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April 24, 2026
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राजनीति

राजनीति (1213)

रायपुर। शौर्यपथ  । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के बीच छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा है कि राज्य में अब सत्ता परिवर्तन तय है। उन्होंने दावा किया कि मतदान के शुरुआती रुझान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि जनता बदलाव चाहती है और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की विदाई निकट है।

अरुण साव ने भरोसा जताया कि इस बार पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी पहली पसंद बनकर उभरेगी और “कमल खिलने” के साथ राज्य को सुशासन, सुरक्षा और विकास की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों की सुरक्षा और युवाओं को रोजगार के अवसर देना भाजपा की प्राथमिकता होगी।

? कांग्रेस पर तीखा प्रहार — “ओबीसी के मुद्दे पर दोहरा चेहरा”

उप मुख्यमंत्री साव ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी का ओबीसी वर्ग के प्रति रवैया हमेशा से दोहरा रहा है।

उनके अनुसार, जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसने अन्य पिछड़ा वर्ग की उपेक्षा की, लेकिन अब सत्ता से बाहर होने के बाद वह ओबीसी हितैषी बनने का दिखावा कर रही है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की पूर्व भूपेश बघेल सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में भी ओबीसी वर्ग के साथ न्याय नहीं हुआ।

? इतिहास का हवाला, कांग्रेस पर सवाल

नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए साव ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद काका कालेकर आयोग की रिपोर्ट को दबाकर रखा और मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने में भी गंभीरता नहीं दिखाई।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वी.पी. सिंह की सरकार ने मंडल आयोग लागू किया, जबकि उस समय राजीव गांधी ने इसका विरोध किया था।

? राजनीतिक संदेश स्पष्ट

अरुण साव ने कहा कि देश और प्रदेश का ओबीसी वर्ग अब कांग्रेस के “राजनीतिक दिखावे” को समझ चुका है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगा।

? निष्कर्ष:

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा का आत्मविश्वास चरम पर है। अब सबकी नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि क्या वास्तव में “बदलाव की बयार” सत्ता परिवर्तन में बदलती है या नहीं।

  भिलाई / शौर्यपथ / दुर्ग जिले में एक ही पते पर संचालित हो रही कथित केमिकल फैक्ट्रियों का मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव द्वारा विधानसभा में उठाए गए इस मामले में विभागीय जवाब के बाद नए सवाल खड़े हो गए हैं। जवाब से असंतुष्ट विधायक ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है।

विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने अपने उत्तर में कहा कि इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, इसी जवाब में यह भी स्वीकार किया गया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 24 फरवरी 2025 को चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर जिले के 16 कोलतार प्रोसेसिंग आधारित उद्योगों की जांच कराई थी, जिसमें से 8 उद्योग पर्यावरणीय सहमति की शर्तों के उल्लंघन के दोषी पाए गए। विभाग ने इन पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है, लेकिन कार्रवाई की प्रकृति और स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।

मामले को और उलझाते हुए 24 जून 2025 को प्राप्त एक शिकायत में उद्योगों द्वारा तथ्यों को छिपाकर केंद्रीय पर्यावरण स्वीकृति लेने का आरोप सामने आया, लेकिन इस शिकायत पर कोई जांच समिति गठित नहीं की गई। वहीं, एक अन्य शिकायत के आधार पर पर्यावरण मंडल ने 7 जुलाई 2025 को पत्र क्रमांक 8879 जारी कर उद्योग संचालनालय समेत अन्य विभागों से पत्राचार किया।

यह मामला EOW तक भी पहुंच चुका है, जहां शिकायत क्रमांक 02/2025 के रूप में पंजीबद्ध है और जांच प्रतिवेदन अब तक लंबित है।

विधायक देवेंद्र यादव ने 20 अप्रैल 2026 को EOW को भेजे पत्र में विधानसभा में दिए गए जवाब को विरोधाभासी बताते हुए कहा है कि एक ओर शिकायत न होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर जांच समिति गठित कर उल्लंघन की पुष्टि भी की गई है। उन्होंने पूरे प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई, जांच की स्थिति और जिम्मेदार अधिकारियों पर हुई कार्यवाही का स्पष्ट विवरण मांगा है।

इस पूरे घटनाक्रम में शिकायतों के अस्तित्व पर भ्रम, जांच की आंशिक कार्रवाई और स्पष्ट निष्कर्षों के अभाव ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें EOW की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

दुर्ग। दुर्ग की राजनीति हमेशा से छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख केंद्र रही है। लेकिन पिछले चार दशकों से यहाँ कांग्रेस का संगठन एक ही 'परिवार' और 'रिमोट कंट्रोल' की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। यह एक ऐसी व्यवस्था थी जहाँ निर्णय संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा नहीं, बल्कि एक खास दरबार में लिए जाते थे। परिणाम? जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी, निष्क्रिय कार्यकर्ता और जनता से दूरी।

धीरज बाकलीवाल: ‘जमीनी संगठन’ और ‘बूथ मज़बूती’ का नया दौर

लेकिन अब दुर्ग शहर कांग्रेस में एक 'नयी रोशनी' दिखाई दे रही है, जिसका श्रेय शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल को जाता है। बाकलीवाल ने पुरानी परिपाटी को चुनौती देते हुए संगठन को फिर से सक्रिय करने का काम शुरू किया है। उनका स्पष्ट विश्वास है कि एक 'सशक्त बूथ ही सशक्त संगठन की आधारशिला' है।

संगठनात्मक कसावट: बाकलीवाल ने 5 ब्लॉक, 10 मंडल, 60 वार्ड और 275 बूथों पर संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का अभियान चलाया है।

सक्रिय विपक्ष: वह केवल संगठनात्मक कार्यों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जनता के मुद्दों को भी मजबूती से उठा रहे हैं। चाहे वो ई-चालान का मुद्दा हो या हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के छात्रों के भविष्य से जुड़ी लापरवाही, बाकलीवाल प्रशासन के सामने मजबूती से पक्ष रख रहे हैं।

सामाजिक सरोकार: धीरज बाकलीवाल सामाजिक रूप से भी जनता से जुड़ रहे हैं। तिरुपति से लौटे तीर्थयात्रियों का स्वागत और ऐसी अन्य गतिविधियाँ उन्हें जनता के करीब ला रही हैं।

अरुण वोरा की ‘गिरती साख’ और ‘गुटबाजी’ का घेरा

दूसरी ओर, पूर्व विधायक अरुण वोरा की कार्यशैली अब चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके समय में संगठन के निर्णय एक ही दरबार से लिए जाते थे। पुराने जिला अध्यक्षों को तो संगठन की गतिविधियों की जानकारी तक नहीं होती थी; हर छोटे-बड़े सवाल का जवाब 'वोरा जी से पूछकर बताएंगे' में सिमट जाता था। जानकार मानते हैं कि पूर्व की राजनीति केवल चुनाव के समय कार्यकर्ताओं को याद करने और संगठन को अपनी मुट्ठी में रखने तक सीमित थी। यह 'एकल ध्रुवीय' व्यवस्था दुर्ग में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।

चुनौतियां अभी बाकी हैं: ‘मतलबपरस्त’ नेताओं और ‘चाटुकारों’ की फौज

यद्यपि यह 'नया उदय' सुखद है, लेकिन धीरज बाकलीवाल के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। संगठन में अभी भी ऐसे नेताओं की फौज है जो केवल सत्ता के लाभ के लिए मंचों पर आसीन हो जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी कोई अहमियत नहीं है। चाटुकारों की यह फौज गुटबाजी को हवा देती है और संगठन के कार्यों में बाधा डालती है।

निष्कर्ष: ‘नयी रोशनी’ से ‘भविष्य की जीत’ की ओर

अगले 17-18 महीनों में चुनावी मोड शुरू हो जाएगा। बाकलीवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन 'मतलबपरस्त' नेताओं से बचते हुए कर्मठ कार्यकर्ताओं की ऐसी टीम तैयार करना है, जो कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचा सके। यदि धीरज बाकलीवाल इसी तरह संगठन और कार्यालय को आबाद रखने में सफल रहे, तो दुर्ग शहर कांग्रेस के लिए यह 'नया उदय' न केवल सुखद होगा, बल्कि भविष्य की जीत का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

यह राजनीतिक लेख दुर्ग कांग्रेस में चल रही इस बड़ी उथल-पुथल और 'नयी रोशनी' की शुरुआत को बयां करता है।

मृणेन्द्र चौबे 

राजनांगांव /शौर्यपथ / प्रदेश का किसान खरीफ सीज़न की तैयारी में है , सरकार सोसायटियों के माध्यम से खरीफ सीजन की खेती की तैयारियों के लिए किसानों को खाद व ऋण उपलब्ध कराना प्रारंभ कर चुकी है किंतु भाजपा सरकार के निर्देश पर किसानों को दिए जा रहें ऋण पर पूर्व विधायक छन्नी साहू ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि खेती की लागत दिनों दिन बढ़ रही है और सरकार किसानों को दिए जाने वाले ऋण की राशि में लगातार कम कर रही है जो कि सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को स्पष्ट करती है, अनेक सोसायटी से लगातार शिकायत प्राप्त हो रही है कि सोसायटियों में दी जाने वाली ऋण की राशि मे कटौती करते हुए राशि दी जा रही है जो कि किसान विरोधी निर्णय है, जिसका दूरगामी परिणाम सरकार को भुगतने होंगे, ऐसा निर्णय लेकर सरकार लगातार किसानों को हतोत्साहित कर रही है। छन्नी साहू ने भाजपा सरकार से मांग किया है कि पूर्व की तरह सरकार किसानों को खरीफ सीजन की खेती के लिए प्रति एकड़ बीस हजार से अधिक की राशि व पर्याप्त खाद व बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

0ऋण अनुदान की राशि से बचना चाह रही है भाजपा सरकार

खुज्जी विस पूर्व विधायक छन्नी साहू ने कहा है कि पूर्व में रबी व खरीफ सीजन में सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में लिमिट के अनुसार प्रति एकड़ बीस हजार से अधिक की राशि किसानों को उपलब्ध कराते आई है, रबी सीजन के लिए ली गई ऋण की राशि 22 जून से पहले अदा कर खरीफ के लिए पुनः उतना ही राशि उपलब्ध कराते रही है, किन्तु किसान विरोधी भाजपा सरकार रबी और खरीफ को एकसाथ जोड़कर मात्र 13860 रुपये की राशि अभी सोसाइटी के माध्यम से उपलब्ध करा रही है जो कि खेती पर बढ़ते लागत मूल्य से बहुत कम है, यह पुरा खेल ऋण अनुदान की राशि को बचाने के चक्कर मे किया जा रहा है, जिससे खेती और किसान सकंट में दिखाई देते हुए दिख रहे है, पिछले दो वर्षों में भाजपा सरकार के दौरान किसानों का बहुत बुरा अनुभव रहा है बीते दो वर्षों में किसानों को न तो समय पर खाद मिल पाया और न ही बीज उपलब्ध हो पाया है जिसपर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए कार्य करना चाहिए, पूर्व विधायक छन्नी साहू ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि अब समय आ चुका है जब सरकार को उनके किये जा रहे कृत्य का किसानों द्वारा एकजुट होकर माकूल जवाब दिया जाए।

दुर्ग। शौर्यपथ।

एनएसयूआई द्वारा प्रदेश महासचिव Aditya Narang के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रस्तावित प्रवेश शुल्क लागू करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की गई।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि Bhupesh Baghel के कार्यकाल में शुरू की गई स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। ऐसे में शुल्क लागू किया जाना इस योजना की मूल भावना के विपरीत है।

एनएसयूआई ने अपने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में ₹410 एवं ₹445 जैसे अतिरिक्त शुल्क भी अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ साबित होंगे। साथ ही शिक्षा के अधिकार के तहत सरकारी विद्यालयों में शिक्षा सर्वसुलभ होनी चाहिए और शुल्क का प्रावधान शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

प्रदेश महासचिव आदित्य नारंग ने कहा कि समाचार माध्यमों से यह जानकारी सामने आई है कि फंड की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने आग्रह किया कि शासन अन्य स्रोतों या बजट आवंटन के माध्यम से विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित करे, न कि छात्रों पर शुल्क का भार डाला जाए।

एनएसयूआई ने जिला शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया कि जनहित एवं छात्रहित को ध्यान में रखते हुए इस मांग को राज्य शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा की निरंतरता बनी रहे।

ज्ञापन सौंपने के दौरान तिरुपति युवा चंद्राकर, तुषार कुमार, पीयूष सिन्हा, मयंक देशमुख, दीप बंजारे, कैलाश साहू, मृदुल सिंह, अभय देशलहरा, निशांत राव सहित अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

*पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी की कॉरपोरेट भूमिका क्यों,रायगढ़-तमनार के संदर्भ में यह नियुक्ति और भी अधिक संदिग्ध और चिंताजनक- संजीत विश्वकर्मा प्रदेश संगठन मंत्री आप*

रायपुर। जिंदल समूह द्वारा पूर्व भारतीय वन सेवा वरिष्ठ अधिकारी एस.एस. बाजाज को कॉरपोरेट लाइजनिंग का छत्तीसगढ़ राज्य प्रमुख नियुक्त किया गया है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीत विश्वकर्मा ने कहा है कि यह नियुक्त बहुत साधारण सी लगती है लेकिन यह केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि राज्य में कॉरपोरेट प्रभाव, प्रशासनिक पहुंच और सत्ता-संबंधों के खतरनाक गठजोड़ का संकेत है। सरकार, प्रशासन और पर्यावरणीय नियम-कानूनों की पूरी समझ रखने वाले ऐसे अधिकारी के पास पद, पहुँच और संवेदनशील जानकारियों का जो प्रभाव है, उसका दुरुपयोग होने की पूरी आशंका है। यह स्थिति जनहित और पारदर्शिता, दोनों के लिए गंभीर खतरा है। यह सांठगांठ, छत्तीसगढ़ में सरकार, अफसरशाही और कॉरपोरेट गठजोड़ के उस काले चेहरे को उजागर करता है, जिसके कारण जल, जंगल, जमीन और जनता के अधिकारों की खुलेआम नीलामी की बड़ी तैयारी की जा रही है।

लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती गीतेश्वरी बघेल कि यह बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला है। जिन अधिकारियों पर जनता के संसाधनों की रक्षा करने, कानून का पालन कराने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वही लोग अब कॉरपोरेट घरानों के लिए रास्ता साफ करने के काम में लग जाएं, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता और पूंजी के गठबंधन से चलने वाली लूट की व्यवस्था है।आखिर छत्तीसगढ़ की जनता यह कैसे माने कि जिन लोगों ने शासन तंत्र, नीतियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संवेदनशील निर्णयों के बीच वर्षों तक काम किया, वे अब उन्हीं जानकारियों और संबंधों का इस्तेमाल कॉरपोरेट हित साधने के लिए नहीं करेंगे? यह सीधा-सीधा हितों का टकराव है। यह नैतिक पतन है। यह छत्तीसगढ़ की जनता के सार्वजनिक विश्वास के साथ विश्वासघात है। रायगढ़, तमनार और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही जनता जमीन, पर्यावरण, प्रदूषण, विस्थापन और जल संकट को लेकर त्रस्त है। वहां यदि कॉरपोरेट कंपनियां पूर्व अधिकारियों को लाइजनिंग के लिए आगे कर रही हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि वे जनता की आवाज को दबाकर, प्रशासन पर प्रभाव डालकर और नियम-कानून को मोड़कर अपने हित सुरक्षित करना चाहती हैं।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ कोई कॉरपोरेट कंपनियों की जागीर नहीं है। यह राज्य यहां की जनता का है, आदिवासियों का है, किसानों का है, युवाओं का है, श्रमिकों का है। लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे दलालों, पूंजीपतियों और सत्ता संरक्षित अफसरशाही के हवाले कर दिया है।

हम मांग करते हैं कि इस तरह की नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच हो। पूर्व अधिकारियों के कॉरपोरेट रोल पर सख्त नियम बनें। और रायगढ़-तमनार सहित संवेदनशील क्षेत्रों में चल रही सभी कॉरपोरेट गतिविधियों की पारदर्शी समीक्षा की जाए। यदि सरकार ने इस मामले को हल्के में लिया, तो आम आदमी पार्टी सड़क में जाकर इस मुद्दे को उठाएगी। छत्तीसगढ़ महतारी को लूटने वालों, जनता के अधिकारों का सौदा करने वालों और अफसरशाही को कॉरपोरेट दलाली में बदलने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।

दुर्ग।

शहर में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से मध्य, दक्षिण, पूर्वी, पश्चिम एवं उत्तर—सभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों की महत्वपूर्ण बैठकें क्रमशः संपन्न हुईं। इन बैठकों ने न केवल संगठनात्मक सक्रियता का संदेश दिया, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति की स्पष्ट झलक भी प्रस्तुत की।

मध्य ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की बैठक ब्लॉक अध्यक्ष श्री अल्ताफ अहमद की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें प्रभारी श्रीमती सीमा वर्मा एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री धीरज बाकलीवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसी क्रम में दक्षिण ब्लॉक की बैठक श्री गुरदीप सिंह भाटिया, पूर्वी ब्लॉक की बैठक श्री मनीष बघेल, पश्चिम ब्लॉक की बैठक श्री आनंद कपूर ताम्रकार तथा उत्तर ब्लॉक की बैठक श्री देवीश्री साहू की अध्यक्षता में संपन्न हुईं। सभी बैठकों में प्रभारी सीमा वर्मा और जिला अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की सक्रिय मौजूदगी ने संगठन को एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया।

इन बैठकों की सबसे खास बात यह रही कि हर ब्लॉक में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। अनुभवी नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संवाद ने बैठकों को न केवल सार्थक बनाया, बल्कि संगठनात्मक मजबूती की दिशा में ठोस आधार भी तैयार किया।

सूत्रों के अनुसार, बैठकों में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, आमजन से सीधा संवाद बढ़ाने, और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार रहने और आपसी समन्वय को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो इन बैठकों को कांग्रेस के “संगठन सुदृढ़ीकरण अभियान” का हिस्सा माना जा रहा है। जिस तरह पांचों ब्लॉकों में एकसाथ बैठकें आयोजित की गईं, उससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अब बिखरी हुई गतिविधियों के बजाय समन्वित और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है।

हालांकि, इन बैठकों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या यह संगठनात्मक सक्रियता जमीनी स्तर पर चुनावी परिणामों में तब्दील हो पाएगी। क्योंकि दुर्ग की राजनीति में कांग्रेस को पिछले कुछ समय से आंतरिक गुटबाजी और निष्क्रियता के आरोपों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यह बैठकों की श्रृंखला पार्टी के लिए एक अवसर भी है और परीक्षा भी।

निष्कर्ष:

पांचों ब्लॉकों की सफल बैठकों ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक ऊर्जा का संचार जरूर किया है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह ऊर्जा जनसमर्थन में कितनी प्रभावी ढंग से परिवर्तित हो पाती है।

दुर्ग / शौर्यपथ।

दुर्ग विधानसभा के मिलपारा वार्ड क्रमांक 38 में इन दिनों स्थानीय राजनीति गरमाई हुई है। वार्ड पार्षद रामचंद्र सेन पर लगातार भेदभाव, निष्क्रियता और जनता से दूरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब मामला केवल वार्ड की समस्याओं तक सीमित नहीं रहा—बल्कि सीधे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की छवि तक जुड़ता नजर आ रहा है।

वार्ड के कई मोहल्लों से लगातार यह शिकायत सामने आती रही है कि पार्षद न तो नियमित रूप से क्षेत्र में दिखाई देते हैं और न ही सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। निचले स्तर की सफाई व्यवस्था और जनसमस्याओं की अनदेखी ने पहले ही वार्डवासियों में असंतोष का माहौल बना रखा है। ऐसे में जब मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्डों का दौरा कर जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की पहल की गई, तो वार्ड क्रमांक 38 के लोगों को भी उम्मीद जगी।

“इंतजार करता रहा मोहल्ला, पर नहीं पहुंचे मंत्री”

जानकारी के अनुसार, मां संकट हरनी मंदिर लाइन (बरपेड चौक) क्षेत्र के लोग मंत्री के स्वागत और अपनी समस्याएं बताने के लिए एकत्रित हुए थे। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद रामचंद्र सेन मंत्री को उस इलाके में लेकर ही नहीं पहुंचे, जहां उनके खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रोश था। नतीजतन, मोहल्लेवासी लंबे समय तक इंतजार करते रहे और बाद में उन्हें पता चला कि मंत्री का दौरा महज 10-15 मिनट में समाप्त कर दिया गया।

“दौरे को सीमित कर क्या छिपाना चाहते हैं पार्षद?”

स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या पार्षद ने जानबूझकर मंत्री का दौरा उन इलाकों तक सीमित रखा, जहां विरोध कम था? क्या यह उनकी निष्क्रियता और जनता के आक्रोश को छिपाने की कोशिश थी?

चुनाव के दौरान घंटों वार्ड में घूम-घूमकर समर्थन मांगने वाले पार्षद पर अब आरोप है कि जीत के बाद वे जनता से दूर हो गए हैं। ऐसे में मंत्री के दौरे को भी सीमित कर देना कई सवाल खड़े करता है।

मंत्री की पहल पर “स्थानीय बाधा”?

गौरतलब है कि मंत्री गजेंद्र यादव लगातार अपने क्षेत्र में जनसमस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं। लेकिन वार्ड 38 की घटना ने यह संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर कुछ जनप्रतिनिधि ही इस प्रक्रिया में बाधा बन रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्री तक वास्तविक स्थिति नहीं पहुंचने दी जाएगी, तो इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित होंगे बल्कि उनकी जन-छवि पर भी अनावश्यक सवाल खड़े हो सकते हैं।

जनता में बढ़ता असंतोष, जवाबदेही की मांग

वार्ड के रहवासियों में अब यह मांग तेज हो रही है कि पार्षद की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मंत्री स्वयं बिना स्थानीय फिल्टर के सीधे जनता से संवाद करें।

फिलहाल, मिलपारा वार्ड में एक ही चर्चा जोरों पर है—

“क्या पार्षद की निष्क्रियता मंत्री की सक्रियता पर भारी पड़ रही है?”

अब देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम पर पार्षद रामचंद्र सेन और मंत्री गजेंद्र यादव की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, और क्या वार्ड 38 की जनता को उनके सवालों का जवाब मिल पाता है या नहीं।

महिला एवं बाल विकास विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया
भाजपा सरकार कमीशनखोरी में लगी, बिना कमीशन के काम नहीं होता

रायपुर/शौर्यपथ (राजनितिक)/ पूरी की पूरी भाजपा सरकार कमीशनखोरी में लगी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि साय सरकार में कोई ऐसा विभाग नहीं है जहां बिना कमीशन के काम हो जाए। सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग तो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छोटी साड़ी देकर सरकार ने भ्रष्टाचार की इंतहा को पार कर दिया। सरकार ने बहनों का चीरहरण घोटाला कर दिया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 6.3 मीटर की जगह 5 मीटर और 4.5 मीटर से भी कम लंबाई और चौड़ाई एवं घाटिया साड़ियां महिला एवं बाल विकास विभाग में वितरण किया गया है। साड़ियों के लंबाई और चौड़ाई में कम होने के कारण महिलाएं साड़ी का उपयोग नहीं कर पा रही। जो साड़ी हथकरघा के बुनकरों से 500 रू. में लेना था वही साड़ी गुजरात से 100 रू. में खरीद कर 500 रू. की बिलिंग करवा ली गयी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में एक महिला मंत्री के होते हुए महिलाओं के साथ उनके अधिकार पर डाका डाला जा रहा है और महिला मंत्री कमीशन-कमीशन खेल रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में यह पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी कई भ्रष्टाचार सामने आए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में 40 करोड़ से अधिक की पोषण सामग्री खरीद में अनियमितता की गयी तथा सामूहिक कन्या विवाह योजना में बिना टेंडर वर्क आर्डर के काम दे दिया गया एवं प्रदेश के लगभग 2899 आंगनबाड़ी केंद्रों में 16 करोड़ की लागत से टीवी और आरओ यूनिट की खरीद में नियमों की अनदेखी की गई है, इसमें केंद्रीकृत टेंडर के बजाय टुकड़ों में खरीद कर भ्रष्टाचार किया गया है। यही नहीं सुचिता योजना के तहत सेनेटरी पैड जैसे समान की खरीदी पर भ्रष्टाचार किया गया, पूरा विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आंगनवाड़ी के कार्यकर्ता और सहायिकाओं को जो घटिया गुणवत्ताहीन साड़ियां बांटी गई है, वह साड़ियां महिला एवं बाल विकास विभाग वापस ले और साथ ही आंगनवाड़ी के बहनों को अच्छी क्वालिटी का साड़ी प्रदान करें। 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए जो साड़ी खरीदी गई थी वह साड़ी महिला एवं बाल विकास विभाग के मंत्री जो स्वयं महिला है उसको देखे कैसे उस साड़ी को लोग पहनेंगे? महिला एवं बाल विकास विभाग में बार-बार ऐसा भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी का खेल सामने आने के बाद मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर इस्तीफा दे।

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