शिक्षा /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में धन, करियर, बिजनेस, सेहत और तरक्की समेत जीवन के अन्य पहलुओं के बारे में बात की है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में असफलता को सफलता में बदलने की नीतियां भी बताई हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया है कि इंसान और जानवर में चार बातें समान होती हैं। लेकिन एक गुण से व्यक्ति को जानवर से अलग बनाता है।
नीति शास्त्र के 17वें अध्याय के एक श्लोक में बताया गया है कि इंसान और जानवर में चार बातें समान होती हैं। श्लोक में चाणक्य ने इंसान के उस गुण के बारे में भी बताया है जो उसे जानवर से अलग बनाता है। नीति शास्त्र के अनुसार, हर इंसान को खुद को पहचानना आना चाहिए और इस गुण को कभी नहीं खोना चाहिए जो आपको जानवरों से अलग बनाता है।
चाणक्य नीति का श्लोक-
आहारनिद्राभयमैथुनानिसमानि
चैतानि नृणां पशूनाम् ।
ज्ञानं नराणामधिको विशेषो
ज्ञानेन हीनाः पशुभिः समानाः ॥
चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि हर इंसान को जानवर और जानवर की प्राथमिकता पेट भरना है। इसके साथ ही उसके लिए सोना भी जरूरी होता है। इसके साथ हर जीव मैथुन करता है। इंसान और जीव दोनों को ही डर रहता है। दोनों ही अपनी लाइफ की सिक्योरिटी प्राथमिकता से करते हैं। चाणक्य कहते हैं कि इंसान और जानवरों में 4 बातें समान होने के बावजूद भी एक बात इंसान को जानवर से अलग बनाती है। चाणक्य कहते हैं कि इंसान बिना ज्ञान के जानवरों के ही समान है। यानी जो व्यक्ति अपना ज्ञान नहीं बढ़ाता या ज्ञान का इस्तेमाल नहीं करता वह जानवर के समान है।