लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / शैतानी करने पर बच्चों को पिटाई का डर दिखाया जाता है पर यह तरीका न सिर्फ बच्चों के अंदर बुरी आदतों को मजबूत बनाता है, बल्कि उनके विकास में भी बाधक बन जाता है। अमेरिका, चीन, ब्रिटेन समेत नौ देशों में किए गए 69 वैज्ञानिक अध्ययनों की एक समीक्षा के आधार पर यह कहा गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिटाई से बच्चों का व्यवहार और ज्यादा खराब हो जाता है। यह समीक्षा प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका द लांसेट में प्रकाशित हुई है।
इस समीक्षा के वरिष्ठ लेखक और टेक्सास विश्वविद्यालय के मानव विकास व परिवार विज्ञान के प्रो.
एलिजाबेथ गेर्शंफ का कहना है कि माता-पिता अपने बच्चों को मारते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके व्यवहार में सुधार होगा। पर दुर्भाग्य से इस तरह की पिटाई अथवा शारीरिक दंड बच्चों के व्यवहार में सुधार नहीं करता है, बल्कि इसे और भी खराब बना देता है। इस शोध में वैज्ञानिकों ने बच्चों पर शारीरिक हिंसा की श्रेणी में आने वाले तरीकों को अलग करके उन तरीकों के बच्चों पर असर का अध्ययन किया जो आमतौर पर अभिभावक अपनाते हैं। यह समीक्षा अमेरिका, कनाडा, चीन, कोलंबिया, ग्रीस, जापान, स्विट्जरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन में किए गए 69 वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर की गई।
इस समीक्षा के वरिष्ठ लेखक और टेक्सास विश्वविद्यालय के मानव विकास व परिवार विज्ञान के प्रो.
एलिजाबेथ गेर्शंफ का कहना है कि माता-पिता अपने बच्चों को मारते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके व्यवहार में सुधार होगा। पर दुर्भाग्य से इस तरह की पिटाई अथवा शारीरिक दंड बच्चों के व्यवहार में सुधार नहीं करता है, बल्कि इसे और भी खराब बना देता है। इस शोध में वैज्ञानिकों ने बच्चों पर शारीरिक हिंसा की श्रेणी में आने वाले तरीकों को अलग करके उन तरीकों के बच्चों पर असर का अध्ययन किया जो आमतौर पर अभिभावक अपनाते हैं। यह समीक्षा अमेरिका, कनाडा, चीन, कोलंबिया, ग्रीस, जापान, स्विट्जरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन में किए गए 69 वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर की गई।
अधिकांश देशों में पिटाई वैध
यूनिसेफ के मुताबिक, सबसे चिंता की बात यह है कि दुनिया में 2 से 4 वर्ष की आयु के लगभग 63% बच्चे या या लगभग 25 करोड़ बच्चे, ऐसे देशों में रहते हैं जहां का कानून अभिभावकों को उनकी पिटाई की अनुमति देते हैं। यही वजह है कि आम अभिभावक इस प्रवृत्ति से बाहर ही नहीं आ पाता कि बच्चों को पीटे बिना भी उनके व्यवहार में सुधार लाया जा सकता है।