मनोरंजन /शौर्यपथ /म्यूजिक डायरेक्टर एआर रहमान उनमें से हैं, जिन्होंने काफी स्ट्रगल किया है। सक्सेस की सीढ़ी चढ़ना उनके लिए आसान बिल्कुल नहीं रहा। म्यूजिक की दुनिया में ऑस्कर विजेता एआर रहमान उन गिने-चुने लोगों में से एक हैं, जिन्होंने भारत को ग्लोबल लेवल पर रखा है। हालांकि, आज भी इनके धर्म परिवर्तन को लेकर कई बातें बनती हैं और वह सुर्खियों में रहते हैं।
एआर रहमान के जन्म के बाद उनका नाम दिलीप कुमार रखा गया था, लेकिन इन्होंने परिवार के साथ इस्लाम को चुना। म्यूजिक कंपोजर पिता आरके शेखर के निधन के बाद इन्होंने यह कदम उठाया। या यूं कहिए कि पहला बड़ा प्रोजेक्ट ‘रोजा’ के रिलीज से पहले वह इस्लाम की ओर मुड़े। एआर रहमान के दोस्त त्रिलोक नायक ने कृष्णा त्रिलोक की ऑटोबायोग्राफी ‘नोट्स ऑफ अ ड्रीम’ में बताया कि रहमान की मां करीमा बेगम ने फिल्म क्रेडिट में एआर रहमान का नाम बदलने की गुजारिश की थी, वह भी आखिरी मिनट में। उन्होंने कहा, “यह मेरी एक बड़ी रिक्वेस्ट है, वह भी दिन के आखिर में। मेरी मां इसे लेकर काफी विशेष है। उनका कहना है कि यह बात उनके लिए काफी, काफी मायने रखती है, पर्सनली। उनका कहना है कि अगर मेरा नया नाम फिल्म के क्रेडिट में नहीं गया तो इससे अच्छा नाम न जाना होगा।”
रहमान का कहना है कि मैं किसी पर धर्म को लेकर दबाव नहीं बनाना चाहता हूं। हिन्दुस्तान टाइम्स ब्रंच संग इंटरव्यू में रहमान ने कहा, “आप किसी पर कोई चीज नहीं थोप सकते हैं। आप अपने बेटे या बेटी से यह नहीं कह सकते हैं कि उसे इतिहास लेना चाहिए, इकोनॉमिक्स या साइंस नहीं। यह हर व्यक्ति की पर्सनल चॉइस होती है।”
रहमान बताते हैं कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि सक्सेसफुल बनने के लिए क्या इस्लाम धर्म अपनाना चाहिए, लेकिन मैं हमेशा इस पर चुप्पी साधे रखता हूं। रहमान कहते हैं कि मेरे लिए इस्लाम में बदलना नहीं है। मेरे लिए स्पॉट को ढूंढना और देखना कि क्या यह वाक्य आपकी जिंदगी में क्लिक करता है। मेरे आध्यात्मिक गुरु, मेरी मां और सूफी गुरुओं ने मुझे कई स्पेशल चीजें सिखाई हैं। हर आस्था में कोई स्पेशल चीज होती है और इसे हमने चुना है। और हम इसके साथ खड़े हैं।
रहमान आगे कहते हैं कि दुआ करना हमारे लिए फायदेमंद रहा है। इसने मुझे कई मुश्किलों से बचाया है। दूसरे में आस्था रखने वाले लोग भी यही करते हैं, उनके लिए यह शांतिपूर्ण अहसास होता है। मेरे लिए, यह है। मुझे दुआ करने से शांति मिलती है।