शौर्यपथ / विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख ने कहा है कि विश्व भर में प्रत्येक दस में से एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है। विशेषज्ञ पहले से ही कहते रहे हैं कि संक्रमण के जितने मामलों की संख्या बताई जा रही है, वास्तव में उससे अधिक लोग संक्रमण का शिकार हैं।
वैश्विक स्वास्थ्य निकाय में कोरोना महामारी पर सोमवार को हुई 34 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड की बैठक में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख डॉ. माइकल रायन ने कहा कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में संख्या में परिवर्तन हो सकता है, लेकिन अंततः इसका अर्थ यही है कि ‘विश्व की बड़ी आबादी खतरे में है। अब हम मुश्किल समय की ओर जा रहे हैं।’
10 प्रतिशत आबादी चपेट में आने की आशंका-
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया की 10 प्रतिशत आबादी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुकी है। अब भी बहुत बड़ी आबादी पर इसका खतरा मंडरा रहा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, लोगों के संक्रमित होने के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बस एक पहलू हैं क्योंकि इतने वृहद स्तर पर सटीक गिनती होने की संभावना कम है। डॉ. रायन ने कहा कि यह महामारी लगातार फैल रही है। दक्षिण पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और यूरोप तथा पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में संक्रमण और मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं।
कोरोना से मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुईं-
दुनियाभर में अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को कोरोना महामारी के कारण गहरा खामियाजा भुगतना पड़ा। डब्ल्यूएचओ द्वारा सोमवार को जारी एक नए सर्वेक्षण के अनुसार इससे 93 प्रतिशत देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुईं हैं। करीब 72% बच्चों और किशोरों, 70% बुजुर्गों तथा 61% गर्भवती महिलाओं मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल सकीं।
130 देशों में हुआ सर्वेक्षण-
डब्ल्यूएचओ ने जून से अगस्त के बीच 130 देशों में यह सर्वेक्षण किया और पता लगाया कि कोरोना महामारी के कारण मानसिक और न्यूरोलॉजिकल सेवाओं पर कितना प्रभाव पड़ा है। साथ ही देश इससे निपटने के लिए क्या तरीके अपना रहे हैं। सर्वेक्षण से पता चला है कि 67 प्रतिशत काउंसलिंग तथा साइकोथेरेपी सेवा में बाधा पहुंची और खुद को गहरी क्षति पहुंचाने वाले मरीजों को दी जाने वाली 65 प्रतिशत सेवाओं में व्यवधान आया।
10 अक्तूबर को वैश्विक कार्यक्रम होगा-
आगामी 10 अक्तूबर को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर डब्ल्यूएचओ द्वारा वैश्विक ऑनलाइन एडवोकेसी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के मद में अधिक निवेश की जरूरत पर चर्चा होनी है।