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षट्तिला एकादशी पर 6 तरह से ऐसे करें तिल का प्रयोग, खुल जाएगी आपकी बंद किस्मत

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  व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षट्तिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन एकादशी का व्रत करके लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना करने और तिल का दान करने का विशेष महत्व है। साथ ही षट्तिला एकादशी पर 6 तरह से तिल का प्रयोग किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गृहस्थ के लोग अगर इस दिन 6 तरह से तिल का प्रयोग करते हैं तो उनके जीवन में चल रहे सभी कष्ट खत्म हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही धन धान्य से संबंधित सभी समस्याओं का अंत हो जाता है और खुशियों में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं षट्तिला एकादशी पर तिल का 6 तरीके से प्रयोग कैसे करें...
तिल का पहला प्रयोग
   तिल का पहला प्रयोग स्नान वाले जल में करें। जी हां, षट्तिला एकादशी के दिन सुबह स्नान करने वाले पानी में कुछ तिल के दाने डाल दें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए या मंत्रों का जप करते हुए स्नान करें।
तिल का दूसरा प्रयोग
  तिल का दूसरा प्रयोग तिल का उबटन लगाकर करना चाहिए। ऐसा करने से आपको सर्दी के मौसम में आपको कई फायदे मिलेंगे। आर्युवेद के अनुसार, तिल का उबटन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और कई तरह के विकारों से दूरी भी रहेगी।
तिल का तीसरा प्रयोग
  तिल का तीसरा प्रयोग पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और 5 मुट्ठी तिलों से 108 बार ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करने में करने के बाद हवन में तिलों की आहुति दे दें।
तिल का चौथा प्रयोग
  तिल का चौथा प्रयोग तर्पण में करें। इसके लिए आप दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं और पितरों को तिल का तर्पण करें। षट्तिला एकादशी के दिन तिल से तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कई तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है।
तिल का पांचवा प्रयोग
  तिल का पांचवा प्रयोग तिल का दान करके करें। षट्तिला एकादशी के दिन तिल का दान करने से पुण्य फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत में उल्लेख है कि जो भी मनुष्य माघ मास में ऋषि-मुनि, गरीबों को तिल का दान करता है, वह कभी नरक के दर्शन नहीं करता है। माना जाता है कि माघ मास में जितने तिलों का दान करेंगे उतने हजारों साल तक स्वर्ग में रहने का अवसर प्राप्त होगा।
तिल का छठवां प्रयोग
  तिल का छठवां प्रयोग खाने में करना चाहिए। शाम के समय तिलयुक्त भोजन बनाकर भगवान विष्णु का भोग लगाएं और उस प्रसाद को सभी में वितरण कर दें। इसके बाद तिलयुक्त फलाहार कराना चाहिए।

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शौर्यपथ