Print this page

88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान फल प्रदान करती है यह एकादशी

  • rounak group

आस्था / शौर्यपथ / आषाढ़ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। आदिकाल में देवर्षि नारद ने एक हजार साल तक एकादशी का निर्जल व्रत कर भगवान श्री हरि विष्णु की भक्ति प्राप्त की। भगवान श्रीकृष्ण ने योगिनी एकादशी व्रत को लेकर कहा कि यह व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान फल प्रदान करने वाला है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने से समस्त पाप मिट जाते हैं। रोगों से मुक्ति मिलती है। एकादशी पर भगवान श्री हरि विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
एकादशी तिथि एक दिन की होती है, लेकिन इसका व्रत तीन दिनों तक रहता है। व्रत के नियम दशमी को सूर्यास्त के बाद से लागू हो जाते हैं और द्वादशी के दिन पारण तक रहते हैं। एकादशी के दिन गाजर, शलजम, गोभी, पालक का सेवन नहीं करना चाहिए। तामसिक भोजन से परहेज रखें। एकादशी के दिन किसी भी वृक्ष से पत्ते ना तोड़ें। पौधों को जल दें। इस दिन बाल न कटाएं। एकादशी व्रत में रात्रि जागरण कर श्री हरि भगवान विष्णु के नाम का जाप करें। इस व्रत में नमक नहीं खाया जाता है। इस व्रत में किसी दूसरे के दिए हुए अन्न का सेवन न करें। दूसरी बार भोजन न करें। किसी की निंदा न करें। पापी मनुष्यों के साथ बातचीत त्याग दें। एकादशी के दिन क्रोध, मिथ्या भाषण का त्याग करना चाहिए। कांसे के बर्तन में भोजन करना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद करें।इस व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें। एकादशी पर भगवान श्री हरि विष्णु को पीले फूल अर्पित करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। एकादशी पर पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें।

Rate this item
(0 votes)
शौर्यपथ