है, कमला हैरिस का चयन एक चुनावी मजबूरी है। इसीलिए, उनसे और अधिक भारतीय होने की उम्मीदों से भारतीयों, खासतौर से भारतीय मूल के अमेरिकियों को अब बचना चाहिए। हैरिस के लिए ऐसा करना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि जैसे-जैसे चुनाव के दिन करीब आते जाएंगे, वह पूरी तरह से अश्वेत होती जाएंगी। दरअसल, बिडेन के चुनावी अभियान में उन्हें अफ्रीकी-अमेरिकी वोटरों की करीबी के तौर पर पेश किया जाएगा, जो अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा मतदाता-वर्ग है। वे फ्लोरिडा, एरिजोना, पेंसिल्वेनिया, ओहियो, विस्कॉन्सिन, मिशिगन, वर्जीनिया व उन राज्यों में महत्वपूर्ण साबित होंगे, जहां रिपब्लिकन की अपेक्षाकृत कमजोर सरकारें हैं।
हालांकि, इन सबमें भी हैरिस अपनी भारतीयता का संकेत देने का वक्त और अवसर निकाल लेंगी। वह उन लोगों से अपील करेंगी, जो उन्हें वर्षों से जानते हैं। और यह वर्ष 2009 में दिवंगत हो चुकी अपनी मां श्यामला गोपालन का जिक्र करते हुए वह करेंगी, जो स्तन कैंसर के रिसर्च से जुड़ी थीं। हैरिस अपने जीवन के खास मौकों पर और अपनी उपलब्धियां बताते समय अमूमन मां की तस्वीर ट्वीट करती हैं, अपने जमैकाई पिता की कभी नहीं, जिनका नाम डोनाल्ड जैस्पर हैरिस है। वह स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उप-राष्ट्रपति पद की दावेदार के रूप में नाम घोषित होने के बाद जो बिडेन के साथ पहली बार सार्वजनिक मंच साझा करते समय हैरिस ने बेशक अपनी मिश्रित विरासत के बारे में बताया, मगर भावुक होकर वह अपनी मां के बारे में ही ज्यादा बातें करती रहीं कि कैसे सार्वजनिक जीवन में आने के लिए उन्होंने उन्हें प्रेरित किया था, और अब यही प्रेरणा उन्हें राष्ट्रपति पद का टिकट पाने वाली पहली अश्वेत महिला के रूप में इतिहास में जगह दिलाएगी।
बहरहाल, 3 नवंबर को, या जब भी चुनाव नतीजों की घोषणा होगी, वह अमेरिका की पहली महिला उप-राष्ट्रपति बन सकती हैं। हम इस बार अब तक के सबसे अप्रत्याशित चुनाव का गवाह बन सकते हैं। उनकी मां श्यामला गोपालन भविष्य में भी वह कड़ी बनेंगी, जो हैरिस को भारत से जोडे़गी।
चेन्नई में पली-बढ़ी श्यामला गोपालन अमेरिका की अपनी यात्रा शुरू करने से पहले दिल्ली में लेडी इरविन कॉलेज में पढ़ती थीं। हालांकि, कमला हैरिस आज भी डोसा बनाना नहीं जानती हैं, क्योंकि महीनों पहले शूट किए गए वीडियो में उन्होंने मेंडी कलिंग के सामने यह बात खुद मानी है। मगर उनके बारे में कोई भी राय बनाने से पहले हमें उनको कुछ और वक्त देना चाहिए। और इसकी वह हकदार हैं।

यशवंत राज, अमेरिका में हिन्दुस्तान टाइम्स संवाददाता

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