शिक्षा /शौर्यपथ / भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। कहते है कि भोलेनाथ अपने भक्तों में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किसी रत्न की जरूरत नहीं होती है। भोलेनाथ अपने भक्त को गुणों से प्रसन्न होकर उसपर अपनी कृपा दृष्टि बरसाते हैं। महात्मा विदुर ने आचार्य चाणक्य की भांति ही विदुर नीति में बताया है कि किन गुणों वाले व्यक्ति पर हमेशा भोले नाथ की कृपा बनी रहती है।
विदुर जी कहते हैं कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त व्यक्ति साधारण जीवन जीना पसंद करता है। ऐसे व्यक्ति में दिखाना नहीं होता है। जिस व्यक्ति के ऊपर भगवान शिव की कृपा होती है, वह दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं करता है। न ही वह कटु वचनों को बोलता है। ऐसा व्यक्ति जानबूझकर किसी का भी अपमान नहीं करता है। विदुर जी के अनुसार, महादेव की कृपा प्राप्त व्यक्ति पशु प्रेमी होता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी जानवर पर अत्याचार नहीं करता है।
अर्थम् महान्तमासाद्य विद्यामैश्र्वर्यमेव वा।
विचरत्यसमुन्नद्धों य: स पंडित उच्यते।।
इस श्लोक में विदुर जी कहते हैं, जो व्यक्ति धन-संपत्ति, ज्ञान, ऐश्वर्य और लक्ष्मी होने पर दिखावा या अहंकार नहीं करता है। दूसरों से विनम्रता से पेश आता है। ऐसे व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा बरसती है।
पिबन्ति नद्य: स्वयमेव नाम्भ: स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षा:।
नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहा: परोपकाराय सतां विभृतय:।।
विदुर जी आगे कहते हैं कि जिस तरह से नदियां स्वयं जल नहीं पीतीं, पेड़ खुद फल नहीं खाते हैं। बादल खुद उगाया अनाज नहीं ग्रहण करते हैं। ठीक उसी तरह से महादेव की कृपा प्राप्त व्यक्ति परोपकार में जीवन बिताता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता है।