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दुर्ग कांग्रेस आखिर बंट गया दो गुट में ? Featured

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शौर्यपथ राजनीति / दुर्ग कांग्रेस की पहचान और केन्द्रीयकरण सालो से वोरा निवास से ही शुरू होती थी और वोरा निवास पर ही खत्म होती थी . कांग्रेस संगठन की बात करे तो दुर्ग में कांग्रेस से सम्बंधित हर फैसला पहले मोतीलाल वोरा और बाद में अरुण वोरा के फैसले पर निर्भर करता था किन्तु कल २३ अगस्त को मुख्यमंत्री बघेल के जन्मदिन पर दुर्ग कांग्रेस दो भागो में नजर आयी . दुर्ग की कांग्रेस की राजनीती में कल का दिन संभवतः ऐसा दिन था जिसमे अनेक स्थानों पर दुर्ग विधायक की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही चाहे वो संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम की बात हो या मुख्यमंत्री को दिए जाने वाले बधाई सन्देश की बात हो कई स्थानों पर दुर्ग विधायक की अनदेखी शहर में चर्चा का विषय रही .
मुख्यमंत्री बघेल के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए दुर्ग कांग्रेस ने इस बार गौठान से लेकर अस्पताल तक जगह जगह विभन्न आयोजन किये किन्तु किसी भी आयोजन में कांग्रेस के दुर्ग विधायक की उपस्थिति नहीं थी जो राजनितिक हलको में चर्चा का विषय रही . यहाँ तक की दुर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष भी इन कार्यक्रमों से नदारद रहे .
बता दे कि मुख्यमंत्री बघेल की सबसे महत्तवपूर्ण योजना नरवा , गरवा , घुरवा , बाड़ी है इस योजना के लिए प्रदेश का हर कांग्रेसी अपने अपने स्तर से प्रयास कर रहा है . कल का दिन इसी योजना को मजबूत करने के लिए जिले सहित प्रदेश के हर मुख्यालय में गौठान में मुख्यमंत्री बघेल का जन्मदिन मनाया गया . दुर्ग में यह कार्यक्रम पुलगांव स्थित गौठान में आयोजित हुआ आयोजन सुबह १० से दोपहर १२.३० बजे तक चला . इस कार्यक्रम में दुर्ग शहर के सभी कांग्रेसी नेता पहुंचे जिसमे से राजेन्द्र साहू , लक्ष्मण चंद्राकर , पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर , पूर्व विधायक प्रदीप चौबे , पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा , छाया महापौर नीलू ठाकुर , युवा कांग्रेस से पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयंत देशमुख , एन एस यु आई के सोनू साहू , निगम के सभापति राजेश यादव सहित दो तीन पार्षदों को छोड़ सभी पार्षद सहित कई कांग्रेसी पहुंचे किन्तु दुर्ग संगठन के मुखिया अध्यक्ष गया पटेल नदारद रहे वही दुर्ग विधायक अरुण वोरा भी नहीं दिखे जबकि गौठान से कुछ दुरी पर वृद्धा आश्रम में इनकी उपस्थिति की बात सुनी जा रही थी . वही पुलगांव चौक पर एनएसयुआई द्वारा निशुल्क मास्क व सेनेटाइसर के वितारह व मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर मिठाई वितरण के कार्यक्रम में भी विधायक वोरा और अध्यक्ष गया पटेल की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही तो युवा कांग्रेस के द्वारा ३६५ यूनिट रक्तदान का आयोजन युवा कांग्रेस के तत्वाधान में रखा गया था . इस आयोजन में भी दुर्ग के सभी कांग्रेसी युवाओ का हौसलाअफजाई करने उपस्थित हुए किन्तु इस कार्यक्रम में भी दुर्ग विधायक और दुर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष की अनुपस्थित चर्चा का विषय रही .
पोस्टर वार की जंग भी मुख्यमंत्री बघेल के जन्मदिन पर असर कर गयी ऐसे कई पोस्टर शहर में लगे जिसमे दुर्ग विधायक और अध्यक्ष के फोटो नदारद थे जो कि शायद दुर्ग के कांग्रेस राजनीती के इतिहास में पहली बार हुआ .जबकि इन पोस्टरों में भिलाई विधायक , गुन्डरदेहि विधायक सही निगम सभापति को जगह मिली किन्तु दुर्ग विधायक वोरा , महापौर बाकलीवाल को जगह नहीं दी गयी .
शहर में यही चर्चा दिन भर चलती रही की क्या दुर्ग के विधायक इन आयोजन से स्वयं को दूर रखे हुए थे या फिर उन्हें इसके लिए आमंत्रित नहीं किया गया था और शहर कांग्रेस के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में हुए इन आयोजनों का सूत्रधार कौन है या फिर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ एक रबर स्टाम्प की तरह है . कारण जो भी रहा हो किन्तु मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर दुर्ग कांग्रेस में एक दुसरे केंद्र का भी आगाज हो ही गया . कांग्रेसी चाहे कितना भी बात को सँभालने की कोशिश करे और तरह तरह के बातो से मामले को भूलने की कोशिश करे किन्तु एक तरफ विधायक गुट और दूसरी तरफ अन्य कांग्रेसी नेता है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता .

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