आस्था /शौर्यपथ /महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन के मनोबल हार जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हे कर्म का ज्ञान दिया था. भगवान श्रीकृष्ण का यह संदेश पूरे संसार को गीता के रूप में उपलब्ध है. गीता में मनुष्य के मन में उठने वाले सभी तरह के संशय का समाधान बताया गया है. यहां तक कि तनाव और डिप्रेशन जैसी स्थिति में भी गीता पढ़ने से राहत मिलती है. आइए जानते हैं मन की किस स्थिति में गीता के कौन से श्लोक के पाठ से राहत मिल सकती है.
मन की किस स्थिति में गीता का कौनसा श्लोक का करें पाठ
संघर्ष से परेशान
अगर आप अपने जीवन में आ रहे संघर्ष से परेशान हैं और इसके कारण तनाव में रह रहे हों तो गीता का यह श्लोक पढ़ें.
हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम् वा भोक्ष्यसे महिम्
तस्मात् उत्त्रूठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्रय:
सफलता नहीं मिल रही हो |
काफी प्रयास के बावजूद सफलता नहीं मिलने से निराश हो तो मनोबल बढ़ाने के लिए गीता के इस श्लोक का पाठ करें
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचना
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते साड्गोस्त्वकर्मणि
मन को भटकने से रोकने के लिए
अगर मन बेचैन हो और बेकार की बातों की ओर ध्यान ज्यादा हो तो गीता का यह श्लोक मदद कर सकता है.
श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेनद्रिय:
ज्ञानं लब्धा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति
क्रोध पर नियंत्रण |
क्रोध पर नियंत्रण के लिए गीता का इस श्लोक का पाठ करें
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहास्मृतिविभ्रम:
स्मृतिभ्रंशाद्धुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रश्यति