नई दिल्ली। सड़क यात्रा के दौरान आपने अक्सर ‘मोटल’ शब्द सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ‘मोटल’ नाम कहां से आया और यह होटल से किस तरह अलग है? दरअसल, Motel शब्द ‘Motor’ और ‘Hotel’ से मिलकर बना है।
अमेरिका में 20वीं सदी के शुरुआती दौर में जब कारों का चलन तेजी से बढ़ा और लोगों में लंबी सड़क यात्राओं का शौक बढ़ने लगा, तब राजमार्गों और प्रमुख सड़कों के किनारे ऐसे ठहरने के स्थान विकसित होने लगे, जहां वाहन चालक अपनी कार के साथ आसानी से रुक सकें।
इन स्थानों को शुरुआती दौर में ‘Motor Hotel’ या मोटर यात्रियों के लिए बने लॉजिंग के रूप में जाना गया। समय के साथ ‘Motor Hotel’ का संक्षिप्त रूप ‘Motel’ प्रचलित हो गया।
मोटल की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
मोटल और होटल में सबसे बड़ा अंतर उनकी बनावट और उद्देश्य में देखा जाता है। मोटल आमतौर पर राजमार्गों, हाईवे या प्रमुख सड़कों के किनारे बनाए जाते हैं। यहां कमरों के ठीक बाहर या बेहद नजदीक वाहन पार्क करने की सुविधा होती है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सड़क यात्रा कर रहे व्यक्ति को अपना सामान कार से कमरे तक ले जाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती।
कुछ घंटों या एक रात के ठहराव के लिए सुविधाजनक
मोटल का इस्तेमाल मुख्य रूप से लंबी सड़क यात्रा के दौरान रात में रुकने या थोड़े समय के विश्राम के लिए किया जाता है। वहीं होटल आमतौर पर शहरों, पर्यटन स्थलों और व्यावसायिक क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं और उनमें लॉबी, रेस्तरां, रूम सर्विस सहित कई अतिरिक्त सुविधाएं हो सकती हैं।
अमेरिका से शुरू हुई एक दिलचस्प अवधारणा
अमेरिका में ऑटोमोबाइल और हाईवे संस्कृति के विकास ने मोटल की लोकप्रियता को बढ़ाया। 1920 के दशक में मोटर यात्रियों के लिए सड़क किनारे ठहरने की सुविधाएं तेजी से विकसित हुईं। ‘Motel’ शब्द के शुरुआती प्रसिद्ध प्रयोगों में 1925 में कैलिफोर्निया के San Luis Obispo में बने ‘Milestone Mo-Tel’ का उल्लेख मिलता है।
आज मोटल केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के कई देशों में हाईवे और प्रमुख सड़क मार्गों के आसपास यात्रियों को सुविधाजनक और कम अवधि का ठहराव उपलब्ध कराने के लिए मोटल संचालित होते हैं।
यानी अगली बार जब आप ‘मोटल’ शब्द सुनें, तो याद रखिए—यह नाम ही अपने इतिहास की कहानी कहता है: Motor + Hotel = Motel।