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जब करियर के पीक पर विनोद खन्ना ने छोड़ दी थी एक्टिंग, ओशो के आश्रम में बन गए थे माली

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मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर विनोद खन्ना का आज 74वां जन्मदिन है। उन्होंने अपनी एक्टिंग से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। भले ही वह इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके काम को आज भी याद किया जाता है। विनोद खन्ना की निजी जिंदगी काफी चर्चा में रही। एक वक्त ऐसा था जब वह अपने बेहतरीन करियर और परिवार को छोड़कर आध्यात्म की तरफ मुड़ गए थे।
विनोद खन्ना साल 1975 में आध्यात्म गुरु ओशो के संपर्क में आ गए थे। जानकारी के मुताबिक, वह पुणे के ओशो आश्रम में कई सालों तक रहे थे। वह ओशो के साथ अमेरिका भी गए और उनकी सेवा में लगे रहते थे। वह ओशो के पर्सनल गार्डन के माली भी बने। इसके अलावा वह वाशरूम से लेकर बर्तन तक साफ करने का काम किया करते थे।
एक इंटरव्यू के दौरान अक्षय खन्ना ने पिता विनोद के सन्यास की तरफ रुख करने की कहानी सुनाई थी। उन्होंने कहा कि विनोद इस कदर ओशो से प्रभावित थे कि उन्होंने न केवल अपने परिवार को छोड़ दिया था बल्कि संन्यास भी ले लिया था। यह एक लाइफ चेंजिंग फैसला था। उस वक्त अक्षय 5 साल के थे और उनके लिए पिता के इस फैसले को समझ पाना बहुत मुश्किल था। हालांकि, अक्षय खन्ना अब मानते हैं कि अब वह पिता के उस फैसले को समझते हैं।
कुछ समय बाद विनोद खन्ना का मन ओशो के आश्रम से उचट गया। तब तक उनका परिवार बिखर चुका था। अमेरिका के ओशो आश्रम में रहते हुए ही उनका पत्नी गीतांजलि से अलगाव हुआ। 1985 में उन्होंने पत्नी से तलाक ले लिया। इसके बाद उन्होंने अपने से 16 साल छोटी कविता दफ्तरी से शादी कर ली। कविता, अमेरिका और यूरोप से पढ़ाई पूरी करने के बाद इंडस्ट्रियलिस्ट पिता सरयू दफ्तरी का बिजनेस संभाल रही थीं। बताया जाता है कि फिरोज खान ने विनोद खन्ना को फिल्मों में वापसी करने में मदद की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार कई फिल्मों काम किया।

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